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क्यों दी हमने इतनी आजादी?

रायपुर दिनांक २7-अक्टूबर 2010

क्यों दी हमने इतनी आजादी?
प्रख्यात लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुन्धति राय का अब बयान है कि जम्मू कश्मीर भारत का अंग नही हैं। अरुन्धति के इस बयान पर हम केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा कश्मीर के वरिष्ठ नेता फारूख अब्दुल्ला की उस टिप्पणी का कि क्यों दी हमने अभिव्यक्ति की आजादी का स्वागत करते हुए उन्हीं की बात को आगे बढ़ाते हुए यह कह सकते हैं कि- भारत में लोगों को कुछ ज्यादा ही आजादी मिली हुई है। आपस में तो एक दूसरे को कुछ भी बोल देते हैं। अब देश के खिलाफ भी बोलने लगे हैं। हाल ही बिहार के सांसद ने बयान दिया कि राहुल गांधी को गंगा में फेंक देना चाहिये। चलिये हम मानते हैं कि ऐसी बातें हमारे नेता कहते ही रहते हैं। मगर प्रख्यात लेखिका और समाजसेवी जब यह कहे कि- हमारा दायां या बायां हाथ हमारा नहीं, किसी और का है, तो उसे कैसे मान लें। यही न कि उनकी बुद्वि भ्रष्ट हो चुकी है। वे शायद इस मिट्टी में जन्म लेकर यह इसलिये कह रही है कि उन्हें बोलने की बहुत ज्यादा आजादी दे डाली है। कोई दूसरा देश होता तो शायद मैडम आगे कोई वक्तव्य देने लायक नहीं रह जातीं। विश्व के इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कुछ लोग संविधान द्वारा प्रदत्त बोलने व लिखने की आजादी का इस्तेमाल विनाश के लिए कर रहे हैं। जिस प्रकार से हम इस आजादी का उपयोग कर रहे हैं, उसकी कोई सीमा नहीं है अरुन्धति राय की विवादास्पद टिप्पणी पर फारूख अब्दुल्ला का यह बयान कि- देश ने आजादी दी है। यह उन पर निर्भर करता है कि वह इसका कैसे उपयोग करते हैं। यह उन्हें अहसास करना है कि क्या सही है और क्या गलत है। क्या कहना चाहिए और क्या नहीं कहना चाहिए, यह व्यक्ति को खुद तय करना होता है। यह बयान अरुन्धति जैसे उन सभी लोगों पर लागू होता है, जो इस देश को खोखला करने की भूमिका अदा करते हैं। अरुन्धति उस समय पैदा भी नहीं हुई होंगी जब देश आजाद हुआ और भारत का एक टुकड़ा देकर पाकिस्तान को अलग किया गया। वही अरुन्धति आज बयान दे रही हैं कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं रहा। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है और इसे भारत सरकार भी स्वीकार कर चुकी है। वे यहां तक कह गई कि ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद भारत शीघ्र ही औपनिवेशिक ताकत बन गया। वाह क्या आजादी है हमारे देश में... यूं ही हर कोई अपना मुंह खोलने लगा तो बहुत जल्द एक तरफ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ चीन का कब्जा हो जायेगा। सरकार ने तय किया है कि इस लेखिका को अपने बयान के लिये न्याय के कटघरे पर खड़ा किया जाये। अभिव्यक्ति की इतनी भी स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिये कि लोग अपना मुंह देशद्रोहियों- आतंकवादियों के समर्थन में खोलने लगे। यह वही अरुन्धति राय है, जिसने नक्सली हिंसा का भी एक समय समर्थन किया था।

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काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

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