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कही फूल, कहीं कांटे!

रायपुर मंगलवार। दिनांक 19 अक्टूबर 2010 कही फूल, कहीं कांटे! यह कैसा अडियल रवैया है निगम का? जयस्तंभ चौक में आरएसएस के पथ संचलन पर किसी समय फूलों की वर्षा करने वाली रायपुर की महापौर को यह अचानक क्या हो गया कि उन्होंने विजयादशमी पर आरएसएस को सप्रे शाला प्रांगण में शस्त्र पूजन करने पर कठोर कार्रवाई करने का ऐलान कर दिया? हालांकि बाद में यह मामला सलटा लिया गया और पूजा वहीं हुई जहां यह वर्षो से होती आ रही है। महापौर ने अपने इस विरोध की वजह बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया जिसमेेंं स्कूल प्रांगण में कोई भी बाहरी कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगी हुई है। अगर ऐसा है तो संघ के इस आयोजन से पहले इसी मैदान में जन्माष्टमी का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था उसपर रोक क्यों नहीं लगाई गई? महापौर ने कुछ ही दिन पहले आरएसएस के पथ संचलन के दौरान फूल बरसाकर सभी कांग्रेसियों को चकित कर दिया था। अब अचानक आये नये बदलाव ने फिर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। कांग्रेस की टिकिट पर महापौर बनीं किरणमयी नायक का रवैया शुरू से ही टकराहट का रहा है। वे यह जानती हंंै कि भाजपा सरकार से तालमेल बनाये बगैर शहर का विकास सं...

अब खुलेगी चमक की पोल!

रायुपर दिनांक 16 अक्टूबर 2010 अब तक चुप रहे,विदेशी चले गये अब खुलेगी चमक की पोल! यह पहला अवसर है जब भारतीय खिलाडिय़ों ने एक साथ सौ पदक प्राप्त कर देश का गौरव बढ़ाया। सभी को इस बात का आश्चर्य है कि एशियाड, ओलंपिक जैसी विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में एक-एक पदक के लिये जी जान एक कर देने के बाद भी एक भी पदक प्राप्त नहीं करने वाले भारतीय खिलाडिय़ों ने अपनी भूमि पर एक साथ सौ से ज्यादा पदक कैसे बटोर लिये? खिलाडिय़ों को भारी संख्या में मिले सोने के मेडल की चमक ने विश्व की आंखों को भी चकाचौंध कर दिया। चर्चा में तो बात यहां तक है कि राष्टमंडल खेलों की तैयारियों के दौरान जो छीछालेदर आयोजन समिति की हुई उसके चलते पूरे खेल का फिक्ंिसग कर लिया गया। फिक्सिंग की बात तो राष्टमंडल खेल के दिल्ली में आयोजित करने के मामले में भी हुई। जब भारतीय ससंद में यह आरोप लगाया कि नई दिल्ली में राष्टमंडल खेल आयोजित करने के लिये कुछ देशों को रिश्वत दी गई। चर्चाएं अफवाह अपनी जगह है किंतु जो हमने अपनी आंखों से देखा। उसमें हम यही कह सकते हैं कि भारत में राष्टमंडल खेलों का शानदार आगाज हुआ और जानदार अंत भी। हां यह दूसरी बात है कि...

बर्बर कृत्य के लिये फांसी,

रायपुर दिनांक 11 अक्टूबर 2010 बर्बर कृत्य के लिये फांसी, नाबालिगो से बहशीपन पर भी हो मौत की सजा! >>बहुओं को जलाया जाना बर्बर और जंगली जानवरों जैसा कृत्य हैं। जब तक इस तरह के अपराध को अंजाम देेेने वालों को फांसी के फंदे पर नहीं लटकाया जायेगा। तब तक लोग महसूस नहीं करेंगे कि बहुओं को जलाया जाना अपराध है।

नक्सली अब अपनी आइडेंटिटी प्रदर्शन के साथ शहरों की ओर!

रायपुर रविवार दिनांक 10 अक्टूबर 2010 नक्सली अब अपनी आइडेंटिटी प्रदर्शन के साथ शहरों की ओर! अबूझमाड़ के जंगलों से निकलकर नक्सलियों ने शहरी क्षेत्र की ओर मार्च कर दिया है। शहरी क्षेत्र में नक्सलियों की बेखौफ मौजूदगी और ग्राीमणों के साथ मेलजोल,बातचीत और उनके बीच बैठकर खाना खाने से यह बात स्पष्ट हो गई है, कि नक्सलियों का पुलिस की गोली से खौफ खत्म हो गया है और वे किसी भी मुकाबले के लिये तैयार हैँ। आपको याद होगा जब नक्सल विरोधी अभियान के लिये राज्य सरकार ने पंजाब के पूर्व डायरेक्टर जनरल जी एस गिल की नियुक्ति की थी। तब नक्सलियों ने बस्तर क्षेत्र को धमाकों से उनके स्वागत में गुंजा दिया था अर्थात नक्सली एक तरह से पुलिस के नई नियुक्ति की खिल्ली उड़ा रहे थे। गिल के चार्ज लेने के बाद प्रदेश में नक्सलियों का अभियान तेज हो गया और एक के बाद एक चुनौतीपूर्ण घटनाएं हुई। गिल ने बाद में इस अभियान से अपने आपको अलग कर राज्य सरकार पर इस अभियान में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ से विदा हो गये। यह भी महत्वपूर्ण है कि जब भी राज्य या केन्द्र में कोई पुलिस अधिकारी या नेता नक्सलियों से जोरदार तरीके...

जोगी के आंकड़ों का खेल,क्या संभव है भाजपा में बगावत!

रायपुर दिनांक 9 अक्टूबर 2010 जोगी के आंकड़ों का खेल, क्या संभव है भाजपा में बगावत! अजीत जोगी का नया पैतरा भाजपा सरकार को कितना हिलायेगा यह तो हम नहीं कह सकते लेकिन 12 भाजपा विधायकों की उनसे मुलाकात की बात ने सियासी हलकों को चर्चित जरूर कर दिया है, कि वे इस दावे के साथ सरकार को परेशान करने की स्थिति में आ गये हैं! अभी कुछ ही दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने विधायकों व पार्टी कार्यकताओं को एक सूत्र में बंधे रहने का डोस दिया था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी की बस्तर यात्रा के बाद बने नये समीकरण(?) और उसके बाद के बयान का विश£ेषण किया जाये। तो जोगी से बस्तर में कुछ असंतुष्ट विधायकों की मुलाकात जरूर हुई होगी और यहां उन्होंने जोगी को राज्य सरकार के कार्यो की शिकायत भी जरूर की होगी तथा उनको साथ देने का वायदा भी किया होगा। लेकिन यह संख्या कितनी रही होगी? इसका आंकलन तत्काल नहीं किया जा सकता। जोगी को सरकार पलटाने की महारथ हासिल है,यह किसी से छिपा नहीं है। इसलिये शायद सत्ता पक्ष भी उनकी बातों को यूं ही आई गई नहीं होने देगा। जोगी जब पहली बार सत्ता में आये तो उन्होनें ब...

खिलाडिय़ों का खून और पसीना!

रायपुर दिनांक 8 अक्टूबर स्वर्ण के एक एक हिस्से पर लगा हैं खिलाडिय़ों का खून और पसीना! जिस स्वर्ण पदक को जीतकर आज सारा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उसे जीतने के लिये हमारे खिलाडिय़ों को कितने पापड़ बेलने पड़े हैं। यह जब उनकी जुबानी बाहर आती है तो हमारी व्यवस्था पर गुस्सा आता है कि वह देश में खिलाडिय़ों को तैयार करने के नाम पर उनकी पूरी उपेक्षा ही कर रही है। जो कुछ गौरव हासिल किया जा रहा है, उसे खिलाडी अपनी स्वयं की प्रतिभा,मेहनत और खून- पसीना एक कर से अर्जित कर रहे हैं। राष्ट्रमंडल खेलों की भारोत्तोलन प्रतियोगिता में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली रेणुबाला चानू को बुधवार रात पदक जीतने के बाद वापस खेलगांव जाने के लिए करीब पांच घंटे आटोरिक्शा का इंतजार करना पड़ा। वह अपने परिवार के साथ थीं। यह तो गनीमत थी कि उसे आटो मिल गया। वरन् देश का यह गौरव कहां भटकती रहती इसका अंदाज व्यवस्था करने वाले भी नहीं लगा पाते। अब अपनी खाल बचाने के लिये आयोजन समिति कह रही है कि रेणु ने स्वयं ही आटोरिक्शा से खेलगांव जाने का निर्णय लिया था। गोल्ड मेडल जीतने के बाद रेणु के साथ जहां यह व्यवहार था तो दूसरी ओ...

कपडे में मुंह छिपाकर घूमने वाले कौन? पुलिस क्यों हैं खामोश...!

रायपुर दिनांक 6 अक्टूबर 2010 कपडे में मुंह छिपाकर घूमने वाले कौन? पुलिस क्यों हैं खामोश...! छत्तीसगढ़ में रायगढ़ नगर के आईसीसीआई बैंक में चार युवक चेहरा ढक कर पहुंचे, कई लोगों की उपस्थिति में उन्होनें पेटी में करीब पौन करोड़ रूपये भरे और रफूचक्कर हो गये। निशानी के बतौर वे बैंक के स्पाई कमरें में अपना चेहरा ढका हुआ छोड़ गये- पुलिस इसी छबि को लेकर इन्हें पकडऩे के लिये माथा पच्ची कर रही है। गमछा मुंह में बांधे तेज गति से बाइक चलाने वाले युवको की गतिविधियां पूरे छत्तीसगढ़ में आम आदमी के लिये तो सरदर्द है साथ ही पुलिस के लिये भी सरदर्द बने हुए हैं। यद्यपि पुलिस की सक्रियता ऐसे लोगों को पकडऩे के लिये उसी समय होती है जब कहीं वारदात होती है वरना इनसे कोई पूछताछ नहीं होती। पिछले दस पन्द्रह सालों में नये बेरोजगार युवाओ की एक बड़ी फ ौज तेयार हो गई हैं जिसमें चेहरा ढक कर घूमने की आदत सी हो गई है। गर्मी में अगर कोई धूप से बचने के लिये चेहरे को गमछे से लपेट ले तो हम कह सकते हैं कि यह गर्मी से बचाव का एक उपाय है किंतु सदैव गमछे से चेहरे को लपेटकर घूमने वाले आखिर हैं कोन?और इनके चेहरे से नकाब हटाने...

पहुंच,प्रभाव के आगे फिरबौना हुआ देश का तराजू!

रायपुर,7 सितंबर 2010 पहुंच,प्रभाव के आगे फिर बौना हुआ देश का तराजू! हमारी न्याय व्यवस्था को विश्व ने सराहा है, चाहे वह अयोध्या में राम मंदिर- बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला हो या फिर मुम्बई में आंतकी हमलों में जीवित बचे एक मात्र आंतकी अब्दुल अजमल कसाब के मामले में हाईकोर्ट का फैसला हो। किंतु पिछले कुछ समय से जो फैसले आ रहे हैं। वह अपराधियों के लिये तो राहत देने वाला है, मगर समाज में इसका गलत संदेश जा रहा है। न्याय व्यवस्था पर पिछले कुछ समय से लगातार उंगली उठ रही है जिसमें न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार से भी संबन्धित है। कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। भोपाल गैस ट्रेजडी पर दिये गये फैसले ने पहली बार सबको चौकाया और उसकी जगह-जगह थू -थू हुई। क्योंकि जिस मामले में आरोपियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिये था। उन्हें मामूली जुर्माने और कम सजा में ही निपटा दिया गया। ऐसे लगा कि न्याय को खरीद लिया गया। इस मामले में हजारों लोगों की जान चली गई थी तथा इसमें हत्या का मुकदमा दायर करना था। उसकी जगह कम धाराएं लगाकर मामला कोर्ट में पेश किया गया और आरोपी एक तरह से छूट गये। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली...

चुभने लगा अपराधी करण!

रायपुर दिनांक 5 अक्टूबर 20010 चुभने लगा अपराधी करण! चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों ने राजनीति में अपराधी करण पर अंकुश लगाने की मांग की हैं। इस मांग पर विस्मय इस बात को लेकर है कि जिन पार्टियों ने पहले राजनीति का अपराधी करण को बढावा दिया वे ही अब इसपर अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं। विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग के समक्ष राजनीति में अपराधी करण और चुनावों में धन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। एक समय था जब राजनीतिक दलों ने अपने दरवाज़े खुले दिल से अपराधियों व धन कुबेरों के लिये खोल दिया। फिलहाल राजनीति के धार्मिकीकरण पर किसी ने कोई चिंता व्यक्त नहीं की लेकिन यह भी भविष्य में एक समस्या बन जा ये तो आश्चर्य नहीं करना चाहिये। पूर्व के वर्षो का इतिहास रहा है कि राजनीतिक दलों ने ही राजनीति में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को प्रश्रय दिया और धन कुबेरों को शामिल कर धन का खेल खेला लेकिन अब यही उनपर उलटा वार करने लगे। पिछले दो तीन दशक में राजनीति का जितना अपराधी करण हुआ तथा धनकुबेरों का वर्चस्व बना वह इससे पहले कभी नहीं हुआ। प्र्राय: सभी राजनीतिक दलों ने निर्वाचन आयोग से ...

चुभने लगा अपराधीकरण!

रायपुर दिनांक 5 अक्टूबर 20010 चुभने लगा अपराधी करण! चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों ने राजनीति में अपराधी करण पर अंकुश लगाने की मांग की हैं। इस मांग पर विस्मय इस बात को लेकर है कि जिन पार्टियों ने पहले राजनीति का अपराधी करण को बढावा दिया वे ही अब इसपर अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं। विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग के समक्ष राजनीति में अपराधी करण और चुनावों में धन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। एक समय था जब राजनीतिक दलों ने अपने दरवाज़े खुले दिल से अपराधियों व धन कुबेरों के लिये खोल दिया। फिलहाल राजनीति के धार्मिकीकरण पर किसी ने कोई चिंता व्यक्त नहीं की लेकिन यह भी भविष्य में एक समस्या बन जा ये तो आश्चर्य नहीं करना चाहिये। पूर्व के वर्षो का इतिहास रहा है कि राजनीतिक दलों ने ही राजनीति में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को प्रश्रय दिया और धन कुबेरों को शामिल कर धन का खेल खेला लेकिन अब यही उनपर उलटा वार करने लगे। पिछले दो तीन दशक में राजनीति का जितना अपराधी करण हुआ तथा धनकुबेरों का वर्चस्व बना वह इससे पहले कभी नहीं हुआ। प्र्राय: सभी राजनीतिक दलों ने निर्वाचन आयोग से ...

खंडपीठ देरी के लिये कौन जिम्मेदार?

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर हाईकोर्ट की खंडपीठ रायपुर में स्थापित करने मे देरी के लिये कौन जिम्मेदार? वीरप्पा मो इली की पिछली रायपुर यात्रा में एक महत्वपूर्ण रहस्योद्धाटन हुआ कि राजधानी रायपुर में बिलासपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापना के लिये राज्य शासन की तरफ से कोई प्रस्ताव भेजा ही नहीं गया। केन्द्रीय विधि मंत्री मो इली से जब रायपुर के लोगों ने अनुरोध किया कि बिलासपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ रायपुर में स्थापित की जा ये तो उनका जवाब सुनकर सब चौक गये कि राज्य शासन प्रस्ताव प्रेषित करें तो वे उस संबंध में विचार करेंगे। इस बयान से यह रहस्योद्धाटन हुआ कि रायपुर में उच्च न्यायालय की खण्डपीठ स्थापना के संबंध में राज्य की अब तक की सरकारें ला परवाह रही। राज्य स्थापना को एक दशक बीतने को है लेकिन राज्य सरकार ने रायपुर में खंडपीठ के लिये कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया जबकि अपनी सुविधाओं का विस्तार करने के लिये नई राजधानी और नये भवन सब आधुनिक ढंग से तैयार किये गये। आम आदमी के हित को मद्दे नजर रखते हुए अगर रायपुर मे खंडपीठ का प्रस्ताव भेज दिया जाता तो शायद अब तक यहां खंडपीठ की स्थापना हो जाती। राज्य ...

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010 ऊँची दुकान फीके पक वान! कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी...

भाजपा को भटगांव जीतना था कांग्रेस अब तो सबक सीखों!

रायपुर, 4 अक्टूबर 2010 भाजपा को भटगांव जीतना था कांग्रेस अब तो सबक सीखों! राज आस्था और सहानुभूति के तराजू पर तुली भटगांव की जनता ने अंतत: सहानुभूति लहर में बहना ही बेहतर समझा। भाजपा की प्रत्याशी रजनी त्रिपाठी कांग्रेस के यूएस सिंह देव को करीब पैंतीस हजार मतों से पराजित कर विजयी हुईं। भाजपा की यहां से जीत के कई कारण हैं। पहली बात तो रजनी त्रिपाठी को यहां के पूर्व लोकप्रिय विधायक और उनके पति की सामयिक मृत्यु से पूर्ण सहानुभूति मिली। जबकि भटगाव की जनता इतनी समझदार हो गई कि उसने ऐसे समय में भाजपा का साथ देना ही बेहतर समझा जब प्रदेश में वह सत्तारुढ़ पार्टी की भूमिका अदा कर रही है। आम वोटरों में अब इतनी समझ तो आ ही गई है कि कब किन परिस्थितियों में किसका साथ दिया जायें। भटगांव ने अच्छी तरह से समझ- बूझकर व नाप- तौलकर ही राज परिवार पर आस्था प्रकट करने की जगह भाजपा को जिता ने का निर्णय लिया। भाजपा भले ही यह समझे कि उसके विकास कार्यो या अन्य के कारण उसकी जीत हुई है, तो उसमें उतना ज्यादा दम नहीं लगता। चूंकि सत्तारुढ़ पार्टी की यहां जीत होनी ही थी। उसकी पूरी सेना ने यहां डेरा डाला और अपने प्रत्याशी...

जो जीता वही सिकदंर!

रायपुर दिनांक 2 अक्टूबर जो जीता वही सिकंदर! चार पुलिस कर्मियों को नक्सलियों ने कम से कम बारह दिन तक अपने कब्ज़े में रखने के बाद रिहा तो कर दिया किंतु इस रिहाई ने कई प्रश्न खड़े कर दिये। झारखंड व छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की कार्रवाई लगभग एक जैसी थी। वहां अपहरण कर बंधक बना ये गये एक पुलिस कर्मी को नक्सलियों ने सरकार द्वारा मांग पूरी नहीं करने के कारण मार दिया तथा बाकी को छोड़ दिया। जबकि छत्तीसगढ़ में बंधक बना ये गये सभी चारों बंधकों को रिहा कर दिया। बंधक बनाये गये जवानों में अपने घर लौटने पर जहां खुशी थी वहीं नक्सलियों का खौंफ भी था। नक्सलियों के चंगुल से मुक्त होने के बाद पुलिस कर्मियों ने नक्सलियों द्वारा किसी प्रकार के दुर्व्यवहार की शिकायत नहीं की। जबकि उनकी इन बातों से ख़ौफ़ झलकता है कि वे परिवार के दबाव में आकर अब नौकरी छोड़ भी सकते हैं। शायद यह नक्सलियों की रणनीति का एक हिस्सा है, जो सरकार को डराने के लिये किया जा रहा है कि- आपकी पुलिस हमारे सामने नतमस्तक है। पुलिस कर्मियों की रिहाई परिवारजनों व गांव के लोगों की सहानुभूति अर्जित करने का एक प्रयास हो सकता है। नक्सली सरकार के ग्रीन ह...

एशिया की धरती पर कामनवेल्थ गैम्स

रायपुर दिनांक 3 अक्टूबी 2010 एशिया की धरती पर कामनवेल्थ गैम्स, भारत की आर्थिक ताकत मजबूत हुई! रविवार से कामनवेल्थ गैम्स शुरू हो रहे हैं। यह आयोजन दिल्ली में हो या कनाडा के हेमिल्टन में, इस मुकाबले में दिल्ली की विजय हुई थी ऐसा लगता है कि दिल्ली में कामनवेल्थ गैम्स खूब विवादों में रहने के बावजूद भाग्यशाली रहा कि उसका आयोजन समय पर हो रहा है। कामनवेल्थ तैयारियों के दौरान आयोजकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे तो हाल ही करोड़ों रूपये में बना फुट ब्रिज भी टूट कर गिर गया, जिसे सेना की मदद से बनाना पड़ा। खेलगांव में सफाई व्यवस्था और अन्य अनेक मुद्दे सदैव चर्चा के विषय रहे। आतंक के साये में आयोजित होने वाले इस खेल पर पहले प्रश्न चिन्ह जामा मस्जिद के पास आतंकवादियों द्वारा अंधाधुन्ध फ़ायरिंग से लगा। तभी अयोध्या पर फैसले से तो विश्व यही समझ बैठा कि शायद अब कामनवेल्थ गैम्स टल जायेगा। अयोध्या फैसले पर सारा देश शांत रहा तो एक और खबर कामनवेल्थ गैम्स से आई कि चीफ मेडिकल आफीसर बीमार पड़ गये हैं। चीफ मेडिकल ऑफिसर को टाइफाइड हो गया है। दूसरे मेडिकल आफिसर को लगाकर यह मसला हल कर लिया गया। टाइफाइड खाने- प...

राज्यपाल सीएम को नहीं बुलाया गया?

रायपुर दिनांक 30 सितंबर 2010 एक्ट की बात सही, किंतु कौन से कारण थे जो राज्यपाल सी एम को नहीं बुलाया गया? राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रदेश के नेताओं को एन आईटी के कार्यक्रम में क्यों नहीं बुलाया गया? कौन से ऐसे कारण थे जिसके चलते एन आईटी प्रबंधन ने केन्द्रीय विधि मंत्री को तो कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बनाया लेकिन प्रदेश के राज्यपाल जो कुलाधिपति भी हैं, मुख्य मंत्री तथा शिक्षा मंत्री को दीक्षांत समारोह में बुलाना उचित नहीं समझा। संदर्भ था प्रदेश के सबसे बड़े प्रोद्योगिकी महाविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह का जिसके आयोजन की तैयारी पिछले कुछ दिनों से चल रही थी। इस चर्चित दीक्षांत समारोह में न राज्य के राज्यपाल शामिल हुए न मुख्यमंत्री और न ही प्रदेश के शिक्षा मंत्री। क्यों हुआ ऐसा? क्या इन बड़ी हस्तियों को बुलाना उचित नहीं समझा गया? और ऐसा समझा गया तो क्या कारण थे? इस विवाद से बचने के लिये विधि मंत्री वीरप्पा मो इली को एक्ट का सहारा क्यों लेना पडा? क्या यह पहले से तय था या किसी का निर्देश था कि राज्यपाल या कुलाधिपति सहित प्रदेश सरकार के किसी भी व्यक्ति को इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया जा ये? ...

कब तक दुष्टों को झेलती रहेंगी हमारी जेलें?

रायपुर, दिनांक 29 सितंबर कब तक दुष्टों को झेलती रहेंगी हमारी जेलें? क्यों नहीं निपटाते इन्हें? एक दुष्ट सुरेंद्र कोली का नाम और जुड़ गया भारतीय जेल के सींखचों के पीछे, जिसे देश के कानून के मुताबिक फाँसी के फंदे पर लटका ना है-इसके पूर्व भारतीय संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु, मुम्बई में अंधाधुंध हमला कर कई निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारने वाला आमिर अजमल कसाब जैसा आंतकवादी भी जेल में पड़ा- पड़ा भारतीय रोटी खा रहा है.... और तो और कसाब ने मंगलवार को सुरक्षा प्रहरी पर हमला भी कर दिया। हम कब तक ऐसे दुष्टों को सहते रहेंगे? क्यों नहीं हमारे कानून को इतना कड़ा कर दिया जाता कि अपराध करने वाले घिनौने व्यक्तियों को तमाम दूसरे कानूनों से हटकर ऐसी सजा दी जाये कि और कोई दूसरा ऐसा करने की हिम्मत ही न कर सके। सुरेन्द्र कोली हो या कसाब एक ही चट्टे बट्टे के लोग हैं जिन्हें समाज व न्याय पालिका दोनों ही उनसे जीने का अधिकार छीन चुकी है। फिर उन्हें जेल में रख कर और रोटी खिलाने का औचित्य क्या? आज कानपुर से एक खबर आई कि कक्षा छठवीं में पडऩे वाली एक बारह साल की बच्ची से स्कूल में ही किन्हीं दरिन्दों ने रेप क...

फैसला होकर ही रहेगा!

रायपुर, दिनांक 28 सितंबर फैसला होकर ही रहेगा! फैसला जो भी हो इसे टाला नहीं जाना चाहिये- सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार को अयोध्या विवाद पर सुलह की अर्जी को खारिज करते वक्त दिये गये फैसले का सार कुछ यही था। इस महीने की चौबीस तारीख को इलाहाबाद उच्च न्यायालय को देश के सबसे पुराने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाना था। लेकिन रमेश चंद त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए याचिका लगाई कि मामले का हल आपसी समझौते से निकालने के लिये फैसले को टाला जाना चाहिये। किंतु सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया और हाइर्कोर्र्ट की बैंच से कहा कि- वह एक- दो दिन में इस मामले पर फैसला सुनाए। हाईकोर्ट का निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट के बदले लखनऊ हाई कोर्ट की बैच में सुनाया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने के बाद इस विवादास्पद मसले पर फैसला शुक्रवार तीस सितंबर को आने की संभावना है। हाई कोर्ट के एक जज अक्टूबर में रिटायर हो रहे हैं। इसलिये भी यह जरूरी है कि फैसला तीस सितंबर से पहले हो जाए। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर है? क्या होगा फैसला? निर्णय हिंदुओं के पक्ष मे...

शादी वरूण की, दर्द राहुल का

रायपुर दिनांक 28 सितंबर 2010 शादी वरुण की, दर्द राहुल का, कब लोग इस सिस्टम से बाहर निकलेंगे? वरुण गांधी बंगाली बाला या मिनी राय से इस वर्ष शादी करेंगें-आमतौर पर देखा जा ये तो यह खबर आम है किंतु खबर का सिरा कहीं न कहीं सत्ता व हाई प्रो फाइल से जुड़ा हुआ है, तो इसका महत्व भी उतना बढ़ गया। खबर निकालने वालों ने इसे नेहरू-गांधी परिवार की पुरानी परंपरा से जोड़कर बता दिया कि चौरानवे साल बाद इस खान दान में ब्राह्मण वधु आयेगी। इसमें भी दिलचस्प बात यह कि राजनीति से जुड़े लोगों ने इसमें अपना मकसद साधने का प्रयास किया। कुछ ने कहा कि इससे यूपी में जातिगत समीकरण में बदलाव आयेगा। कांग्रेस के लोगों ने गोटी बिठानी शुरू कर दी कि राहुल गांधी को भी अब शादी कर लेना चाहिये। राहुल अगर ब्राह्मण वधु लाते हैं तो उत्तर प्रदेश में सवर्ण वोट बैंक में इज़ाफा होगा। आम आदमी के बीच में जब इस शादी और इसमें राजनीतिक घुसपैठ की चर्चा हुई तो कई लोगों के मुंह से यही बात निकली कि आप शादी की बात करते हैं। यह राजनीति से जुड़े लोगों में से तो कई ऐसे भी है जो किसी की मौत पर भी शतरंज की बिसात बिछा कर गोटियां सरकाते हैं। वरुण...

थल,वायु,जल सबसे तो ले ली दुश्मनी

रायपुर दिनांक 27 सितंबर 2010 थल,वायु,जल सबसे तो ले ली दुश्मनी, अब तैयार रहो परिणाम भुगतने..! जाने-अनजाने में हम धरती को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं और जल वायु को कितना दूषित कर रहे हैं -क्या कभी इसकी कल्पना की है? हमने कल्पना की भी होगी तो हम अपने लोगों के सामने ही इस मामले में बे बस हैं। चूंकि जानते हुए भी लोगों को इसकी चिंता नहीं हैं। हम आमने- सामने होने वाले रोज़मर्रा कामों पर एक नजर डालें तो यह बात अपने आप स्पष्ट हो जाती है कि हम जिस धरती में सोना उगाते हैं। उसी धरती पर कई जगह बुरी तरह गंदगी फैला प्रदूषित कर उसका अपमान कर रहे है। अपनी धरती को हम मां कहकर पुकारते हैं और उसी मां के सीने पर गंदगी फैला कर यातना दे रहे हैं। क्या यही हाल हमारी नदियों व तालाबों का नहीं है? जहां हर साल अपने धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर वह सब कुछ उस मां रूपी नदियों के साथ करते हैं, जो नहीं करना चाहिये। हाल ही संपन्न मूर्ति विसर्जन के बाद किये गये एक आकलन में कहा गया है कि मूर्तियों के विसर्जन से नदी के पानी में इतना रसायन घुल मिल गया है कि वह न पीने लायक रहा और न ही नहाने लायक। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो न...