कानून से कौन डरता है? नेता छात्रावास निरीक्षण के लिये पहुंचे, लड़कियों को देख मन डोल गया!

कानून से कौन डरता है? नेता छात्रावास
निरीक्षण के लिये पहुंचे,
लड़कियों को देख मन डोल गया!

महिला छात्रावास फिर सुर्खियों में है, इस बार बारी आई है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली गांव के आदिवासी छात्रावास की! जहां स्थानीय नेताओं के एक आठ सदस्यीय दल ने अनधिकृत रूप से प्रवेश किया और वहां मौजूद कम से कम दस छात्राओं से यौन दुर्व्यवहार किया. एक पन्द्रह साल की छात्रा ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि दल का नेता घनराज उसके कमरे में घुस आया और उसे अपनी ओर खींचकर गलत हरकतें करने लगा. हालांकि कोरबा पुलिस अधीक्षक के हवाले से जो खबर आई है उसमें इस घटना में लिप्त प्रमुख आरोपी घनराज सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि अन्य फरार हैं, उनकी  तलाश की जा रही है. यह घटना इस सप्ताह के शुरू में मंगलवार  को तब की बताई जाती है जब पाली के सरकारी आदिवासी छात्रावास में उस समय हॉस्टल निरीक्षण के नाम पर यह तत्व जबर्दस्ती घुस गये. उस समय छात्रावास अधीक्षिका बाहर गई हुई थी. शिकायत के अनुसार जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय जायसवाल, जनपद अध्यक्ष घनराज सिंह कंवर, पाली कांग्रेस विधायक का प्रतिनिधि शंकर दास महंत और उनके साथी रसिया सिंह, दिनेश राठौर और दो अन्य जबर्दस्ती छात्राओं के कमरे में घुसे और उन्होंने छात्राओं के साथ जोर जबर्दस्ती की तथा यौन प्रताड़ना दी. पन्द्रह वर्षीय छात्रा से बदतमीजी के बाद बताया गया कि उसे मुंह बंद रखने के लिये हाथ में सौ रुपये का नोट भी थमाया. जब जनता के प्रतिनिधि ही इस ढंग की हरकतों पर उतर जाये तो इसका क्या इलाज है?. हालांकि शिकायत के बाद त्वरित कार्रवाही  पुलिस की ओर से  की गई. जिला पुलिस अधीक्षक अमरीश मिश्रा के निर्देश पर आरोपियों को तुरन्त गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है किन्तु राजनीतिक दलों के लिये यह एक गंभीर सवाल है कि क्या उन्हें अपने कार्यकर्ताओं पर नजर नहीं रखनी चाहिये. क्या उन्हें इसका अधिकार है कि वे किसी भी संस्था में निरीक्षण के नाम पर उस समय घुस जाये जब उसकी अधीक्षिका भी मौजूद नहीं थी. बताया जाता है कि अधीक्षिकों से फोन पर इन तत्वों ने छात्रावास निरीक्षण की बात कही थी, उसपर उन्होंने उनसे कहा भी था कि वे उस समय आये जब वे वहां उपस्थित हो लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी और उस समय छात्रावास में आ धमके जब अधीक्षिका मौजूद नहीं थी. अधीक्षिका को जब उनके पहुंचने और घुसने की खबर दी गई तो उन्होंने गार्डों को रोकने का आदेश दिया था लेकिन गार्ड ऐसे नेताओं के समक्ष बौने हो जाते हैं यह सर्वविदित है. गंभीर बात यह है कि छत्तीसगढ़ के छात्रावासों में विशेषकर महिला छात्रावासों में रह रही बच्चियां किसी भी ढंग से सुरक्षित नहीं हैं, उनके साथ यौन दुर्व्यवहार अब तक अंदर में समाये बैठे कतिपय दुराचारी किया करते थे, अब यह सिलसिला बाहरी छुटभैयों ने भी  शुरू कर दिया है. राजधानी रायपुर के नन

से बलात्कार का मामला अभी सुलझा नहीं है तब इस ढंग की एक और घटना ने संपूर्ण छत्तीसगढ़ की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर  गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है- सरकार ऐसे मामलों में कितनी गंभीर है, यह तो पता नहीं लेकिन अब तक हुई घटनाओं से तो ऐसा लगता है कि सरकार ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही. 

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