गुम इंसान की खोज लाश दिखाकर!
गुम इंसान की खोज लाश दिखाकर! (वेणोन्गिल चक्का वे-रेलुम कायकिम)यह एक मलयालम कहावत है जिसका हिन्दी अनुवाद है - चाहे तो कटहल(जेक फ्रूट) जड़ों में भी लग सकता है. इस कहावत का उपयोग हम यहां उस पुलिस व्यवस्था पर कर रहे हैं जो बहत्तर वर्ष पूर्व के अंग्रेज शासनकाल से बस यूं ही चली आ रही है अगर वह चाहे तो क्या कुछ संभव नहीं हो सकता.? लोग यह कहने में संकोच नहीं करते कि पुलिस व्यवस्था अमीरो के लिये हैं. गरीब तो बस... गरीब है उसके लिये वह कानून उसके सामाजिक जीवन के लिये न होकर उसके द्वारा कथित रूप से किये गये चोरी और अन्य छोटे मोटे अपराध के लिये है.जिसमें ऐसे अपराध भी शामिल है जो मजबूरी या अनजाने में हो जाते हैं मसलन घर से पैसे चुरा ले जाना, साड़ी कपडे गायब हो जाना. या भूख की वजह से घर में रखा स्वादिष्ट व्यंजन खा लेना.. ऐसे अपराधों में मालिक या मालिकिन से कठोर सजा तक देने में काई कमी नहीं की जाती. अमीर या प्रभावशाली अपराध कर दे तो उसका कोई संज्ञान नहीं.कई बार तो एफआईआर तक नहीं लिखी जाती.लिखवाने वाले को थानों में जलील किया जाता है. और भी बहुत कुछ.!इस भूमिका के पीछे यूं तो कई कह...