छत्तीसगढ़ में तेजी से फैल रहा लेबर 'फलू
निर्माण कार्य में लगे एक ठेकेदार को उस दिन काफी गुस्से में देखा गया, पता चला कि रात में उसके बंधक बनाये मजदूरों में से कुछने भागने का प्रयास किया. कुछ तो पकड़ लिये गये, कुछ भागने में सफल हुए. इस संपूर्ण मामले पर से जब पर्दा हटा तो पता चला कि ठेकेदार बंगाल से गरीब परिवार के लड़कों को बर्गलाकर छत्तीसगढ़ में लाते हैं और उनसे यहां सस्ते में काम कराते हैं. मजदूरों को उनका पैसा उनके घर पर ही एक मुश्त राशि के रूप में दे दिया जाता है,जो, करीब पांच छै हजार रूपये होता है,फिर चाहे उनसे जितनी भी देर, सुबह नौ बजे से लेकर देर रात दस बजे तक भी हो काम कराओ. यह धंधा अकेले बंगाल के गरीब परिवार के युवकों के साथ ही नहीं हो रहा बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीबों के साथ भी हो रहा है. छत्तीिसगढ़ में तेजी से फैल रही इस रोजगार बीमारी- जिसे लेबर फलू का नाम दिया है, के कारण छत्तीसगढ़ के प्राय: घरों से यह आवाज सुनने को मिल रही है कि 'लेबर नहीं मिल रहे, काम रूका पड़ा है...Óचूंकि सारा काम ठेके पर चल रहा है. बंगाल, बिहार,उडीसा और उत्तर प्रदेश के मजदूरों के साथ छत्तीसगढ़ के मजदूरों को भी देकेदार उसी रेट पर खरीद ले...