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सरकारी कामों में पब्लिक दखल,क्या कर्मचारी सुरक्षित हैं?

अक्सर सरकारी दफतरों में यह आम बात हो गई है कि किसी न किसी बात को लेकर कर्मचारियों से बाहरी लोग आकर उलझ पड़ते हैं. इसमें दो मत नहीं कि कतिपय सरकारी कर्मचारी भी अपने रवैये से लोगों को उत्तेजित कर देते हैं किन्तु सभी इस तरह के नहीं होते. सरकारी काम लेकर पहुंचने वाले प्राय: हर व्यक्ति में सरकारी सेवक से गलत व्यवहार करने का ट्रेण्ड चल पड़ा है. देरी से होने वाले काम, सरकारी तोडफ़ोड, सरकार के बिलो केे भुगतान में देरी, रेलवे में बिना टिकिट के दौरान टी ई से झगड़ा और ऐसे ही कई किस्म के मामले उस समय कठिन स्थिति में पहुंच जाते हैं जब सरकारी सेवक अकेला पड़ जाता है और मांग करने वाले या सेवा लने वाले ज्यादा हो जाते हैं फील्ड में काम करने वाला पुलिस वाला भी कभी कभी ऐसे जाल में फंस जाता है कि कभी कभी तो उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है. मुठभेड़ या फिर अन्य आपराधिक मामलों को छोड़ भी दिया जाये तो आंदोलन के दौरान कई निर्दोष सिपाही या उनके अफसर भीड़ की चपेट में आकर अपनी जान से हाथ धो बैठते है जिसका खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ता है.सरकारी काम को लोग ने उन कर्मचारियों का व्यक्तिगत मामला समझने की भू...

...दुष्कर्मियों की कब तक होती रहेगी खातिरदारी?

बुलंदशहर में कार से जा रही मां-बेटी से हाईवे पर गैंगरेप, तीन आरोपी अरेस्ट और पूरा थाना सस्पेंड:...वाह क्या जिम्मेदारी निभाई! उस परिवार पर क्या बीत रही है- जिनको इस कांड के जालिमों ने जन्मभर का दर्द दिया, यही न कि पीडि़तों में से कोई न कोई इस अपमान को वहन न कर पाये और अपने आप को आग के हवाले कर दें, फांसी पर झूल जायें या जहर पी ले. हमारें कानून की  खामियां और न्याय मिलने में देरी का ही सबब है कि आज पूरे देश में ऐसे दरिन्दें छुट्टे घूम रहे हैं और किसी न किसी परिवार के सुख चैन को रोज छीन रहे हैं. बुलंदशहर यू पी एनएच-91 के 200 मीटर के हिस्से में गैंगरेप की शिकार मां-बेटी की गले की चेन जैसी कई चीजें खेत में पड़ी मिलीं- यहां एनएच-91 के करीब 35 साल की मां और उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी को दरिन्दों ने निर्वस्त्र कर नोैच डाला. 12 लोगों ने जो दरिन्दगी का खेल खेला वह अतीत बन गया और उसके बाद अब अपराधियों को थाने में बिठाकर पूछताछ की जा रही है. बीच बीच में चाय भी पिलाई जा रही है.नाश्ते का भी इंतजाम होगा.अफसरों को रेप की  घटना बुरी लगी, उन्होनें पूरा थाना बदल दिया सब सस्पेण्ड! यह सस्पेण्ड न...

छत्तीसगढ़ में बढ़ते अपराध....क्यों दुष्टों का पनाहस्थल बना हुआ है राज्य?

अरूणाचल पर सुप्रीम फैसला...अब सवाल नबाम तुकी के बहुमत हासिल करने का! उत्तराखंड के बाद अरुणाचल प्रदेश पर  सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से मोदी सरकार की अच्छी खासी किरकिरी हुई है. यहां कांग्रेस की सरकार को फिर से बहाल करने का आदेश दिया है.यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी पुरानी सरकार को स्थापित करने का फै सला दिया है.गवर्नर द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र को तक सुको ने असंवैधानिक करार दिया  है. कोर्ट ने सवाल उठाया  है कि क्या राज्यपाल कानून व्यवस्था को ताक पर रखकर ऐसे फैसले ले सकते हैं?राज्यपाल के निर्णय पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने विधानसभा सत्र बुलाने के अलावा 9 दिसंबर के बाद की कार्रवाई को भी असंवैधानिक माना है.अदालत के इस फैसले के बाद राज्य में नबाम तुकी सरकार बहाल हो गई. अरुणाचल प्रदेश के स्पीकर नबम रेबिया ने सुप्रीम कोर्ट में ईटानगर हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें 9 दिसंबर को राज्यपाल जेपी राजखोआ के विधानसभा के सत्र को एक महीने पहले 16 दिसंबर को ही बुलाने का फैसले को सही ठहराया था, इसके बाद 26 जनवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया और कांग्रेस...

कश्मीर में अलगाववादी सोच का बढ़ता दायरा.

पिकनिक या मस्ती में होने वाली परीक्षाएं....करोडों छात्रो के भविष्य के साथ खिलवाड! हरे-भरे मैदान या पेड़ों की छांव में अकेले बैठकर या जगह-जगह ग्रुप बनाकर पढ़ाई करना या परीक्षा देना दोनों ही अच्छी बात हैं लेकिन परीक्षा क्या ऐसी ही ली जाती है?  झारखंड में धनबाद जिले के आरएस मोर कॉलेज में शनिवार को झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से आयोजित 11 वीं की परीक्षा में तो कुछ ऐसा हो गया कि पूरे देश का ही घ्यान वर्तमान शिक्षा प्रणाली और उससे उपजे परीक्षार्थी या पास हाने वाले विद्यार्थियों की काबिलियत पर ही सवाल खड़ा कर गया. यहां 600 स्टूडेंट्स को एक साथ बैठाने की व्यवस्था की गई. शनिवार को अंग्रेजी और हिंदी की परीक्षा थी, न सिर्फ धनबाद बल्कि झारखंड के कई और जिलों में इस तरह से परीक्षा करवाने की बात कही गई है. बिहार में नकल और फर्जी टॉपर्स के मामले पर छिड़ी बहस अभी खत्म नहीं हुई है. वहां ऐसे ही कई परीक्षार्थियों को जो टापर्स बनाया गया व  गिरफतार किया गया वह देश के  सामने है.एकेडमिक करप्शन का यह ताजा उदाहरण है जिसमें  धनबाद  कॉलेज की तीन फैकल्टी (साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स) के सभ...

झटका स्मृति को तो प्रमोशन,,,,

झटका स्मृति को तो प्रमोशन जावडेकर को और खिचाई जेठली की....!     मोदी मंत्रिमंडल का दूसरी बार गठन हुआ तो कुछ नया -नया सा हुआ, मंत्रिमंंडल में कुछ टेलेंटेड और क्षेत्र के जानकार लोगों को शामिल किया गया तो कु छ निष्क्रिय लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया.धर्म और जातिवाद का कोई खेल यहां काम न आया.  मोदी ने पहले ही अपने मंत्रियों को सचेत करते हुए कहा था कि निष्क्रियता त्यागे वरना मुसीबत में पड़ जाओगे.भले ही उनका गुस्सा बड़े पैमाने पर नहीं निकला किन्तु विवादों में घिरी स्मृति ईरानी से शिक्षा मंत्रालय छीनकर उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की स्वच्छता पर मुहर जरूर लगवा ली. मीडिया के लिये स्मृति का शिक्षा मंत्रालय से हटाना और अरूण जेठली के पर कतरना दोनों ही महत्वपूर्ण खबर बनी. स्मृति ईरानी को अब मोदी सरकार में कपड़ा मंत्री बनाया है.मोदी ने इस बार एक तरह से अगले चुनावों की रणनीति तैयार की है. आने वाले चुनावों के लिये विभिन्न राज्यो से विशेषकर यूपी से ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया गया जबकि छत्तीसगढ़ को इस बार भी कोई प्रतिनिधित्व अपने मंत्रिमंडल में नहीं दिया. छत्तीसगढ़ की उपेक्षा का...

गांवों में चिकित्सा सेवा का विस्तार हो तभी झोला छाप खत्म होंगे...

 देश में कार्यरत सत्तावन प्रतिशत डॉक्टरों के पास मेडिकल की डिग्री नहीं है और वे मरीजो का इलाज कर रहे हैं. यह चौका देने  वाला रहस्योद्घाअन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपने हालिया रिपोर्ट में किया  है इससे यह बात तो साफ है कि भारत में मरीजों का इलाज कैसे होता है?. स्वास्थ्य सेवाओं पर नजर रखने वालों के लिये यह रिपोर्ट इतनी चौकाने वाली नहीं होगी चूंकि वे  इस हकीकत को जानते हैं. भारत के चिकित्सा संगठनों और समाजसेवी संस्थाएं इस सबंन्ध में कई बार सरकार को यह अवगत भी करा चुकी है लेकिन किसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई नहीं होने के कारण आज भी यह स्थिति बनी हुई  है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो यह कहा है कि बारहवीं पास लोग डाक्टरी के पेशे में लगे हैं लेकिन छत्तीसगढ जब मध्यप्रदेश के साथ जुड़ा हुआ था तब एक गांव में एक आठवीं पास को गांव का हर इलाज यहां तक कि आप्रेशन भी करते पाया गया  था. विश्व स्वस्थ्य संगठन की रिपोर्ट में  यह भी कहा गया है कि खुद को एलोपैथिक डॉक्टर कहने वाले 31 फीसदी लोगों ने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की है डब्ल्यूएचओ ने 2001 की जनगणना पर आधारि...

चुनाव से पहले पार्टियों में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने की नई परंपरा

राजनीतिक पार्टियों का हाल भी इन दिनों मौसम की तरह हैं पता नहीं कब बदल जाये. उत्तरप्रदेश और पंजाब चुनाव में जहां पार्टियोंं के धुरन्धरों की नाक में दम कर दिया है वहीं आयाराम-गयाराम के जमाने की पुन: वापसी ने भी फिर हलचल पैदा कर दी है.भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को  प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ाने  के बाद देश में इस ढंग की एक नई परंपरा राज्यों में चल पड़ी है. भाजपा ने राज्यों में भी इस नई परंपरा की आजमाइश की और उसने असम में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर पहली फतह पाई उसके बाद अब आने वाले चुनावों में पार्टियों ने  इस परंपरा पर चलने की तो लगता है शपथ ले ली है यूपी में ऐसा पहला उम्मीदवार चुनाव से बहुत पहले घोषित कर दिया गया यहां कांग्रेस ने इसकी पहल की. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को अपना उम्मीदवार घोषित किया गया. भाजपा और अन्य दल पशोपेश में है कि उन्हें भी अब इस परंपरा से चलना होगा लेकिन यह निश्चित है कि जो भी  पहले उम्मीदवार की घोषणा कर चुनाव में उतरेगा उसे सफलता मिलने के चांसेस भी बढ़ जाते हैं चाहे वह मुख्यमंत्री पद का व्यक्ति हो या विधायक या अन्य क...

यौन हिंसा पर क्षमा की घृणित संस्कृति, क्यों इसे संरक्षण दिया जा रहा?

यूनिसेफ की  एक शीर्ष अधिकारी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा से जुड़ी क्षमा की घृणित संस्कृति पर चिंता व्यक्त करते हुए उसकी निंदा की है और इस क्रूरता को खत्म करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा है हालाकि उन्होंने सिर्फ एक राज्य की दलित युवती के साथ उन्हीं पांच युवको द्वारा दोबारा कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार मामले का जिक्र किया है जो रोहतक में चर्चित हुआ  लेकिन भारत में अब ऐसा आम हो गया है जिसपर कठोर कदम उठाने की बजाय राजनीतिक रोटी सेकी जा रही है और क्षमादान दिया जा रहा है.मामले को कोर्ट के हवाले कर तुरन्त फुरंत में उसका निपटारा करने की जगह राजनीति से जुड़े कतिपय लोग ऐसी घटनाओं को अपने  मकसद तक पहुंचने की नीयत से देखने लगे हैं. यूएन अधिकारी ने जिस मामले का  जिक्र किया है वह  तीन साल पहले के उस बलात्कार का है जिसमें दलित लड़की से पांच युवकों ने दुष्कृत्य किया और जमानत पर छूटकर आने के बाद दुबारा उसका अपहरण कर रेप किया. इस मामले में अभी जांच चल रही है और पुलिस अब यह भी कह रही है कि लड़की के आरोप की सत्यता को परखा जा रहा है चूंकि युवती द्वारा बताये गये ल...

सोशल मीडिया दोस्त है तो दुश्मन भी, बच्चो का ध्यान पुस्तको से हटा!

एक सर्वे में एक चिंतनीय बात सामने आई है कि सोशल  मीडिया बच्चों और युवाओं को काफी नुकसान पहुंचा रहे है. सर्वे में जो बाते सामने आई है अगर उसका विश£ेषण किया जाये तो बात साफ है कि सोशल  मीडिया से हमारी दोस्ती हमें अपनों से बहुत हद तक दूर करती जा रही है. बच्चे तो बच्चे बड़े भी इसकी चपेट मे आ रहे हैं. सोशल मीडिया से बच्चों की मित्रता ने उन्हेें अपने स्कूल व परिवार से दूर करना शुरू कर दिया है. समाज में घटित होने वाली कई किस्म की घटनाओ के पीछे सोशल मीडिया को ही दोषी ठहराया जा रहा है.बच्चों में पुस्तके पढऩे की आदत लगभग खत्म हो गई है उनको पुस्तकों से नफरत होने लगी है. इसके पीछे सोशल मीडिया है जो पुस्तकों के प्रति उनके आकर्षण को छीनकर अपनी ओर ले जा रही है. बच्चों के पढऩे की आदत कम हो रही है. चाहे वह यूं ही मिलने वाला समय हो या कोई्र छुटटी का दिन अथवा गर्मियों की छुट्टियां बच्चे व युवा अपना समय मनोरंजक पुस्तकें पढ़कर बिताने की जगह अब सोशल नेटवर्किग साइट्स पर चैट करना अधिक पसंद कर रहे हैं.वास्तविकता यह है कि किताबें न पढऩे की वजह से बच्चों की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता में कमी आ रही ...

ANTONY JOSEPH'S FAMILY INDX

History of Mattappallil -  Madukkakuzhy family ANTONY JOSEPH”S FAMILY. INDEX  A family with its own tradition and values,started many decades ago from a place called EdamattomPallattu in Kottayam districtin Kerala.They have a well settled position not only in India but also abroad. The members of this family are not only in different parts of India but also in many developed countries like United States of America ,Rome,South Arabia multiplying the family's honour and fame with their professional expertise in the field of education,politics , journalism etc. In this note we go through a rough idea of the family history. Since we don't have any knowledge about many members of the old generations, we regret to skip off the details about them.Now with the help of the eldest member of this family ie J M Thomas (Thomachen)of Kottayam,we get a picture about the members of our family and how it branched.We belong to Edamattam Pallattu family. The family starts with two avakashi...

भूतो की खोज ओर विश्व में फैलता स्पर्म का व्यापार!

दिल्ली में एक पढ़ा लिखा इंसान भूतों की खोज करते-करते रहस्यमय ढंग से मौत की गोद में समा गया. उसकी खोज अधूरी  रह गई कि इंसान का मरने के बाद क्या होता है?दूसरी ओर दुनिया अंतरिक्ष से आ रहेअजूबों (एलियंस) की खोज में वर्षो से लगी है कि आखिर यह हैं क्या! इन  अजूबों को खोज निकालने के  लिये ब्रिटेन के मशहूर कॉस्मोलॉजिस्ट स्टीफन हॉकिंग ने रूस के अरबपति यूरी मिलनर के साथ मिलकर अभी तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है जिसमें वे 10 साल के दौरान 10 करोड़ डॉलर खर्च करेंगें.यह दुनिया अजीब है जो रहस्यों से भरी पड़ी है अभी बहुत सी खोज होना बाकी है लेकिन मनुष्य ने बहुत सी  बातो का पता लगा लिया है. रोबोट का निर्माण कर लिया है जो मनुष्य की तरह काम करता है तो दूसरी ओर भेड़ व अन्य पशुओं के क्लोन से नये जानवर भी पैदा किये जा रहे हैं वहीं इसंान को भी मरने के कगार पर पहुंचकर नया जीवन दिया जा रहा है जिसमें किसी की खोपड़ी ही बदलकर सीमेंट की खोपड़ी लगा दी तो किसी के गले का ऊपरी हिस्सा ही पूरा बदलकर नया कर दिया गया. विश्व के इस बदलते रूप में इंसान तरह तरह की जिज्ञासाओं को जहां जानने का प्रयास ...

Family index

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सोशल मीडिया दोस्त है तो दुश्मन भी, बच्चो का ध्यान पुस्तको से हटा!

एक सर्वे में एक चिंतनीय बात सामने आई है कि सोशल  मीडिया बच्चों और युवाओं को काफी नुकसान पहुंचा रहे है. सर्वे में जो बाते सामने आई है अगर उसका विश£ेषण किया जाये तो बात साफ है कि सोशल  मीडिया से हमारी दोस्ती हमें अपनों से बहुत हद तक दूर करती जा रही है. बच्चे तो बच्चे बड़े भी इसकी चपेट मे आ रहे हैं. सोशल मीडिया से बच्चों की मित्रता ने उन्हेें अपने स्कूल व परिवार से दूर करना शुरू कर दिया है. समाज में घटित होने वाली कई किस्म की घटनाओ के पीछे सोशल मीडिया को ही दोषी ठहराया जा रहा है.बच्चों में पुस्तके पढऩे की आदत लगभग खत्म हो गई है उनको पुस्तकों से नफरत होने लगी है. इसके पीछे सोशल मीडिया है जो पुस्तकों के प्रति उनके आकर्षण को छीनकर अपनी ओर ले जा रही है. बच्चों के पढऩे की आदत कम हो रही है. चाहे वह यूं ही मिलने वाला समय हो या कोई्र छुटटी का दिन अथवा गर्मियों की छुट्टियां बच्चे व युवा अपना समय मनोरंजक पुस्तकें पढ़कर बिताने की जगह अब सोशल नेटवर्किग साइट्स पर चैट करना अधिक पसंद कर रहे हैं.वास्तविकता यह है कि किताबें न पढऩे की वजह से बच्चों की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता में कमी आ रही ह...

खतरे बहुत हैं!....दो साल की सैनिक शिक्षा अनिवार्य करने में क्या हर्ज?

विश्व के कई देशों में प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को सैन्य शिक्षा दी जाती है और स्कूली शिक्षा पूर्व होने पर सेना में सेवा देने का अवसर प्राप्त होता है लेकिन हमारे देश में जो शिक्षा दी जाती है वह रोजगार मूलक भी नहीं है देश के करोड़ो नवजवान ऐसी शिक्षा की डिग्री-डिप्लोमा लेकर बेरोजगार बैठे हैं, इसलिए दूसरे देशों की सैन्य शक्ति हमसे अधिक है। ऐसे देशों के खिलाफ उसके पड़ोसी देश कुछ बोलने से भी घबराते हैं. आज हमारी आवश्यकता  विश्व के  उन देशों की तरह सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनने की है इसके साथ-साथ हमें अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना जरूरी है.इसमें दो मत नहीं कि हमारे देश की स्थल, वायु व जल सेना किसी से कम नहीं किन्तु आज हम जिस तरह  चारों और पडौसी दुश्मनों  और आतंकवाद से घिरे हुए है उस हिसाब से हमारी सैन्य शक्ति उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिये. देश में जनसंख्या की बढौत्तरी के साथ-साथ शिक्षित व अशिक्षित दोनों किस्म के बेरोजगारों की संख्या में लगातार बढौत्तरी हो रही है.एक  शक्तिशाली फौज के साथ-साथ देश में अशिक्षित व अनुभवहीन अशक्तिशाली युवाओं की फैाज अपनी सेना...

और कितने लोगो की बलि लेगा सरकार का डा. आम्बेडकर अस्पताल?

चरोदा की रहने वाली 75 वर्षीय खोरबाहरिन बाई को रायपुर के डीके अस्पताल उर्फ मेकाहारा उर्फ डा. आंबेडकर अस्पताल में भर्ती करने लाया गया था, देर रात हायपरटेंशन का इलाज कराने उसके परिवारजन बड़ी उम्मीदों के साथ लेकर आये थे लेकिन महिला ने इलाज के अभाव में बरामदे में दम तोड़ दिया चूंकि यहां के मेडीसिन विभाग ने यह कहते हुए भर्ती करने से मना कर दिया कि भर्ती के लायक नहीं है.इसके बाद महिला व उसका पति दिनभर अस्पताल में भटकते रहे,रात 9 बजे के आसपास किचन के सामने बरामदे में महिला गश खाकर गिर गई और मौके पर ही मौत हो गई. पहला सवाल यह कि यह अस्पताल किसके लिये बना है? क्यों यहां  मरीजों की उपेक्षा की जाती है? बार बार यहां होने वाली अतिगंभीर घटनाओं को सरकार क्यों नजरअंदाज करती है? पूरे छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों से आने वाले मरीज इस अस्पताल में बहुत उम्मीदों के साथ पहुंचते हैं कि यहां कम पैसे में उनका इलाज हो जायेगा लेकिन यहां पहुंचने पर न केवल उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है बल्कि वे यहां से जाते समय भारी जख्म लेकर जाते हैं. डीके या मेकाहारा उर्फ मेडिकल कालेज हास्पिटल रायपुर अथवा डा. आम्ब...

सेंट्रल कर्मचारियों की तो नैया पार हो गई लेकिन बाकी का क्या?

सेंट्रल कर्मचारियों की तो नैया पार हो गई लेकिन बाकी का क्या? सेंट्रल कैबिनेट ने बुधवार को केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिये सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी. बढ़ा हुआ वेतन 1 जनवरी 2016 से लागू होगा,इस वृद्धि के ऐलान के बाद 50 लाख सरकारी कर्मचारी और 58 लाख पेंशनधारियों के हाथों में ज्यादा पैसा आएगा, इस बढौत्तरी  से सरकारी खजाने पर करीब एक लाख करोड़ से ज्यादा का भार पड़ेगा.  इस वेतन वृद्धि से रीयल एस्टेट सेक्टर और ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल आएगा. आरबीआई ने अप्रैल में कहा था कि अगर आयोग की रिपोर्ट को ऐसे ही लागू किया गया तो 1.5 फीसदी महंगाई बढ़ जाएगी याने आम वर्ग पर  बोझ और बढ़ जायेगा. इससे पहले सातवें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी कर्माचारियों की बेसिक सैलरी में 14.27 फीसदी बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी, साथ ही आयोग ने एंट्री लेवल सैलरी 7,000 रुपये प्रति महीने से बढाकर 18,000 रुपये प्रति महीने करने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है. सरकारी कर्मचारियों को 6 महीने का एरियर भी मिलेगा.पेंशन बोगियो को इससे भारी फायदा होगा. सेंट्रल के कर्मचारी भाग्यशाली है ...

क्या कानून के डंडे से पर्यावरण सुधर सकता है?जनजागृति भी जरूरी!

पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण पर चर्चा हर जगह है, फिर भी न तो कोई दोषी पाया जाता है न किसी को सजा मिलती है.छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का ही उदाहरण ले लीजियें यहां प्रदूषण इतना ज्यादा है कि इस राजधानी की गिनती देश के सातवें प्रदूषित शहरों की सूची में है.ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट आइंस्टीन ने कहा था- दो चीजें असीमित हैं-एक ब्रह्माण्ड- दूसरा मानव की मूर्खता! मनुष्यों ने अपनी  मूर्खता के कारण अनेक  समस्याएं पैदा की हैं, इनमें पर्यावरण- प्रदूषण अहम है. हम किसे दोषी ठहराएं? क्या किसी को दोषी ठहराना या दंड देना ही समाधान है? चूंकि दंड संहिता से ही सुधार होता तो अब तक अदालतों से दंडित लाखों लोगों के उदाहरण द्वारा सारे प्रकार के अपराध ही बंद हो चुके होते पर हम देखते हैं, ऐसा हुआ नहीं. वास्तव में इसके लिये जरूरी है जन-जागृति. प्रकृति का प्रत्येक कार्य व्यवस्थित एवं स्वाचालित है, उसमें कहीं भी कोई दोष नहीं है हमने अपनी अविवेकी बुद्धि के कारण अपने आपको प्रकृति का अधिष्ठाता मानने की भूल कर दी है. मानव द्वारा की गई भूलें प्रकृति के कार्य में व्यवधान डालती हैं ओर ये व्यवधान सभी को नुकसान पहुंच...

जंगली जानवरों को लेकर दो मंत्रालयों में जंग...आखिर क्या है माजरा?

क्या जंगली जानवर वास्तव में आबादी के लिये खतरे बनते जा रहे हैं? केन्द्र में दो मंत्रालयों के बीच इस मुद्दे को लेकर हो रही टकराहट से तो कुछ ऐसा ही आभास होता है लेकिन इन कारणों पर भी विचार किया जाना चाहिये कि जंगल में रहने वाले जानवर गांव व शहर में रहने वालों के लिये क्यों मुसीबत बन रहे हैं? हकीकत हम जो समझते हैं वह यही है कि औद्योगीकरण, आधुनिकीकरण  और विकास के नाम  पर्यावरण को नष्ट कर तेजी से कांक्रीट के जंगलों का विकास कर रहे हैं. क्या यह भी एक कारण नहीं हो सकता? जंगल में कुछ बचा ही नहीं है कि जानवर वहां चैन से रह सके. अवैध शिकार के अलावा जंगल में आग,पानी की समस्या, इंसनी शोर और अन्य कई ऐसे कारणों से जंगली जानवरों का गांव व शहरों की तरफ बढऩा जारी है. आजादी के कुछ वर्षो तक देश में जंगली जानवरो के शिकार पर रोक -टोक नहीं थी .इसके बाद के वर्षो ने जंगली जानवरों के शिकार पर पूर्ण पाबंन्दी लगा दी - यहां तक कि हिंसक जानवरों के साथ- साथ उन छोटे मोटे जानवरों को भी मारने पर पाबन्दी लगाई गई जो इंसानों से भी घुले मिले हैं और जगलों से भागकर कभी भी शहर की तरफ चले आते हैं. शिकार पर पाबंन्ध...

बिजली कंपनी ने गर्मी में परेशान किया अब बारिश में भी....कहां गये दावे!

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी ने गर्मी के दौरान छत्तीसगढ़वासियों को मेंटनेंस के नाम पर बिजली सप्लाई बंदकर भारी यातना दी थी तथा दावा किया था कि वे ऐसा प्रबंध कर रहे हैं कि लोगों को मानसून के दौरान कोई तकलीफ न हो लेकिन मानसून अभी पूरी तरह से छाया भी नहीं कि कंपनी के सारे दावे खोखले साबित होने लगे.कंपनी ने दावा किया था कि बारिश के दौरान बिजली गुल होने पर विभाग ने कर्मचारियों को अलर्ट रहने व सुधार करने दौड़ पडऩे का निर्देश दिया है लेकिन यह सारी बाते खोखली साबित हुई है. पूरे छत्तीसगढ़ से जो खबरे मिल रही है वह यही दर्शा रही  है कि थोड़़ी से बारिश होते ही बिजली गुल हो जाती है तथा कई कई घंटे तक बिजली के  वापस आने का लोग इंतजार करते हैं.भीषण गर्मी के दौरान विद्युत कंपनी ने बकायदा अखबारों में विज्ञापन जारी कर व एसएमएस के जरिये बिजली कई घंटों तक बंद रखने की सूचना दी थी. यह बंद इसलिये किया गया चूंकि बारिश आने पर लोगों को तकलीफ न हो.इस दौरान लाइन और ट्रांसफार्मर का रखरखाव तथा मरम्मत का काम कथित तौर पर किया गया.  दावा है कि  विभागीय कर्मचारी तीन शिफ्ट में काम करते हैं, लेकिन तेज...

इस हड़ताल ने तो पचास लोगों की जान ले ली! कौन जिम्मेदार?

किसी हड़़ताल को लेकर पचास से ज्यादा लोगों को प्राण गंवाना पड़ा हो यह छत्तीसगढ़ में पहला मामला है.प्रदेश में संजीवनी एक्सप्रेस और महतारी एक्सप्रेस के पायलट (ड्राइवर) टेक्नीशियन अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से हड़ताल पर हैं, इसके चलते जनहित में चलरही एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह से ध्वस्त है. पिछले कुछ वर्षो से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने का एक अच्छा और सुगम माध्यम बनी इस सेवा पर मानो ग्रहण लग गया है. अचानक कर्मचारियों ने अपनी  मांगें जोड़कर सेवा जहां अपने व सरकार  के बीच संबन्धों की खाई बना दी है वहीं सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए उनकी किसी मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया. दोनों के बीच चले द्वंद का असर अब दिखाई देने लगा है. मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचा न पाने के कारण  लोगों ने रास्ते में ही दम तोडऩा शुरू कर दिया हैं.  रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर सिमगा के पास एक टीवी कैमरामैन राकेश चौहान (24) और उनकी मां की सड़क हादसे में मौत भी इसी वजह से हुई. अगर समय पर उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया जाता और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी जाती तो संभव है उन्हें जीवन दान मिल जात...