कोरोना का देश निकाला फरवरी में संभव !

 


कोरोना का देश निकाला फरवरी में संभव 
!

 

 

कोरोना महामारी ने लोगो के रहन-सहन से लेकर खानपान भी बदल दिया है: दहशत इतना ज्‍यादा है कि कार्यस्थल पर जाने में भी लोग सहमे हैं। शहर से लेकर गांव तक लोग भयांक्रात है: प्रध्‍ान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी के इस आश्‍वासन के बाद कि करोना अब देश में कम हुआ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि करोना पूरी तरह छोडकर चला गया है हमे चेहरे को ढकना ही होगा तथा सोशल डिस्‍टेंसिंग को भी मैटेल करना होगा: उनकी यह सलाह आने वाले उत्‍सवों और चुनाव के परिप्रेक्ष्‍य मे दी गई: इधर वैज्ञानिकों के इस दावे के बाद कि देश में अगले साल फरवरी में कोराना काबू में आ जाएगा लोगो ने राहत की सास ली है किन्‍तु विश्‍वास किसी को अब भी नहीं हो रहा चूंकि विदेशों में कई जगह कोराना दूसरा अवतार ले चुका है: अगर भारत में वैज्ञानिकों के दावे पर भरोसा किया जाये तो फरवरी 2021 कोराना के भागने का महीना होगा:देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के आकलन में दावा किया गया है कि फरवरी 2021 तक कोरोना महामारी नियंत्रण में आ जाएगी:तब तक देश में कोरोना के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या एक करोड़ छह लाख तक पहुंच चुकी होगी, लेकिन तब रोजना आने वाले नए संक्रमणों की संख्या कुछ हजारों में रह जाएगी जिसका प्रबंधन आसानी से किया जा सकेगा।: आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर की अध्यक्षता में बनी विशेषज्ञ समिति ने अभी कुछ दिन पहले अपने अध्ययन के नतीजे जारी किए प्रोफेसर विद्यासागर और आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल के अनुसार फरवरी 21 तक लक्षणों वाले संक्रमितों की संख्या 106 लाख होगी जो अभी 66 लाख के करीब है: फरवरी तक महामारी पर काबू पाने की भी उम्मीद है लेकिन यह तभी संभव होगा जब लोग कोरोना से बचाव के नियमों का पूरी तरह से पालन करना जारी रखें: अध्ययन में निष्‍कर्ष निकाला है  कि अब तक देश में 30 फीसदी आबादी कोरोना से संक्रमित हो चुकी है: आईसीएमआर के सीरो सर्वे में यह आंकड़ा सात फीसदी था लेकिन नये अध्ययन के अनुसार अगस्त अंत तक ही 14 फीसदी संक्रमित हो चुके थे:रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि लॉकडाउन नहीं किया जाता तो जून में 1.40 करोड़ सक्रिय लक्षणों वाले मामलों के साथ पीक आती: अगस्त तक 26 लाख से ज्यादा मौतें हो सकती थी: फरवरी 21 तक 2.04  करोड़ संक्रमित होते: यदि एक अप्रैल से एक मई के बीच ही लाकडाउन होता तो जून तक 40-50 लाख सक्रिय मामलों के साथ पीक आती: अगस्त आखिर तक 7-10 लाख मौतें होती: फरवरी 21 तक 1.50-1.70 करोड़ लक्षणों वाले मरीज हो जातेरिपोर्ट के अनुसार जो लाकडाउन लगाया गया उससे सितंबर में 10 लाख सक्रिय मरीजों के साथ संक्रमण पीक पर पहुंचे: सितंबर में एक लाख मौतें पहुंची और फरवरी 21 तक 1.06 करोड़ लोग लक्षणों के साथ संक्रमित होंगे: अध्ययन के अनुसार प्रवासी श्रमिकों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के फैलाव की आशंकाएं निर्मूल साबित हुई। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे लेकर विशेष रूप से अध्ययन किया गया क्योंकि इन राज्यों में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर लौटेइसकी वजह गांवों में पहुंचने से पूर्व उन्हें क्वारंटीन करना रहा: यदि लाकडाउन से पहले प्रवासी मजदूरों को गांव जाने दिया गया होता तब संक्रमण बढ़ सकता था: अगले कुछ दिनों में त्‍यैाहारों की बाढ आने वाली है लोग बेपरवाही की हदे पार कर सकते है:बिहार के चुनाव में तो यह हो ही रहा र्है: रिपोर्ट में भी कहा गया है कि त्योहारों एवं संर्दियों के चलते संक्रमण बढ़ सकता है: केरल में हालिया संक्रमण के बढ़ने की वजह ओणम पर्व को माना गया है यदि रोकथाम के उपाय ढीले किए गए तो एक महीने में 26 लाख संक्रमण बढ़ सकते हैं जिला स्तर पर या उससे बड़े लाकडाउन अब प्रभावी नहीं होंगे इसे ऐसे लाकडाउन अब नहीं लगाएं जाएं यह सुझाव सरकारो को दिया गया है:सरकार ने दावा किया है कि उसने कोरोना वायरस से निपटने के लिए विशेष रणनीति तैयार की हैजिसके तहत जिलों और राज्यों के अधिकारियों को खास निर्देश दिए गए हैं सरकार सभी संदिग्ध रोगियों के नमूनों की जांच भी करा रही हैचाहे उनमें लक्षण दिखे हों या नहीं: इसके अलावा संक्रमण की चपेट में आने वाले संदिग्धों और गंभीर श्वास संक्रमण (एसएआरआई) से जूझ रहे लोगों की भी जांच की जा रही है:अब आगे देखना यह है कि कोराना का देश निकाला फरवरी में हो जायेगा या इसके लिये और प्रतीक्षा करनी होगी?

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