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मुन्नाभाई एमबीबीएस के बाद छत्तीसगढ़ में रिलीज हुई नई फिल्म मुन्नीबाई एमए!




हिन्दी सिनेमा के नायक संजय दत्त की सुपरहिट फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के बाद अब छत्तीसगढ़ की सरज़मीं पर नक्सलगढ़ में तैयार हुई 'मुन्नीबाई एमएÓ. नई फिल्म आते ही हिट हो गई और छग में अब तक के बहुचर्चित नान घोटाला, नसबंदी कांड, पर्चा लीक कांड जैसे घोटालों को पीछे छोड़ते हुुए हिट हो गई. फिल्म ने छत्तीसगढ़ में तहलका मचा दिया, चूंकि इस फिल्म की साइड हीरोइन मुन्नीबाई परीक्षा देने के तुरन्त बाद पकड़े जाने के डर से भाग गई और फंस गई असल हीरोइन, जिनके नाम से परीक्षा दी जा रही थी वह राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री केदार कश्यप की पत्नी है. परीक्षा केन्द्र में नाम, रोल नम्बर, फोटो, पता सब कुछ उन्हीं का है लेकिन परीक्षा उनकी एवज मेंं कोई दूसरी दे रही थी. इस कांड की गंभीरता इसलिये भी है चूंकि प्रदेश की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग गया है कि ऐसा कब से और कैसे क्यों और किसकी शह पर चल रहा है? प्रदेश में मुख्यमंत्री की अपील के बाद भी  बुनियादी शिक्षा पहले से ही लडख़ड़ाई हुई है जिसकी नींव मजबूत नहीं हो पाई है. ऐसे में अब इस उच्च शिक्षा में मुन्नीबाइयों के बोलबाले ने संपूर्ण शिक्षा जगत में ही नहीं सियासत में भी खलबली पैदा कर दी है. स्कूली शिक्षा बच्चों को कैसे दी जा रही है यह भी बस्तर के उस इलाके की शिक्षा से अपने आप स्पष्ट हो रहा है जहां कोई पढ़ाई हुए बिना ही बच्चों को प्रमोट करके एक क्लास से दूसरे क्लास में भेजा जा रहा है. उच्चत्तर शिक्षा में फर्जी डिग्री और फर्जी अंकसूची छत्तीसगढ़ के लिये नई बात नहीं है, यहां यह सिलसिला रविशंकर विश्वविद्यालय के समय से चला आ रहा है. एक समय तो यह स्थिति पैदा हो गई थी कि रविशंकर विश्वविद्यालय से पढ़कर निकलने वालों के लिये नौकरी देश के दूसरे स्थानों में बंद थी- राज्य बनने के बाद ले देकर यहां कुछ सुधार हुआ ही था कि पर्चा लीक कांड और अन्य अनियमितताओं ने यहां के बेरोजगार युवाओं के लिये मुसीबत खड़ी कर दी. अब छत्तीसगढ़ में इस नई फिल्म के रिलीज होते ही संपूर्ण सियासत में खलबली मचना स्वाभाविक है- मुख्यमंत्री ने जहां संपूर्ण मामले की जांच की बात कही है वहीं प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस पर कार्रवाई की बात कही है. दिल्ली में विपक्ष जहां ललितगेट मामले को लेकर संसद की कार्रवाई नहीं चलने दे रहा है वहीं छत्तीसगढ़ में किसानों को बोनस और अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में एक नया मुद्दा मिल गया. स्कूली शिक्षा मंत्री बीते सत्र में आउट सोर्सिंग से शिक्षा सुधार की वकालत कर रहे थे तब पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने घेरा था तब मंत्री का वक्तव्य था कि क्या आप नहीं चाहते कि बस्तर क्षेत्र के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएस-आईपीएस, आईएफएस बने। हमारी सरकार सुदूरवर्तीय क्षेत्र में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था कर रही है। मंत्री जी बताएं क्या यही परीक्षा व्यवस्था अच्छी शिक्षा व्यवस्था है? क्या ऐसे ही गुणवत्तायुक्त शिक्षा की कल्पना करें हम? कुछ भी कहो- नक्सलगढ़ बस्तर अब पूरे देश में मुन्नीबाई एमए फिल्म के नाम से भी सुपरहिट हो गई है। अब इसकी रायल्टी का नफा-नुकसान सरकार और मंत्री के खाते में कितना जाता है यह यक्ष प्रश्न है. वैसे इस पूरे मामले में हम बता दें कि अगर सही ढंग से कार्रवाही हुई तो संबंधित लोगों पर छत्तीसगढ़ परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम 2008 की धारा चार (क)10 के अनुसार दोषी को एक साल की सजा व दस हजार रूपये जुर्माने का प्रावधान है जबकि आईपीसी की धारा 419 व 420 के तहत भी कार्रवाही की जा सकती है. इसमें धोखाधड़ी के दोषी को तीन साल की सजा हो सकती है।



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ऊँची दुकान फीके पक वान!
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