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नकल,भ्रष्टाचार का कलंक कैसे धोयेगी न्यायपालिका?

रायपुर शुक्रवार। दिनांक 27 अगस्त 2010

नकल,भ्रष्टाचार का कलंक
कैसे धोयेगी न्यायपालिका?
परीक्षा हाल में लगे कैमरे की मदद से देश के पांच जजों को आंध्र प्रदेश के एल एलएम परीक्षा आयोजकों ने नकल करते देखा। इनमें से एक पूरी किताब लिये हुए था तो कुछ के पास फाड़े हुए पन्ने और अन्य नकल सामग्री थी। आयोजकों की आंखों के बाद यह किस्सा पूरे देश में फैल गया कि पांच जज नकल करते हुए पकड़े गये। हमारी न्याय व्यवस्था को शर्मसार करने वाली यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी कम से कम आधा दर्जन माननीय जज पीएफ घोटाले और अन्य मामलों में दोषी पाए जा चुके हैं। इस घटना ने आम लोगों की न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और ईमानदारी दोनों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। न्याय व्यवस्था पर हम हमेशा गर्व करते रहे हैं। अब भी हमें उसपर गर्व है किंतु कहावत है- एक मछली पूरे तालाब को खराब करती है- क्या पीएफ घोटाले और एल एलएम परीक्षा में नकल मारने वाले माननी यों ने कु छ ऐसा ही नहीं किया? जो लोग नकल मारकर पास होते हैं, उनका नौकरी पाने के बाद का चरित्र क्या रहता है, यह बताने की जरूरत नहीं। जिन लोगों को पंच- परमेश्वर अर्थात भगवान का दर्जा प्राप्त है, वही जब ईमानदारी को किनारे रख अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को आगे बढ़ाये तो उनके भक्तों पर क्या गुजरेगी? देश में तेजी से पनप रहे भ्रष्टाचार और ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की होड़ का ही यह नतीजा है कि हमारी न्याय व्यवस्था की छोर पकड़े लोग भी अब इस क्षेत्र में कूद पड़े हैं। देश की व्यवस्था के लिये यह एक कठिन चुनौती है। सब तरह से हारकर न्यायालय में पहुंचने वाला व्यक्ति कम से कम यहां पहुँचकर इस बात की उम्मीद करता रहा है कि उसे यहां संपूर्ण व स्वच्छ न्याय मिलेगा लेकिन कतिपय लोगों की लगातार भ्रष्ट कोशिशों ने इस व्यवस्था पर एक के बाद एक काले धब्बे लगाने शुरू कर दिये। हम मानते हैं कि हमारी न्याय व्यवस्था आज भी पूर्व की तरह पवित्र है। इसमें आज भी ईमानदार और स्वच्छ छवि के लोग है जो निष्पक्ष न्याय करते हैं किंतु जिस तरह कतिपय नये लोगों का समावेश इस व्यवस्था में हो रहा है। वह राष्ट्रीय चरित्र में घुल मिल गई बुराइयों को साथ लेकर इस व्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं, जो पूरी व्यवस्था को आगे आने वाले दिनों में भारी संकट में डाल सकती है। कसाव को फाँसी या अन्य ऐसे ही बड़े मुद्दों पर फैसला होने पर जिस विश्व ने हमारी न्याय व्यवस्था को सराहा था, वह विश्व आज जब हमारे जजों को पीएफ फंड में घोटाला कर पैसा कमाने और नकल मारते पकड़े जाने जैसी खबर को देखता व सुनता है। तो उसकी प्रतिक्रिया का अहसास हम कर सकते हैं। न्याय व्यवस्था को न केवल पारदर्शी, ईमानदार व सर्वत्र बाहरी प्रभाव से मुक्त होने की जरूरत है-हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि वर्तमान न्याय व्यवस्था में मौजूद ईमानदार व स्वच्छ छवि का व्यक्तित्व इस काले धब्बे को धो कर न्याय व्यवस्था की ईमानदार छवि को कायम रख सकेंगे।

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