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नर्सिग होम पर लगाम!

नर्सिग होम पर लगाम!
छत्तीसगढ़ में अब निजी अस्पताल,नर्सिंग होम,क्लीनिक और पैथालाजी लैब खोलने के लिये लायसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। आम आदमी के स्वास्थ्य और उसको आर्थिक दृष्टि से परेशान होने से बचाने यह सरकारी पहल है। इस मामलें में केन्द्र का एक काननू अभी विचाराधीन है, लेकिन निजी अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिये प्रदेश सरकार ने पहले पहल कर इस मामले में भी बाजी मार ली है। नये कानून के तहत मरीजों के हितों की रक्षा के लिये अनेक प्रावधान किये गये हैं जिसके तहत पहले से संचालित नर्सिंग होम और निजी अस्पताल को भी अपना संस्थान चलाने के लिये लायसेंस लेना होगा। छत्तीसगढ़ उपचारिया गृह तथा रोगोपचार संबन्धी स्थापना अनुज्ञापन विधेयक 2010 के नाम से यह कानून बना है जिसे केबिनेट की मंजूरी मिल गई है और इसे अगले विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जायेगा। इसके साथ ही यह नियम कानून में बदल जायेगा। इस विधेयक का मकसद आम आदमी को स्वास्थ्य की गुणवत्ता सुविधा देना है तथा निजी अस्पतालों की बाढ़ को रोकना है। मरीज इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद अस्पताल की शिकायत सरकार से कर सकता है अगर शिकायत सही पाई गई तो ऐसे चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई भी की जायेगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद भी इसी तरह की एक अन्य योजना पर कार्य कर रहे े हैं जिसके तहत चिकित्सकों की फीस,पैथालाजी फीस, एक्सरे,एमआर आई और अन्य स्वास्थ्य संबन्धी क्रियाकलापों के लिये जो हाई फाई फीस ली जाती है। उस पर लगाम लग सकेगी। आज की स्थिति में निजी अस्पतालों में जो मनमानी होती है उस पर सरकारी कोड़े के पड़ते ही काफी हद तक रोक लगने की संभावना है। राज्य सरकार ने जगह- जगह ऊगने वाले अस्पतालों की बाढ़ रोक ने और मरीज की शिकायतों के निराकरण के लिये कानून बनाया है, किन्तु केन्द्र का जो कानून आयेगा वह चिकित्सकों को परेशानी में डाल सकता है। चूंकि कथित कानून आने के बाद नर्सिंग होम वाले न मनमानी फीस वसूल कर सकेंगे और न ही मरीजों को बिना वजह अलग- अलग टेस्टों के लिये मजबूर कर सकेंगे। आज की स्थिति में मरीज का कन्सलटेंट के पास जाना भर होता है कि वह खून टेस्ट से लेकर स्केनिगं, एमआरआई सबके लिये मरीज को मजबूर कर देता है। चूंकि इन सबसे उनकी सांठगांठ रहती है। मरीज के परिवारों को इस लूट से बचाने के लिये राज्य सरकार के साथ केन्द्र सरकार का आने वाला कानून काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है। इस मामले में राज्य सरकार ने मरीजों के हित में जो पहल की है। उसके लिये उसे बधाई देनी चाहिये। आम आदमी कीे स्वास्थ्य संबन्धी शिकायतों का बहुत हद तक निराकरण नये कानून से हो सकता है। साथ ही नर्सिंग होम की बाढ़ और उसमें होने वाली अनावश्यक प्रतिस्पर्धा पर भी रोक लग सकती है।

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

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काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
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चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …