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प्रभु की ट्रेन सेवा-हाथी के दांत खाने के कुछ दिखाने के कुछ!




इसमें  दो मत नहीं कि रेलवे ने सतही तौर पर बहुत ऐसे काम किये हैं जो यात्रियों व जनता के बीच किसी न किसी रूप में चर्चित हैं किन्तु जो सुविधाएं दी जा रही है उसकी क्वालिटी कितनी ठीक है यह न रेलवे के लोग देख रहे हैं और न रेल  मंत्रालय और न ही रेलवे मिनिस्टर. एक थर्ड एसी की सीट पर दो तीन लोग आरएसी टिकिट पर सोते नजर आये तो इसे क्या कहना चाहिये? इसी प्रकार जो रेल मंत्रालय डिस्कवरी जैसे विश्व स्तरीय चैनल पर लाखों रूपये खर्च कर  खाना बनाने के तरीके को दिखाता है उसकी  हकीकत अगर लोग जान जाये तो शायद खाना खाना ही छोड़ दे. राजधानी जैसी  ट्रेन में जो खाना परोसा जा रहा है वह सिर्फ एक भूखे व्यक्ति को संतुष्ट कर सकता है, कि सी पर्यटक व दूरस्थ यात्रा करने वाला इसे या तो वापस कर दे या कूड़े में फेक दे. किसी प्रकार का टेस्टी खाना न परोसा जाता है ओर न मांगने पर दिया जाता है. भारी भरकम टिकिट लेकर यात्रा करने वाले यात्री सिर्फ इस गर्मी के मौसम में एसी की ठंडी  हवा का मजा ले सकते है उसके सिवा कोई अन्य सुविधाएं रेलवे से प्राप्त हो जाये इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिये. हां किराये के मामले में लगातार संशोधन हो रहे हैं चूंकि यह रेलवे के हित की बात हैं. रेलवे मंत्रालय ने हाल ही कुछ राहत टिकिटों के मामले में दी है जैसे एक ट्रेन में कन्फर्म नहीं हुआ टिकट, तो दूसरी में रिजर्वेशन का विकल्प... रेलवे ने आरक्षित श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए सोमवार से हावड़ा, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और सिकंदराबाद को जोडऩे वाले पांच प्रमुख मार्गों में वैकल्पिक ट्रेन आरक्षण सेवा विकल्प का विस्तार किया है. रेलवे की विकल्प नाम की इस सुविधा के तहत यात्रियों द्वारा आरक्षित किए गए टिकट की पुष्टि (कन्फर्म) नहीं होने की स्थिति में उन्हें अन्य ट्रेन में आरक्षण का विकल्प मुहैया कराया जाएगा. इस सुविधा के तहत प्रतीक्षा सूची में शामिल यात्री अपने यात्रा टिकट की पुष्टि के लिए 'विकल्पÓ सेवा चुन सकते हैं.एक तरफ रेलवे  कई तरह की सुविधाओं का प्रचार प्रसार करता है वहीं यात्रियों में से अधिकांश को तो यह तक पता नहीं होता कि स्टेशन में ट्रेने कहां खड़ी है और उन्हें उस ट्रेन  में चढऩे के लिये स्टेशन में किस किस प्रकार के पापड़ बेलने पड़ेंगे. अक्सर बड़े बड़े शहरों में प्लेटफार्म दूर दूर बने हैं वहां तक दौड़ते भागते जब तक यात्री पहुंचता है तब तक टे्रेन या तो छूट चुकी होती है या फिर छूटने वाली. यात्रियों से कहा जाता है कि उन्हें विमान जैसी सुविधा दी जायेगी लेकिन जो ट्रेन में मिलनी वाली सुविधा अभी लोगों को नहीं मिल रही है तो विमान जैसी सुविधा की बात ही कु छ ओर है. बहरहाल टिकिट कन्फर्र्मे वाली विकल्प सेवा जो शुरू की गई है वह भी भेदभाव से भरपूर है. राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेनों में सफर करने वालों के लिये यह सुविधा नहीं है. ऐसा क्यों किया जाता है? रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने  इस साल के रेल बजट में इस योजना की घोषणा की थी, इसलिए इस सेवा को शुरू किया गया यह सेवा केवल मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में क्रियान्वित की जा रही है, जबकि राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।यह मेहरबानी जरूर की गई ह ैकि यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा इसके तहत विकल्प सेवा चुनने वाले यात्री वैकल्पिक आरक्षण मिलने के बाद अपनी यात्रा में संशोधन नहीं कर सकेंगे। जबकि इस सेवा के लिए यात्रियों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क वसूल नहीं किया जाएगा और न ही उन्हें दोनों ट्रेनों के किराये में अंतर वाली धनराशि वापस की जाएगी.ट्रेनो में सीनियर सिटीजन आज भी बुरे हालातों में हैं उनमें से कइयों को आज भी मिडिल और अपर बर्र्थ ही एलाट की जा रही है.


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ऊँची दुकान फीके पक वान!
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