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सरोना स्टेशन का वर्षों पुराना सपना अब साकार होगा! ट्रेनों में सुरक्षा पर भी प्रश्न चिन्ह



अगर रेलवे अपनी योजना के अनुरूप आगे बढ़ा तो भोपाल के हबीबगंज और दिल्ली में निजामुद्दीन की तरह रायपुर के सरोना में भी एक स्टेशन शीघ्र ही अस्तित्व में आयेगा जो न केवल रायपुर के सबसे पुराने स्टेशन में भीड़ कम करेगा बल्कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत भी देगा. ऐसे स्टेशन देश के कई बड़े नगरों में हैं जहां इस सुविधा के होने से आधी से ज्यादा भीड़ छंट जाती है. सरोना को स्टेशन बनाने की पहल इस बार सांसद रमेश बैस की तरफ से शुरू हुई है और रेलवे ने अपने कदम आगे बढ़ा भी दिया है. इससे एक बात तो साफ है कि योजना पर अमल भी जल्द होगा. रमेश बैस अच्छी तरह जानते हैं कि रायपुर पश्चिम में रेलवे स्टेशन की मांग बहुत पुरानी है तथा इसके स्थापना की पहल भी इस क्षेत्र के लोगों की आशाओं के अनुरूप है. जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश से जुड़ा हुआ था तब इस क्षेत्र के लोगों ने यहां स्टेशन बनाने के लिये आंदोलन छेड़ा था. पूर्व में रेलवे ने सरोना को पूर्णत: विकसित करने की जगह सरस्वतीनगर को विकसित किया- जिसकी अब कोई उपयोगिता नहीं रह गई क्योंकि यहां एनआईटी की बड़ी-बड़ी दीवार ने स्टेशन के लिये रास्ता ही नहीं छोड़ा. सरोना रायपुर का नया और बड़ा स्टेशन बनेगा यह लगभग तय है, इसके लिये सरोना में पर्याप्त भूमि है. एम्स बनने के बाद यह बाहर से पहुंचने वाले रोगियों के लिये भी एक अनिवार्यता बन  गई है. आसपास शैक्षणिक संस्थानों के अलावा रिहाइशी कालोनियों के परिप्रेक्ष्य में भी इस स्टेशन का अपना महत्व होगा. सरोना रेलवे स्टेशन जीई रोड और दोनों तरफ की रिंग रोड से लगा हुआ होने के कारण यहां स्टेशन तक चार या छह लाइन की अच्छी चौड़ी सड़क निकल जाये तो यह वर्तमान रायपुर स्टेशन से भी बड़ा और लोगों की प्राथमिकता वाला स्टेशन बन सकता है. रेलवे व जनप्रतिनिधियों की तरफ से सरोना में नया स्टेशन विकसित करने की पहल का हर तरफ से स्वागत है किन्तु यह भी सही है कि इसे बनाने में अब और देरी नहीं करनी चाहिये. रेलवे से जुड़ी एक अन्य खबर ने भी आज सनसनी  पैदा कर दी है जिसमें कहा गया है कि भगत की कोठी एक्सप्रेस के एसी कोच में जयपुर से रायपुर कोण्डागांव आ रहे एक परिवार की बहू का पर्स किसी ने गायब कर दिया. इस पर्स में नब्बे हजार रुपये नगद और दस लाख रुपये के गहने थे. ट्रेनों में लूट और चोरी की ऐसी कई घटनाओं के बीच लोगों की इस ढंग की लापरवाही भी चर्चा का विषय है कि इतनी रकम को ट्रेन में रखकर लोग घोड़ा बेचकर सोने की तरह  कैसे सो जाते हैं किन्तु यह भी सवाल है कि रेलवे भारी किराया वसूल करने के बाद भी अपने यात्रियों को सुरक्षा क्यों नहीं दे पा रहा?

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