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रफतार की नई तकनालाजी...लो आ गई बुलेट ट्रेन!

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रफतार की नई तकनालाजी...लो आ गई बुलेट ट्रेन! भारत में इस गुरूवार को जापान और भारत के बीच रफतार की एक नई तकनालाजी का उदय हुआ है. इसमें दो मत नहीं कि जब भी हमारे देश में कुछ इस तरह की तकनालाजी या संस्कृति कदम रखती है तो उसका पहले विरोध होता है जैसा पहले टीवी, कम्पयूटर का हुआ. हाल ही ड्रायवर लेस कार ने ऐसे विरोध को हवा दी. परिवहन मंत्री ने तो यह तक कह दिया कि हम इस कार को भारत की धरती पर कदम रखने नहीं देंगे. इसी कड़ी में अब तेज रफतार से दौडऩे वाली बुलेट ट्रेन भी कई लोगों को रास नहीं आ रही है. इसके पीछे छिपे कुछ कारण भी है जिसपर गौर करने की जरूरत है. भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी रेल सेवा होने के बावजूद सुविधाओं, सुरक्षा और किराये के मामले में सदैव आलोचना का शिकार रही है. ऐसे में हाल के कुछ दिनों में आम जनता को लेकर जाने वाली ट्रेनों का बेपटरी होना भी इस नई आधुनिकता को निशाने पर ले रहा है. अहमदाबाद और मुम्बई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन का फायदा आम जनता को कितना मिलेगा यह अपने आप में प्रश्र है वहीं इसपर खर्च होने वाली राशि पर लगने वाला ब्याज भी किसी को रास नहीं आ रहा है. हम अपने द...

न्याय में देर है अंधेर नहीं...देरी अब चुभने लगी है!

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घिनौने और क्रूर अपराधों से हमारा इतिहास भरा पड़ा है. इसमें दो मत नहीं कि देश के कानून ने क्रूरतम अपराधों में लिप्त लोगों को बख्शा भी नहीं किन्तु न्याय प्राप्ति में देर अब भी एक समस्या बनी हुई है इसके पीछे मौजूद कारण बताने की जरूरत नहीं. न्यायधीशों की कमी और ज्यादा मामले इसके पीछे एक कारण रहा है. अब धीरे धीरे इस समस्या का समाधान जरूर हो रहा है किन्तु अभी भी अपराध की गति में कोई कमी न आना चिंता का विषय है शायद इसके पीछे एक कारण यह भी है कि हमारा कानून अन्य देशों की बनस्बत कुछ रहम दिल है इसका फायदा उठाकर अपराधी जघन्य अपराध करने से भी नहीं चूकते. बीते वर्षो में कुछेक ऐसे मामले हुए जो मानवता को शर्र्मसार करने वाली थी जिसमें से अधिकांश में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा भी मिली. कुछ को तो फांसी पर भी लटकाया गया लेकिन इसके बाद भी अपराधों का ग्राफ कम न होना चिंता का विषय है. इंडियन नेवी के अधिकारी के दो बच्चों गीता चोपड़ा साढ़े16 वर्ष और संजय चोपड़ा 14 वर्ष का 28 अगस्त 1978 को अपहरण और बलात्कार के बाद हत्या हुई- दो अपराधी बिल्ला और रंगा पकड़े गये मुकदमा चला तथा करीब चार साल बाद 31 जनवरी 1982 को...

अब जुड़ेंगी नदियां एक दूसरे से,देर हुई मगर लाभ होगा!

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भारत की सारी बड़ी नदियों को आपस में जोडऩे का प्रस्ताव पहली बार इंजीनियर सर आर्थर कॉटन ने 1858 में दिया था.  कॉटन इससे पहले कावेरी, कृष्णा और गोदावरी पर कई डैम और प्रोजेक्ट बना चुके थे लेकिन तब के संसाधनों के बूते से बाहर होने के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी.1970 में तब इरिगेशन मिनिस्टर रहे केएल राव ने फिंर देश की नदियों को एक दूसरे से जोडऩे का प्रस्ताव दिया - वे चाहते थे कि एक नेशनल वॉटर ग्रिड बने ताकि गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में जहां ज्यादा पानी रहता है वह  मध्य और दक्षिण भारत के इलाकों में पानी की कमी को पूरा करें. अगर उस समय से यह योजना क्रियान्वित कर दी जाती तो आज देश की खुशहाली इतनी बढ जाती कि देश देखता रह जाता. एक अंदाज लगाइये उस समय से लेकर अब तक देश के उपयोग में लाया जा सकने वाला कितना पानी अब तक बह गया होगा.बहरहाल राव चाहते थे कि उत्तर भारत का अतिरिक्त पानी मध्य और दक्षिण भारत तक पहुंचाया जाए केंद्रीय जल आयोग ने उनकी इस योजना को तकनीकी रूप से अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया.इसके बाद नदी जोड़ परियोजना की चर्चा 1980 में हुई. एचआरडी मिनिस्ट्री ने एक र...

पेट्रोल,डीजल की कीमतों में कमी ही हमारी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लायेगी

 यू.एस. सहित कुछ देशों में इन्वैंट्री बढऩे और वल्र्ड मार्के ट में सप्लाई बढऩे से 1 महीने में क्रूड 10 प्रतिशत से ज्यादा सस्ता हुआ है इस सप्ताह गुरूवार को क्रूड 49 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया जो पिछले 4 हफ्तों का लो लैवल है, दूसरी ओर इराक ने साफ  कर दिया है कि वह आगे क्रूड प्रोडक्शन बढ़ाने जा रहा है इससे भी कच्चा तेल सस्ता होने से 1 मई को होने वाली तेल मार्कीटिंग कम्पनियों की पाक्षिक समीक्षा के दौरान पैट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम कम होने  की संभावना व्यक्त की जा रही है. कुछ और ओपेक देशों के भी ईराक की राह पर चलने से इंकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल जो स्थिति बनी है वल्र्ड मार्केट में क्रूड सस्ता होने का फायदा इंडियन कंज्यूमर्स को मिलेगा. आगे क्रू्रड और सस्ता होता है तो सरकार पैट्रोल-डीजल की कीमतों को और कम कर सकती है यह जनता की सरकार से उम्मीद भी है.हमारे देश  में शुरू से अर्थव्यवस्था एक तरह से तेल के भावों पर ही निर्भर रहता है. तेल के भाव बढऩे के साथ साथ वस्तुओं के भावों में भी वृद्वि होना शुरू हो जाती है इसमें कुछ वजह तो लोग कृत्रिम रूप  से भी बना लेते हैं जि...

डोकाला विवाद के बाद क्या सब कुछ ठीक!

डोकाला विवाद के बाद क्या सब कुछ ठीक! यह एक अच्छी खबर इस सप्ताह के शुरू में मिली कि चीन और भारत के बीच डोकाल मामले पर तनाव खत्म हो गया है ओैर दोनों देशों की सेनाओं ने पीछे हटने का निर्णय लिया है. दोनों देश खासतौर से एशिया व अफ्रीका में अपने ढांचेगत संपर्क को बढ़ाने में जुटे हैं. सवाल यह है कि ऐसे कदमों को क्या हम हमेशा एक-दूसरे के खिलाफ ही देखेंगे? डोका ला विवाद सुलझाने में चीन ने जैसा रवैया दिखाया है और पड़ोसी देशों से जुड़े हमारे संबंध व हितों को लेकर अपनी थोड़ी परिपक्वता का परिचय दिया है, उससे भरोसा होता  है कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय वार्ता आगे बढ़ सकती है. इस सप्ताह की शुरूआत में जब भारतीय  विदेश मंत्रालय की तरफ से यह बयान आया कि डोका ला से भारत व चीन, दोनों देशों की सेनाएं लौट रही हैं, तो उसके चंद घंटों पहले ही यह खबर भी आई थी कि गुरमीत राम रहीम के बहाने डोका ला विवाद को लेकर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर तंज कसा है. ग्लोबल टाइम्स  का रुख यही बता रहा था कि चीन अंत तक भारत पर अपनी सेना वापस लौटाने का दबाव बनाता रहा, मगर भारत ने भी अपनी स्थिति सा...

मैरिटल रेप: केन्द्र की दलील मे दम तो है...

मैरिटल रेप: केन्द्र की दलील मे दम तो है... केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में मैरिटल रेप या वैवाहिक बलात्कार को अपराध करार देने के लिए दायर की गई याचिका के खिलाफ़ कहा कि इससे विवाह की संस्था अस्थिर हो सकती है. केन्द्र की दलील में दम है. सरकार ने कहा है कि मैरिटल रेप को अपराध नहीं करार दिया जा सकता है, ऐसा करने से विवाह की संस्था अस्थिर हो सकती है तथा पतियों को सताने के लिए पत्नी के पास ये एक आसान औजार हो सकता है.भारतीय दंड विधान या आईपीसी की धारा 375 के तहत कोई व्यक्ति अगर किसी महिला के साथ अगर इन छह परिस्थितियों में यौन संबन्ध बनाता है तो कहा जाएगा कि रेप किया गया.1. महिला की इच्छा के विरुद्ध 2. महिला की मर्जी के बिना 3. महिला की मर्जी से, लेकिन ये सहमति उसे मौत या नुक़सान पहुंचाने या उसके किसी करीबी व्यक्ति के साथ ऐसा करने का डर दिखाकर हासिल की गई हो. 4. महिला की सहमति से, लेकिन महिला ने ये सहमति उस व्यक्ति की ब्याहता होने के भ्रम में दी हो. 5. महिला की मर्जी से, लेकिन ये सहमति देते वक्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हो या फिर उस पर किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव हो और लड़की कं...

ईधन की बढ़ती कीमतें! बर्दाश्त से बाहर..

गुरुवार से पेट्रोल की कीमत में 1.23 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल की कीमत में 89 पैसा प्रति लीटर का इजाफा हो गया. पिछली बार पेट्रोल की कीमत में 1 पैसा प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 44 पैसा प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी. इससे पहले 16 अप्रैल को पेट्रोल के दाम में 1.39 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 1.04 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी. इस समय आम आदमी की एक बड़ी परेशानी यही है. दाम लगातार बढ़ रहे हैं.इसके बावजूद कि अमरीका और अरब देशों से क्रूड आइल के मामले में समझौते हुए हैं.इस बीच धर्मेन्द्र प्रधान का यह बयान की टैक्स में कोई कमी नहीं होगी लोगो के गुस्से को और बढ़ा रहा है.  जुलाई से अब तक पेट्रोल के मूल्योंं में 6 रुपये की बढौत्तरी हो चुकी है  इस समय पेट्रोल की दर तीन साल के अपने उच्च स्तर पर है. पेट्रोल कीमतों में प्रतिदिन मामूली संशोधन होता है. जो बढ़कर आज उच्च स्तर पर पहुंच रहा है. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार जुलाई की शुरुआत से डीजल की कीमतों में 3.67 रुपये लीटर की बढ़ोतरी हुई है. इस समय डीजल  अपने चार महीने के उच्च स्तर पर है. 16 जू...

सीबीएस सी कोर्स या बोझ का पिटारा!

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 सीबीएस सी कोर्स या बोझ का पिटारा! 19 जुलाई 2017    |    एंटोनी जोसफ इस...

कब तक हम प्रदूषित ध्वनि और जाम की चपेट में फंसे रहेंगे?

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 कब तक हम प्रदूषित ध्वनि और जाम की चपेट में फंसे रहेंगे? 14 दिसम्बर 2016    |    एंटोनी जोसफ · रोज सुबह तीन से पांच बजे का समय! जब शहरो में लोग गहरी नींद...

महिलाओं की सुरक्षा पर अब कठोर होगा कानून?

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   महिलाओं की सुरक्षा पर अब कठोर होगा कानून? 21 मार्च 2017    |    भारत भी विश्व की उस सूची में शामिल हैं जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है. हम चौथे स्थान पर हैं जबकि हमारी परंपरा संस्कृति सब महिलाओं को इज्जत और आदर देती रही है.भला जिस देश में जहां,नर में राम और नारी में सीता देखने की संस्कृति रही हो, नदियों क...

नाव पलटी दर्जनों मरें....कौन है ऐसे हादसों के लिये जिम्मेदार?

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 नाव पलटी दर्जनों मरें....कौन है ऐसे हादसों के लिये जिम्मेदार? 16 जनवरी 2017    |    एंटोनी जोसफ यह एक मानवीय प्रवृति बन गई है कि देर से पहुंचे...बस में चढऩा है तो दौड़ के चढ़े, ट्रे...

इतनी धन- संपदा कि..फटी रह गई लोगों की आंखें...!

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 इतनी धन- संपदा कि..फटी रह गई लोगों की आंखें...! 10 जुलाई 2017    |    एंटोनी जोसफ अब यह बात लगभग साफ होने लगी है कि विदेशों में जमा काले धन से कुछ ज्यादा ही माल हमारे देश के कतिपय प...

वे गर्दन काट रहे और ये...इनमें उनमें क्या अंतर? इंसान हैं या दरिन्दे!

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 वे गर्दन काट रहे और ये...इनमें उनमें क्या अंतर? इंसान हैं या दरिन्दे! 27 अप्रैल 2017    |    एंटोनी जोसफ ...

आजादी के अड़सठ साल-कुछ लोग सोने की थाली में पैदा हुए तो कुछ धोखा देकर बन गये कुबेर

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  आजादी के अड़सठ साल-कुछ लोग सोने की थाली में पैदा हुए तो कुछ धोखा देकर बन गये कुबेर 23 फरवरी 2017    |    एंटोनी जोसफ सोचिये!!अ...

तो फिर ईव्ही एम को बंद कर बैलेट फिर से लाना चाहिये!

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 तो फिर ईव्ही एम को बंद कर बैलेट फिर से लाना चाहिये! 15 मार्च 2017    |    एंटोनी जोसफ उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में सभी पार्टी और नेताओं ने एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नही...

अपराध की तपिश से क्यों झुलस रहा छत्तीसगढ़?

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 अपराध की तपिश से क्यों झुलस रहा छत्तीसगढ़? 05 अक्तूबर 2016    |    एंटोनी जोसफ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित बड़े शहर इन दिनों गंभीर किस्म के अपराधों से झुलस रहे हैं वहीं पुलिस क...

ब्लू वेल का एक दूसरा भाई भी है सुपर बाइक स्टंटबाज!

  ब्लू वेल का एक दूसरा भाई भी है सुपर बाइक स्टंटबाज! 18 अगस्त 2017    |    एंटोनी जोसफ पौने छै: लाख रूपये मूल्य की सुपर बाइक से अपने दोस्तों के साथ रेस लगा रहे दिल्ली के एक लड़के की दीवार से टकरा जाने से मौत...

मानवता शर्मसार है? अग्रिपथ...अग्रिपथ..अग्निपथ!

    फिर वही कहानी...! शवों व असहाय को कंधे पर लादना कोई शौक नहीं और न ही दिखावा है, यह सिर्फ हमारी व्यवस्था द्वारा दी गई चोट है, जिसे भी लोग अपने साथ लाद रहे हैं. हमारी अंधी- बहरी व्यवस्था ने कुछ ऐसा बना दिया है कि प्राय: हर महीने कोई असहाय किसी न किसी को अपने कंाधों पर लादने मजबूर है.इसमें चाहे उस व्यवस्था से जुड़ा हुआ खाखी पहनने वाला पुलिस वाला ही क्यों न हो वह भी इस कमजोर व्यवस्था के आगे झुकने मजबूर है. समाज में रौब का दूसरा रूप माने जाने वाले ऐसे व्यक्ति भी एक अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने के कारण अपनी बूढ़ी मां को कंधे पर बिठालकर चलने विवश हुआ. पुरानो में श्रवण कुमार एक ऐसा पात्र था जिसने अपने माता पिता को चारों धाम के दर्शन कराने के लिये अपने कंाधों पर लेकर घूमता रहा लेकि न आज एक अन्य श्रवण कुमार भी छत्तीसगढ़ के परलकोट में मिला जो हमारी घिसटती व्यवस्था के परिपे्रक्ष्य में -परेशान नजर आया जिसे अपने पिता की संदिग्ध परिस्थितियों मे मौत के बाद उनके शव को पोस्ट मार्टम के लिये अपनी बाइक के पीछे गठरी बांधकर ले जाना पड़ा. अच्छी स्वास्थ्य सेवा, एम्बुलेंस, स्वच्छता, सफाई और अस्पता...