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बीएसएनएल-सिर्फ बड़ी सरकारी कंपनी होने का घमंड, कान बंद कर रखे हैं इस विभाग के लोगों ने!

याकूब फांसी पर!इधर आतंक के खेल की आहट...

म्यांमार की तरह पाक आतंकियों के ठिकानों पर हमला करने से क्यों हिचक रही सरकार?

कलाम नहीं रहे....इधर पंजाब में आतंकवादियो का ख़ूनी मंजर-सुरक्षा में भारी चूक!

सामान्य से लेकर नौकरशाही और राजनीति तक सब जगह टांग खींचने की प्रवृति!

सुनसान सड़क पर बच्ची के रोने की आवाज, और गुस्से में भागती मां-'घर-घर की कहानी

ताउम्र जेल या फांसी?, बेहतर तो यही कि ताउम्र कैद में रहकर कठोर यातना भुगते!

व्यवस्था के दो रूप-एक माननीय ने जीवित पूर्व राष्ट्रपति के चित्र पर फूल चढ़ाया, दूसरे ने मान बढ़ाया!

नैतिकता, सिद्धांत सब पुरानी बात इस्तीफों की मांग को लेकर आंदोलनों का औचित्य क्या

जनता के माल को अपनी पैतृक संपत्ति मानकर भ्रष्टतंत्र चट कर रहा..!

हर आदमी के हाथ बंधे हैं फिर पीड़ितों की मदद में कैसे हाथ बढ़ायें?

कानून से कौन डरता है? नेता छात्रावास निरीक्षण के लिये पहुंचे, लड़कियों को देख मन डोल गया!

क्या हम कभी ट्रेन लेट न होने का जापानी रिकार्ड इक्यावन सेक ण्ड तोड़ पायेंगे?

अब तक तीन! सरकारी विभागों में घोटालों को दबाने का नया खेल,

पीड़ित को न्याय में गवाह की मौत कितनी बाधक?- साक्षियों की मृत्यु ने कई मामलों को उलझाया!

कानून इतना ढीला क्यों? संगीन जुर्म के अपराधियों को फरार होने का मौका कैसे मिलता है?

एटीएम, ई-बैंकिंग मशीनों से लूटपाट! आखिर जनता के पैसे की यूं बरबादी के लिये कौन जिम्मेदार?

भ्रष्टों को सेवा से बर्खास्त करने में देरी क्यों? नये को मौका मिलना चाहिये!

जब ऊपरी लेवल पर ही नैतिकता, जिम्मेंदारी खत्म हो रही है तब आगे तो खाई ही खाई है!

छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का नामोनिशान मिटेगा? हवा और जमीनी लड़ाई दोनों की बू!

व्यापम से भी बड़ा रहस्य अब इसमें आरोपियों, गवाहों की मौत, संदिग्ध मौतों के पीछे आखिर कौन?

एक माननीय पर हर माह 2.92 लाख का खर्चा तो टैक्स और मंहगाई नहीं बढ़ेगी तो और क्या होगा?

बरसात रायपुरवासियों के लिये मुसीबत, पानी तो पानी, बिजली, गंदगी भी सर चढ़कर बोलती है!

डिजिटल इंडिया की एंट्री, आम लोगों तक पहुंचाने में कई पापड़ बेलने पड़ेंगे

सरकार की दूरगामी योजनाएं लेकिन वर्तमान को कौन देखेगा, महंगाई फिर बेलगाम!