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हर इंसान की हेल्‍थ आईडी का लेखा जोखा एक अच्‍छी पहल!

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  हर इंसान की हेल्‍थ आईडी का लेखा जोखा एक अच्‍छी पहल ! स्‍वतंत्रता के बाद देश की   सबसे बड़ी चिंता थी कि देशवासियों का पेट कैसे भरे ? हम इस मामले में आत्‍मनिर्भर नहीं थे: विदेशो से अनाज मंगाना पडता था सूखे की मार से कई राज्‍यों में लोग दाने दाने के लिये तरसते थे::कुछ ऐसी ही स्थिति करोना के बाद इस वर्ष बनी . लाक डाउन और अन्‍य कई तरीके से इस महामारी को रोकने  के‍ लिये स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को मजबूत बनाना हमारी प्राथमिकता बनती जा रही है: चीन के साथ हमारा संबन्‍ध्‍ बिगडा हुआ है चीनी वस्‍तुओं का बहिष्‍कार कर दिया गया है तथा आयात भी बंद है ऐसे में आज हमें हर मामले में आत्‍मनिर्भर होना ही होगा: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस पर इस बात का जिक्र किया है: आज जब हम सिर्फ भारत ही नहीं , दुनिया के कई देशों का   पेट भर सकते हैं तब   आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ आयात कम करना ही नहीं , हमारी क्षमता , हमारी Creativity हमारी skills को बढ़ाना भी है . प्रधानमंत्री ने पूरे देश के लिये नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का ऐलान किया:इस योजना के तहत हर देशवासी को हेल्थ आईड...

इन पडौसियों को क्‍या हो गया? कभी घुसपैठ तो कभी नक्‍शा !

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  इन पडौसियों को क्‍या हो गया ?            कभी घुसपैठ तो कभी नक्‍शा ! हमारे पडौसी देश आखिर क्‍या जताना चाहते हैं ? यह न खुद शांति से रहते हैं और न ही दूसरों को रहने देते हैं ! कभी हमारी सीमा पर घुसपैठिये भेजते हैं तो कभी छुप - छुपकर हमले करते हैं अति तो तब हो जाती है जब यह हमारी धरती व सीमा को अपना बताकर उसपर कब्‍जा जमाने की कोशिश करते हैं: जब कोई देश अस्तित्‍व में आता है तभी उसकी सीमा उसकी सार्वभौमिकता ‍का निर्धारण हो जाता है लेकिन आज पडौसी विशेषकर चीन , पाकिस्‍तान और नेपाल ऐसा माहौल पैदा कर रहे हैं कि उसे किसी भी देश के लिये सह पाना असंभव है: सत्‍तर बहत्‍तर साल बाद भी हमारी धरती पर कब्‍जा जमाने की नापाक चाल चली जा रही है:पहले नेपाल और अब पाकिस्तान ने नया राजनीतिक नक़्शा जारी किया है जिसमें जम्मू कश्मीर-लद्दाख-जूनागढ़ और सर क्रीक को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने  मंगलवार को इस नए नक़्शे को जारी करते हुए इसे एक ऐतिहासिक दिन बताया.पाकिस्‍तान के इस कदम को भारतीय संसद में जम्मू-कश्...

थरूर की परेशानी ओर राजनीति मे जहर का घूट पीते वरिष्ठ

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थरूर की परेशानी ओर राजनीति मे जहर का घूट पीते वरिष्ठ कांग्रेस अंदर ही अंदर झुलसने लगी है: अब उसके बडे नेता नेत्रत्‍व को लेकर खुल्‍लम खुल्‍ला बेबाक हैं:सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता शशि थरूर इस मामले में सबसे आगे हैं वे कोई भी बात खुलकर कहने के लिये प्रसिद्व है: हालाकि शशि थरूर से पहले भी कई नेता इस मामले पर अपना मत जाहिर कर चुके है लेकिन इस बार उन्‍होनें पार्टी को सीधे सीधे कह दिया है कि वह जल्‍द से जल्‍द नया अध्‍यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू करें , उनके मुताबिक , अगर राहुल दोबारा अध्‍यक्ष नहीं बनना चाहते तो पार्टी आगे बढ़े: दूसरी ओर सचिन पायलट राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिलने के बाद क्‍या कांग्रेस महासचिव बनेंगें यह भी अब चर्चा का विषय है: दूसरी ओर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का मानना है कि कांग्रेस को अपनी छवि बचाने के लिए पूर्णकालिक अध्‍यक्ष चुनना ही होगा: उनका मत है कि जनता के बीच पार्टी की छवि ' दिशाहीन ' दल की हो चली है , इसे तोड़ने के लिए एक फुल-टाइम अध्‍यक्ष की जरूरत है: थरूर मानते है कि राहुल गांधी में वह ' दम और काबिलियत ' है कि वह पार...

छत्तीसगढ़ में काजू....है न आश्चर्य की बात!

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 छत्तीसगढ़ में काजू....है न आश्चर्य की बात! See this in English....as    Cashew in Chhattisgarh .... is not surprising! यह आश्चर्य और खुशी की बात है कि दक्षिण के राज्यों का एकाधिकार बने काजू का उत्पादन अब छत्तीसगढ़ में भी होने लगा है और सबसे खुशी की बात तो यह है कि इसका उत्पादन लक्ष्य से तीन गुना ज्यादा हुआ है. हमें इस बात पर गर्व करना चाहिये कि विश्व में सबसे ज्यादा पसंद करने वाला काजू आगे के समय में विश्व के लिये एक नामचीन वस्तु बन जाये तो आश्चर्य नहीं चूंकि इसके उत्पादन के चंद दिनों में इसने इतना जोर पकड़ लिया है कि आगे आने वाले वर्षो में बस्तर की तरह वातावरण वाले अन्य संभागों में भी इसका उत्पादन शुरू हो जाये तो आश्चर्य नहीं. बस्तर में काफी का उत्पादन भी शुरू हो चुका है वहीं अम्बिकापुर क्षे त्र में चाय की सफल खेती ने यह साबित कर दिया है कि इन उत्पादनो का अधिकार अब देश के किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है.प्रदेश में खाजू का उत्पादन चालू सीजन के दौरान अब तक के लक्ष्य से तीन गुना ज्यादा अर्थात पांच हजार 870 क्विंटल हो चुका है.अर्थात पांच करोड़ 87 लाख रूपये का काजू छ...

यह घिनौना खेल आखिर कब तक! बच्चियां खतरे में!

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  यह घिनौना खेल आखिर कब तक! बच्चियां खतरे में! यह इंसान नहीं राक्षस है और इनकी हैवानियत यूं कब तक चलती रहेगी- यह अपने आप  एक यक्ष प्रश्न है.सात साल तक कानूनी जंग लडऩे के बाद दिल्ली में निर्भया के माता पिता को न्याय मिला और अपराधियों को फांसी पर लटकाया गया लेकिन अपराधियो के हौसले में कोई कमी नहीं आई. निर्भया जैसी एक अन्य घटना दिल्ली में ही मंगलवार को हुई जिसने पूरे देश को चौका दिया. पीरागढ़ी पश्चिमी दिल्ली में  मंगलवार शाम को बारह साल की यह बच्ची घर में अकेली थी. दुष्कर्म के बाद कैची से गोद अधमरी हालत में छोड़कर अपराधी फरार हो गए.अस्पताल सूत्रों  के अनुसार बच्ची की हालत काफी गंभीर है.उसको आईसीयू में रखा गया है,उसके शरीर पर चोट के गहरे निशान हैं. वह बेहोश है और अगले 24 घंटे काफी महत्वपूर्ण हैं.घटना के बाद से सभी राक्षस फरार हैं. देश में कानून की सख्ती और जनता के आक्रोश के बावजूद रेप के मामले नहीं रुके. आंकड़े यही बताते हैं कि इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली कठुआ और उन्नाव गैंग रेप की घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता. सख्त कानूनों के बावजूद रेप की वारदातें कम नहीं हो रही ...

How long is this hideous game! Girls in danger

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  How long is this hideous game! Girls in danger This man is not a monster and how long will his health continue to happen - it is a question of its own. Nirbhaya's parents got justice in Delhi after a legal battle for seven years and the culprits were hanged but the culprits were encouraged There was no shortage. Another incident like Nirbhaya happened in Delhi itself on Tuesday which shocked the whole country. This twelve-year-old girl was alone at home in Piragadhi West Delhi on Tuesday evening. After the rape, the culprits escaped leaving Kaichi in an unhappy condition. According to hospital sources, the condition of the girl is very serious. She is kept in ICU, she has deep marks on her body. He is unconscious and the next 24 hours are very important. All the demons are absconding since the incident. Despite the strictness of the law in the country and public outrage, the rape cases did not stop. Statistics show that the incidents of Kathua and Unnao gang rape which have shame...

रायपुर का सबसे बड़ा प्रायवेट अस्पताल एमएमआई विवादों में

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रायपुर का सबसे बड़ा प्रायवेट अस्पताल एमएमआई विवादों में ट्रस्टी कोर्ट का आदेश लेकर पहुंचे, ताले टूटे, विवाद गर्माया चेनल ने कहा-यह डकै ती! Raipur's largest private hospital in MMI disputes Trustees reached court order, locks broken, Dispute caused controversy, Chenal said - this robbery! .छत्तीसगढ़ में सन् 1995 के दशक में स्थापित सबसे बड़ा निजी अस्पताल एमएमआई इन दिनों विवादों में है. विवाद का प्रमुख कारण अस्पताल की सत्ता पाने दो प्रबंधनो के बीच का झगड़ा है. अस्पताल का भूमिपूजन 1989 में  तत्कालीन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा ने किया था.1995 में यह बनकर तैयार हो गया. 23 अक्टूबर 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस अस्पताल का लोकार्पण किया. लोकार्पण के कुछ ही समय बाद ही अस्पताल प्रबंधन ट्रस्टियो के बीच कई मुद्दों को लेकर विवाद शुरू हो गया. विवाद का नतीजा यह हुआ कि  प्रबंधन दो भागों में बंट गया. अब प्रबंधन महेन्द्र धाड़ीवाल, रेखचंद लूनिया सहित आठ लोगो से निकलकर यह  सुरेश गोयल और अन्य साथियों के पास आ गया. पहले सरकारी स्तर पर विवाद को निपटाने का प्रयास ...

सुशांत की मौत सुसाइड या हत्या?,क्या पूर्व में हुई एक्टरों की मौत का राज भी खुलेगा?

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सुशांत की मौत सुसाइड या हत्या?, क्या पूर्व में हुई एक्टरों की मौत का राज भी खुलेगा? फैंस को रुलाने वाले  बॉलीवुड  अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत पहले व्यक्ति नहीं है जिन्होंने कथित खुदकुशी का रास्ता अपनाया.बॉलीवुड की चकाचौंध ऐसी नहीं है जिसमें हर कोई खुश ही रहता है. सुशांत युवाओं की पसंद थे और उनकी पहचान एक जिंदादिल व्यक्तियों में की जाती थी. कुछ वक्त पहले उनकी फिल्म छिछोरे में उन्होंने एक ऐसे पिता का किरदार निभाया था जिसका बेटा आत्महत्या कर लेता है लेकिन खुद उनके द्वारा असल जिंदगी में ये कदम उठाना किसी को भी रास नहीं आया.सुशांत की तरह हर वर्ष लाखों लोग इस तरह का रास्ता अख्तियार करते हैं लेकिन इन सुसाइडस के कारण भी अलग -अलग हैं.अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मौत की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या कोर्ट की निगरानी में गठित एसआईटी से कराने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर हुई है.यह दिल्ली की एनजीओ लेट्स टॉक की प्रमुख कंचन राय की ओर से भेजी गई है. याचिका में आरुषि तलवार जैसी कई आपराधिक घटनाओं के हवाले दिये गये हैं और सुशांत की कथित आत्महत्या और रिया चक्रवर्ती की भूमिका को सवा...

अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!

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अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!    Nature's havoc on food providers! { See full story in English and Malyalam} पहले लोन से परेशान अब कृषक प्रकृति की मार से बेबस हैं.इस बार हमारे लिये अनाज पैदा करने वालों दो तरफा या कहे तितरफा मार पड़ी है. लाकडाउन,  टिड्डी  दल फिर बाढ़.किसान कुदरत की इस मार को झेल ही रहे हैं कोई ठोस समाधान भी इस बारे में नहीं निकल रहा. आगे चलकर हर आम आदमी को किसानों के साथ इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा . तितरफा हमले से  देश  में उत्पादित होने वाले अन्न के प्रतिशत में कमी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.कोरोना और बाढ़ के बीच एक अप्रत्याशित हवाई हमला हुआ टिड्डी दल का! जिसने रही सही कसर भी पूरी कर दी. भारत-पाकिस्तान सीमा पर राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से प्राय: हर साल टिड्डियों का दल  भारत  में पहुंचता है लेकिन इस बार तो अति ही कर दी. एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 80 टिड्डी दलो ने भारत में प्रवेश कर देश के कई राज्यों में लाखों हैक्टेयर जमीन पर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया.ऐसा पहली बार हुआ जब पाकिस्तान से एक साथ 8 टिड्डी दल ...