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कलंकित क्रिकेट!

कलंकित क्रिकेट! मंगलवार।दिनांक 31 अगस्त 2010पाक का एक और मुखौटा इस समय विश्व के सामने हैं। मैच फ़िक्सिंग कर पाक खिलाडियों ने न केवल अपना नाम खराब किया बल्कि अपने देश का भी मुंह काला कर दिया। अब तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं वे यही बता रहे हैं कि सुरा-सुन्दरी में मस्त पाक क्रिकेट खिलाड़ी पैसा कमाने के लिये कुछ भी कर गुजरने के लिये तैयार रहते हैं। पाक क्रिकेटरों की इन हरकतों ने पाक आंतकवादियों को भी शर्मिंदा कर दिया है। वे अब इन क्रि केटरों की खून के प्यासे हो गये हैं। पाक क्रि केटर आसिफ की एक पूर्व प्रेमिका पाक अभिनेत्री वीना मलिक ने जो रहस्योद्घाटन किया है, उसमें क्रिकेटरों की पोल पूरी तरह खुल जाती है। आसिफ़ का भारतीय सट्टेबाज़ से संबन्ध और उससे पैसे लेने की बात के बाद अब पाक क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इस खिलाड़ी के बारे में सोचने की जरूरत ही नहीं रह जाती है। उक्त महिला सारे प्रमाण भी देने के लिये तैयार बताई जा रही है। आसिफ़ ने पैसा कमाने और किसी से मुलाकात के लिये अचानक बैंकाक की यात्रा भी की थी। पाक का सारा खेल सेटिंग से रहा है। पाक की जनता जिन्हें सर आंखों पर लेकर चलती रही है। उनके का...

कलंकित क्रिकेट!

रायपुर मंगलवार।दिनांक 31 अगस्त 2010 कलंकित क्रिकेट! पाक का एक और मुखौटा इस समय विश्व के सामने हैं। मैच फिक्सिंग कर पाक खिलाडियों ने न केवल अपना नाम खराब किया बल्कि अपने देश का भी मुंह काला कर दिया। अब तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं वे यही बता रहे हैं कि सुरा-सुन्दरी में मस्त पाक क्रिकेट खिलाड़ी पैसा कमाने के लिये कुछ भी कर गुजरने के लिये तैयार रहते हैं। पाक क्रिकेटरों की इन हरकतों ने पाक आंतकवादियों को भी शर्मिंदा कर दिया है। वे अब इन क्रि केटरों की खून के प्यासे हो गये हैं। पाक क्रि केटर आसिफ की एक पूर्व प्रेमिका पाक अभिनेत्री वीना मलिक ने जो रहस्योद्घाटन किया है, उसमें क्रिकेटरों की पोल पूरी तरह खुल जाती है। आसिफ का भारतीय सट्टेबाज से संबन्ध और उससे पैसे लेने की बात के बाद अब पाक क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इस खिलाड़ी के बारे में सोचने की जरूरत ही नहीं रह जाती है। उक्त महिला सारे प्रमाण भी देने के लिये तैयार बताई जा रही है। आसिफ ने पैसा कमाने और किसी से मुलाकात के लिये अचानक बेंकाक की यात्रा भी की थी। पाक का सारा खेल सेटिंग से रहा है। पाक की जनता जिन्हें सर आंखों पर लेकर चलती रही है। उनके क...

बांधों में लबालब पानी!

रायपुर सोमवार।दिनांक 30 अगस्त 2010 बांधों में लबालब पानी! मौसम विशेषज्ञों की माने तो इस बार सितंबर में भी वर्षा होगी। अगर यह बात सही निकलती है तो प्रदेश में इतना पानी तो हो जायेगा कि अगले गर्मी में लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बशर्ते कि हम कृषि, निस्तारी व अन्य कामों में पानी का उपयोग सीमित मात्रा में करें। हमें जो आंकड़े प्राप्त हुए हैं उसके अनुसार प्रदेश के इकचालीस जलाशयों में इस समय कम से कम चार हजार मिलियन घन मीटर पानी जमा है। हाल के दिनों में हुई वर्षा से स्थिति में काफी सुधार हुआ है। प्रदेश के जलाशयों में कुल जलभराव क्षमता छै हजार चार सौ दशमलव दो सौ उन चालीस घन मीटर है। अर्थात आज की स्थिति में आधे से भी ज्यादा अर्थात साठ से पैसठ प्रतिशत पानी जलाशयों में मौजूद है। हम इसपर संतोष इसलिये नहीं कर सकते चूंकि कई जलाशय अभी भी चौदह या सत्रह प्रतिशत से ऊपर नहीं भरे हैं। यह स्थिति सरगुजा के बाक़ी व कुंवरपुर जलाशय की है। जबकि यहीं का श्याम जलाशय जिसकी क्षमता 62. 050 मिलियन घन मीटर है, में क्षमता के अनुरूप सौ प्रतिशत पानी भर चुका है। बस्तर के कोसारटेड़ा जलाशय पूरी तरह लब...

छत्तीसगढ़ में क्रिमिनल्स की बाढ़

रायपुर,सोमवार दिनांक 30 अगस्त 2010 छत्तीसगढ़ में क्रिमिनल्स की बाढ़, किसने प्रोत्साहन दिया? नोएडा में आरूषी-हेमराज हत्याकांड के बाद जितने भी संदिग्ध हिरासत में लिये गये थ,े उनमें से अधिकांश नेपाल के नागरिक थे। इस हत्याकांड का खुलासा आज तक नहीं हुआ। रायपुर में शनिवार को डीआरसीएल लाजेस्टिक लिमिटेड में सात लाख इकसठ हजार की चोरी मामले में जिन लोगों को पकड़ा गया है, वे सभी नेपाली नागरिक हैं तथा यहां विभिन्न मोहल्लों में अपने आप ही अपाइंट होकर चौकीदारी कर रहे थे। इसमें जो प्रमुख आरोपी है वही मात्र ट्रांसपोर्ट कं पनी से संलग्न रहा हैं। इस कांड के बाद विदेशी नागरिकों व बाहरी राज्यों से आकर यहां बसने वाले कतिपय लोगों की गतिविधियां फिर संदेह के दायरे में आ गई है। असल में यह पूरा किस्सा लोगो की लापरवाही व पुलिस की ऐसे लोगो के प्रति निष्क्रियता का ही परिणाम है, जिसके चलते इनके हौसले बुलंदी पर हैं। हमको अति विश्वास है कि यह विदेशी नागरिक अपनी खुखरी और डंडे के बल पर सी टी बजाकर हमारी सुरक्षा करने का दायित्व बखूबी निभाते हैं मगर असलियत क्या यही है? मैं अपने इन्हीं कालमों में कई बार यह प्रश्न उठाता आय...

दुनिया के अंत का चक्कर...

दुनिया के अंत का चक्कर... अब सौर तूफान आने की चेतावनी! रायपुर रविवार।दिनांक 29 अगस्त 2010 बहुत पहले डिस्कवरी चैनल ने एक खोज पूर्ण खबर दिखाई थी जिसमें विश्व के एक विकासशील देश की उस पोल को खोला गया जिसमे उसने दावा किया था कि वह चाँद पर पहुंच गया और वहां उसके लोग घूम कर आये-चैनल ने अपनी खोज में वह चित्र दिखायें जिसमें कहा गया था कि यह देश चाँद पर वास्तव में पहुंचा ही नहीं इसके लिये चैनल ने हॉलीवुड की उस फिल्म का दृश्यांकन लोगों को दिखाया जिसके जरिये विश्व को बेवकूफ़ बनाने का प्रयास किया गया। वास्तव में जिस वीडियो को दिखा कर चाँद में उतरने वहां टहलने का दावा किया गया था वह हॉलीवुड की किसी फिल्म से लेकर दिखाया गया था। चैनल में उस फिल्म में मील का एक पत्थर देखकर यह पता लगा लिया कि जो दावा किया गया वह फ़र्ज़ी था। इस तथ्य को यहां उजागर करने के पीछे मैरा मकसद यह है कि हम वर्षो से यह भविष्यवाणी सुनते आ रहे है कि इस सन् मे या उस सन् में दुनिया का अंत हो जायेगा । कभी स्काइलैब गिरने की बात तो कभी महाअभियान से दुनिया का अंत तो कभी किसी वर्ष भारी तबाही मचाने वाले उल्का पिंड के गिरने की खबर से डराया ...

सकल घरेलू उत्पाद दर!

रायपुर शनिवार। दिनांक 28 अगस्त 2010 सकल घरेलू उत्पाद दर! अपना घर अपना ही होता है, किराये पर रहने वाले घर और अपने घर में यही अंतर है कि जो सुधार या विकास उसमें करना चाहते हैं वह किराये के मकान में नहीं कर पाते। जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का उपनिवेश बना हुआ था तब यहां विकास नाम मात्र का था। हमने छत्तीसगढ़ की मांग भी इसीलिये की क्योंकि हम यहां के लोगों की समृद्धि विकास व खुशहाली चाहते थे। राज्य बनने के बाद हमारी अपनी सरकार बनी यहां के लोगों को सात सौ किलोमीटर दूर भोपाल राजधानी तक जाने और वहां जाकर काम कराने से मुक्ति मिली। विकास के सारे कार्य लोगों के घर पर ही पहुंचने लगे। समृद्वि और उन्नति का जाल बिछाने मे हमारी कामयाबी का ही नतीजा है कि आज छत्तीसगढ़ राज्य देश में सकल घरेलू उत्पादन दर के मामले में देश के दूसरे राज्यों से आगे निकल गया। नक्सली हिंसा के बावजूद छत्तीसगढ़ की जीडीपी दर 11. 49 तक पहुंच गई। प्रति व्यक्ति आय जहां दोगुनी हुई वहीं राज्य में नये नये उद्योग लगे तथा खेती मे बदलाव आया। सर्वत्र तरक्की से आम जनता खुश है लेकिन हमें इसी से संतोष करके बैठ नहीं जाना है। इस अंचल को खुशहाल बनाने ...

सकल घरेलू उत्पाद दर!

रायपुर शनिवार। दिनांक 28 अगस्त 2010 सकल घरेलू उत्पाद दर! अपना घर अपना ही होता है, किराये पर रहने वाले घर और अपने घर में यही अंतर है कि जो सुधार या विकास उसमें करना चाहते हैं वह किराये के मकान में नहीं कर पाते। जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का उपनिवेश बना हुआ था तब यहां विकास नाम मात्र का था। हमने छत्तीसगढ़ की मांग भी इसीलिये की क्योंकि हम यहां के लोगों की समृद्वि विकास व खुशहाली चाहते थे। राज्य बनने के बाद हमारी अपनी सरकार बनी यहां के लोगों को सात सौ किलोमीटर दूर भोपाल राजधानी तक जाने और वहां जाकर काम कराने से मुक्ति मिली। विकास के सारे कार्य लोगों के घर पर ही पहुंचने लगे। समृद्वि और उन्नति का जाल बिछाने मे हमारी कामयबी का ही नतीजा है कि आज छत्तीसगढ़ राज्य देश में सकल घरेलू उत्पादन दर के मामले में देश के दूसरे राज्यों से आगे निकल गया। नक्सली हिंसा के बावजूद छत्तीसगढ़ की जीडीपी दर 11. 49 तक पहुंच गई। प्रतिव्यक्ति आय जहां दोगुनी हुई वहीं राज्य में नये नये उद्योग लगे तथा खेती मे बदलाव आया। सर्वत्र तरक्की से आम जनता खुश है लेकिन हमें इसी से संतोष करके बैठ नहीं जाना है। इस अंचल को खुशहाल बनाने ...

हल तो हमें ही खोजना होगा?

रायपुर शनिवार। दिनांक 28 अगस्त 2010 हल तो हमें ही खोज ना होगा? अभी कुछ दिन पहले ही हमारे मंत्रीगण और यहां तक कि राष्ट्रपति ने भी चीन की यात्रा की थी। चीन से प्रेम मोहब्बत की बात हुई और अंतत: उसने फिर अपना असली रूप दिखा ही दिया। पाकिस्तान और चीन के बारे में हम क्यों उनकी असलियत को नहीं समझते। यह वही चीन है जिसके प्रधानमंत्री चाउ-एन-लाई ने सन् 1962 में भारत का दौरा कर हिन्दी चीनी भाई भाई का नारा दिया था और वापस चीन जाकर भारत पर हमला कर हमारी हजारों एकड़ ज़मीन को हड़प लिया। यह ज़मीन आज भी उसके कब्ज़े में हैं। इसे न हम उससे छुड़ा सकते हैं और न इसकी ताकत हमारी सरकार के पास है। यही हाल पाकिस्तान का है- उसके प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो जिन्हें पाकिस्तान की सरकार ने बाद में फाँसी पर लटका दिया भारत के खिलाफ सौ वर्षो तक लड़ाई लड़ने की बात करते रहे। पाकिस्तान के हुक्मरानों के मुंह से निकलने वाली हर बात भारत में जहर का काम करती है। क्यों हम ऐसे लोगों से शांति और दोस्ती की उम्मीद करें?चीन ने हमारे जनरल को वीजा नहीं दिया तो कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिये वह इससे भी बढ़कर कुछ भी कर सकता है चूंक...

हर मोड़ पर मनचलों की छीठाकशी

रायपुर शनिवार।दिनांक २८ अगस्त २०१० हर मोड़ पर मनचलों की छीटाकशी बे बस युवतियों,कौन बचायें इन्हें? अभी दो रोज पहले की बात है मैं काली बाड़ी चौक में खड़ा जगदलपुर से आ रही बस में अपने परिवार के सदस्यों का इंतजार कर रहा था। मैरे पास से दो तीन लड़के निकले, दिखने मेे सीधे साधे -वे बात करते हुए आगे निकल गये , वहीं सामने से दो तीन लड़कियाँ भी आ रही थी। मैने देखा कि उन लड़कों में से एक ने उन लड़कियों से छेडखानी करते हुए कोई ऐसी बात कही कि वह तिल मिला उठी सभ्य घरानों की इन लड़कियों ने सड़क में कोई सीन क्रियेट करना उचित नहीं समझा, वे सिर झुकाएं आगे बढ़ गई। इस वाक्यें से मेरे मन में कई विचार आये-पहला यह कि आज के हालात में लड़कियों का सड़क पर निकलना कितना कठिन है। सीधे साधे दिखने वाले युवक भी कैसा दु:साहस कर बैठते हैं? दूसरी बात कि सड़क पर चलने वाली महिलाओं ने अगर ऐसे किसी व्यक्ति को जवाब दे दिया तो उन्हें इसका ख़ामियाज़ा दूसरे ढंग से भी भुगतना पड़ सकता है। इस बीच अगर मेरे जैसे किसी व्यक्ति ने इस प्रकार की छेडख़ानी का विरोध कर दिया तो शायद इसका प्रतिफल मुझे या जो भी विरोध करें उसे ही भुगतना पड़ेगा। छेड़छाड़ की शिक...

स्वाइन फ्लू।

रायपुर शुक्रवार। दिनांक 27 अगस्त 2010 स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू से एक के बाद एक सात मौतों ने छत्तीसगढ़ को दहशत में डाल दिया है। मरने वालों में से अधिकांश बिलासपुर जिले के हैं। दुर्ग व रायपुर भी स्वाइन फ्लू से पीडि़त है, यहां भी मरीज़ों की मृत्यु महामारी से हुई है। स्वाइन फ्लू। से मरीजों की मौत की पुष्टि दिल्ली स्थित प्रयोग शाला से आने वाली रिपोर्ट के बाद होती है। यहंा से रिपोर्ट आने में वक्त लग जाता है। पीड़ित मरीज़ एक दो दिन के भीतर ही प्राण छोड़ देता है। ऐसे में सरकार को छत्तीसगढ़ को स्वाइन फ्लू से मुक्त करने एक बड़ा अभियान चलाने की जरूरत है। उसका ध्यान सिर्फ डॉ. आम्बेडकर अस्पताल पर है, जो आम आदमी की नजर में एक निष्क्रिय अस्पताल है। यहां पांच सौ थ्री लेयर मास्क मंगवाने का दावा किया गया है लेकिन मरीज़ों को किस तरह से चिकित्सा सुविधा मुहैया की जायेगी आदि की कोई ब्यूह रचना तैयार नहीं की गई है। दिल्ली की प्रयोग शाला को स्वाइन फ्लू पीडि़तों की चौबीस रिपोर्ट भेजी गई। इसमें से माात्र नौ कि रिपोर्ट मिली। इनमें चार स्वाइन फलू से पीडि़त हैं। इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि स्वाइन फ्लू ने तेजी ...

दो लाख कुछ नहीं !

रायपुर शुक्रवार। दिनांक 27 अगस्त 2010 दो लाख कुछ नहीं ! मंहगाई के इस दौर में केन्द्र सरकार की तरफ से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जिनकी आमदनी सालभर में दो लाख रूपये से कम है। अब तक एक लाख साठ हजार रूपये तक की आमदनी वाले व्यक्ति को आय कर पटाना पड़ता था लेकिन अब इसे बढ़ाकर दो लाख रूपये कर दिया गया है। केन्द्र सरकार ने करदाताओं को राहत पहुंचाने की गरज से प्रत्यक्ष कर संहिता डीटीसी को मंजूरी दी है। नये कानून में दो दशमलव पांच लाख रूपये की आय पर अब दस प्रतिशत और पांच दशमलव दस लाख की आय पर बीस व दस लाख से ज्यादा की आय पर तीस प्रतिशत की दर से कर लगने की संभावना है। वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं पहले से छूट का फायदा उठा रहै है। संभव है यह छूट आगे भी जारी रहेगी। ऐसा लगता है सरकार ने अचानक यह कदम संसद में हाल ही सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी से जनता में उभरे आक्रोश के परिप्रेक्ष्य में उठाया है। जनता माननी यों के वेतन में किये गये तीन सौ प्रतिशत की वृद्वि से भारी गुस्से में है, ऐसे समय में आयकर में थोड़ी बहुत छूट देकर जनता की नाराजगी को कम करने का एक प्रयास इसे माना जा सकता है। दो लाख तक टैक्स नहीं का ...

नकल,भ्रष्टाचार का कलंक कैसे धोयेगी न्यायपालिका?

रायपुर शुक्रवार। दिनांक 27 अगस्त 2010 नकल,भ्रष्टाचार का कलंक कैसे धोयेगी न्यायपालिका? परीक्षा हाल में लगे कैमरे की मदद से देश के पांच जजों को आंध्र प्रदेश के एल एलएम परीक्षा आयोजकों ने नकल करते देखा। इनमें से एक पूरी किताब लिये हुए था तो कुछ के पास फाड़े हुए पन्ने और अन्य नकल सामग्री थी। आयोजकों की आंखों के बाद यह किस्सा पूरे देश में फैल गया कि पांच जज नकल करते हुए पकड़े गये। हमारी न्याय व्यवस्था को शर्मसार करने वाली यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी कम से कम आधा दर्जन माननीय जज पीएफ घोटाले और अन्य मामलों में दोषी पाए जा चुके हैं। इस घटना ने आम लोगों की न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और ईमानदारी दोनों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। न्याय व्यवस्था पर हम हमेशा गर्व करते रहे हैं। अब भी हमें उसपर गर्व है किंतु कहावत है- एक मछली पूरे तालाब को खराब करती है- क्या पीएफ घोटाले और एल एलएम परीक्षा में नकल मारने वाले माननी यों ने कु छ ऐसा ही नहीं किया? जो लोग नकल मारकर पास होते हैं, उनका नौकरी पाने के बाद का चरित्र क्या रहता है, यह बताने की जरूरत नहीं। जिन लोगों को पंच- परमेश्वर अर्थात भगवान का दर्...

कमजोर कानून

रायपुर,बुधवार दिनांक 25 अगस्त 2010 कमजोर कानून टीन एजर्स में बढते अपराध का कारण कानून सख्त हो जा ये तो किसी की मजाल नहीं कि मनमानी कर सकें- हम यह दावे के साथ कह सकते है कि ट्रेफिक के मामले में पिछले कुछ समय से की गई सख्ती ने रायपुर के लोगों को काफी राहत दी है। अपराध के मामले में पुलिस को कुछ इसी तरह का रवैया अपनाने की जरूरत है। जिस तेजी से अपराध बढ़ रहे हैं उसका एक बड़ा कारण कानून की दिलाई और कानून से लोगों का डर खत्म होना है। निमोरा में तिहरे हत्याकांड में लिप्त लड़के ही निकले जिन्होंने पैसे की लालच में चोरी की और चोरी करते देख लेने के डर से तीनों बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। हम पहले ही यह बता चुके हैं कि अपराध का तीन कारण हो सकता है- एक टीन एजर्स सेक्स, दूसरा चोरी और चोरी करते बच्चों का देख लेना या फिर आपसी रंजिश। इन तीनों में से दूसरी बात सही निकली। टीन एजर्स सेक्स की संभावना सिर्फ बालिका की भूमिका से ही व्यक्त किया गया। हमने यह भी बताया था कि बच्चे आपस मे ंखेल के खेल के दौरान बहुत कुछ कर डालते हैं। पड़ोसी युवकों का घर में आना जाना था। जब उन्होंने चोरी की तो उसे शेष बच्चों ने देख लि...
रायपुर,बुधवार दिनांक 25 अगस्त 2010 कमजोर कानून टीन एजर्स में बढते अपराध का कारण कानून सख्त हो जाये तो किसी की मजाल नहीं कि मनमानी कर सकें- हम यह दावे के साथ कह सकते है कि ट्रेफिक के मामले में पिछले कुछ समय से की गई सख्ती ने रायपुर के लोगों को काफी राहत दी है। अपराध के मामले में पुलिस को कुछ इसी तरह का रवैया अपनाने की जरूरत है। जिस तेजी से अपराध बढ़ रहे हैं उसका एक बड़ा कारण कानून की ढिलाई और कानून से लोगों का डर खत्म होना है। निमोरा में तिहरे हत्याकांड में लिप्न्त लड़के ही निकले जिन्होंने पैसे की लालच में चोरी की और चोरी करते देख लेेने के डर से तीनों बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। हम पहले ही यह बता चुके हैं कि अपराध का तीन कारण हो सकता है- एक टीन एजर्स सेक्स, दूसरा चोरी और चोरी करते बच्चों का देख लेना या फिर आपसी रंजिश। इन तीनों में से दूसरी बात सही निकली। टीन एजर्स सेक्स की संभावना सिर्फ बालिका की भूमिका से ही व्यक्त किया गया। हमने यह भी बताया था कि बच्चे आपस मे ंखेल के खेल के दौरान बहुत कुछ कर डालते हैं। पडौसी युवकों का घर में आना जाना था। जब उन्होंने चोरी की तो उसे शेष बच्चों ने देख ...

आतंकवाद कौन फैला रहा?

रायपुर गुरुवार। दिनांक 26 अगस्त 2010 आतंकवाद कौन फैला रहा? नेता, मंत्री अपने बयान पर लगाम लगायें! यह चाहे हिन्दू आतंकवाद हो, चाहे मुस्लिम या फिर माओवाद या अन्य अपराध- इन सब में पिसती है आम जनता। बयान देने वाले नेताओं का कुछ नहीं होता- कोई भी निर्दाेष व्यक्ति जिसका किसी से लेना देना नहीं वह इस माहौल में आकर बलि का बकरा बन जाता है। आतंक फैलाने वाले खुश होते हैं और सरकार निंदा प्रस्ताव, मुआवजा और श्रध्दाजंलि देकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर चुप हो जाती है। इस बीच कोई पुलिस का आदमी मारा जाता है, तो उसे शहीद बना दिया जाता है। शहीद वे कहलाते हैं जो देश के लिये दुश्मनों से लड़कर मारा जा ये लेकिन आजकल आतंकवादी, नक्सली की गोली या बारूद से मरने वाला भी शहीद हो जाता है। चाहे उसने मुठभेड़ की हो या नहीं। बार बार आतंक के चलते शहीद की परिभाषा ही बदल दी गई। लाखों करोड़ों रूपये अब तक शहीदों को मुआवज़े के नाम पर दिया जा चुका है लेकिन सरकार ने ऐसा कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया कि निर्दाेष आम आदमी मारा न जाये तथा पुलिस के जवान कथित रूप से शहीद की गिनती में शामिल न हो वें। बुधवार को भारत के गृह मंत्री पी चिदंबर...

सांपों के लिये हास्टल...

रायपुर सोमवार।दिनांक 22 अगस्त 2010 सांपों के लिये हास्टल...और हाथी, आवारा मवेशी, कुत्ते कहां जायेगें? रायपुर के पास नंदनवन में सांपों का भी अपना हास्टल होगा, वे वहां आराम से रहेंगे, उनकों वन विभाग के कर्मचारी दूध- रोटी और कभी कभी चूहों का मांस भी खिलायेंगे! पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले सांपों का जमघट..क्या मजा आयेगा न! इस खबर ने आज मुझे रोमांचित कर दिया। मेरे मन में ख्याल आया कि हमारे लोगों को सांप की कितनी चिंता है। इंसान और भगवान को इस बरसात के मौसम में अवैध कब्जे के नाम से घरों से बेदखल किया जा रहा है और अंबिकापुर, सूरजपुर, जशपुर के जंगलों में रहने वालों को हाथी पछाड़ रहे हैं। तपकरा और कोरबा इलाकों में लोगों को नाग डस- डसकर काल के गाल में पहुंचा रहे हैं । वहीं राजधानी रायपुर की सड़कों पर आवारा मवेशियों और कुत्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है, उसकी किसी को चिंता नहीं। हमारे कर्ताधर्ताओं को चिंता है, उन सांपों की जिनके काटने के बाद आदमी सीधे स्वर्ग लोक के दर्शन करता है। जिसके काटने के बाद इंसान को बचाने के लिये अस्पतालों में दवा भी उपलब्ध नहीं होती। सांपों का नंदनवन या वन...

निमोरा हत्याकांड टीन एजर्स सैक्स तो नहीं ?

रायपुर रविवार।दिनांक 22 अगस्त 2010 निमोरा हत्याकांड कहीं पर्दे के पीछे टीन एजर्स सैक्स तो नहीं ? जब घर पर मां-बाप नहीं रहते तब बच्चे कई किस्म के खेल खेलते हैं- कुछ खेल ऐसे भी होते हैं जो दूसरे बच्चों को गवारा नहीं होते। वे उस पर लड़ाई कर बैठते है और यहां तक कह बैठते हैं कि मां को आने दो या पिताजी को आने दो हम सब बता देंगे- बस इसी बात को लेकर ज़ोरदार लड़ाई हो जाती हैं, इसमें खून ख़राबा भी हो जा ये तो आश्चर्य नहीं। रायपुर से बीस किलोमीटर दूर निमोरा गांव में बीते शुक्रवार को तीन बच्चों की निर्मम हत्या और उसके बाद उसे जलाने की कोशिश मामले में पिछले अड़तालीस घंटे से पुलिस उलझी हुई है। हमने ऊपर सिर्फ एक उदाहरण दिया कि कुछ ऐसा भी हो सकता है। इसके अलावा घटना का कारण चोरी भी हो सकता है जिसे बच्चों ने देख लिया और हत्या हो गई। तीसरा और महत्वपूर्ण कारण सेक्स है, जो वहां मौजूद बच्चों ने देखा तथा इसका भेद न खुले इसके लिये खूनी खेल खेला गया। हम इस मामले में दावे के साथ नहीं कह सकते कि भुनेश्वरी नामक लड़की जो कि इस परिवार की एक सदस्या है, के साथ कोई अन्य युवक भी यहां मौजूद था जिसके हाथों या दोनों की मिली ...

उनका पेट नहीं भरता!

रायपुर,शनिवार दिनांक 21 अगस्त 2010 उनका पेट नहीं भरता! यह कैसी जिद? क्यों चाहते हैं सांसद भारत सरकार के सचिव से एक रूपये ज्यादा वेतन। और वेतन बढ़ाने की मांग पर यह कैसी राजनीति? संसद में अपना वेतन बढ़ाने के लिये गैर भाजपा सांसदों ने जो तरीका अपनाया क्या वह इन सांसदों के क्षेत्र के लोगों की भावनाओं के अनुरूप है? सांसद मुलायम सिंह हो या लालूप्रसाद यादव जन सेवा के लिये यह सांसद ग़रीबों के मसीहा बनने में कभी पीछे नहीं हटते, लेकिन जिस तरह यह करोड़पति सांसद अपनी जन सेवा का दाम लगा रहे हैं। यह तो यही दर्शा रहा है कि इन्हें अपने आगे पीछे घूमने वाली जनता से ज्यादा अपने व अपने परिवार की खुशहाली की चिंता है। केन्द्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को सांसदों का वेतन तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया लेकिन गैर भाजपा सांसदों को यह वृद्धि मंज़ूर नहीं। वे इसे कम आंकते हुए वेतन बढ़ाकर अस्सी हजार एक रूपये रखने की मांग कर रहे हैं। यह वेतन भारत सरकार के सचिवों के वेतन से एक रूपये ज्यादा है। अभी बढ़ा वेतन, कार्यालय खर्च, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और पेंशन मिलाकर वेतन करीब डेढ़ लाख रूपये तक पहुंच जायेगा। कुछ विश्लेषकों का कहना ह...

भूखी नंगी जनता के चेहरे पर करारा तमाचा!

रायपुर शनिवार।दिनांक 21 अगस्त 2010 भूखी नंगी जनता के चेहरे पर माननी यों का करारा तमाचा! पटरियों पर फेंका हुआ झूठा भोजन हो या किसी आलीशान पार्टी से कूड़े दान में फेंका गया धूल मिट्टी से सना खाना - इसे खाने वाले इस देश में लाखों- करोड़ों की संख्या में भूखे- नंगे हैं। चूंकि यह इंडिया है जहां आम आदमी को दो जून की रोटी के लिये कुछ यूं ही मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन इन भूखे- नंगों की जिंदगी को संवारने का ठेका जिन हाथों में सौंपा गया ह,ै वे क्या कर रहे हैं? दिल्ली में मौजूद हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के चरम पर बैठकर इस भूखी- नंगी जनता को अंगूठा दिखा कर मुंह चिढ़ा रहे हैं। कल तक उन्हें इस जनता को दल दल से निकालने के लिये सोलह हजार रूपये मासिक दिया जाता था लेकिन अपनी हर बात मनवाने के काबिल इस वर्ग ने जनता की जेब पर ऐसा झपट्टा मारा कि इनकी जेब हर माह अब पचास हजार रूपये से भरने लगेगी। इसमें वह पैसा शामिल नहीं है जो इन्हें भत्तों और सुविधाओं के रूप में प्राप्त होगा। मंहगाई के बोझ से बुरी तरह दबी जनता को जब सांसदों की इस खुशख़बरी का पता चला तो उनका पहला सवाल था इन्हें वेतन की क्या जरूरत ? पहले से करोड़...