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जून शुरू हुआ- बुरी खबर लेकर- सेस लागू,सर्विस टैक्स फिर बढ़ा



आम आदमी की जुबान पर आजकल देश के आर्थिक हालात पर सवाल है-देश का बजट मार्च में बनता है और इसमें जो बढौत्तरी घटोत्री होती है वह उसमें दर्शा दिया जाता है लेकिन इन्हे लागू करने के लिये कम से कम एक दो महीने का इंतजार होता है इस दौरान कीमतो में इतना इजाफा हो जाता है कि एक आम आदमी की कमर टूट जाती है वह चाहे यात्रा के मामले में हो या रसोई के मामले में  अथवा ड्राइंग रूम में रखे टेलीफोन के मामले में सभी का किराया, भाड़ा या टैक्स इतना बढ़ा दिया जाता है कि आदमी का मानसिक हालात बिगडऩे  लगता हैं.  रेलवे व आम बजट की घोषणा के बाद से अब तक प्राय: हर वस्तुओं के भावो में भारी इजाफा हुआ है. वेट -सर्विस टैक्स के नाम पर इतनी  बढौत्तरी शुरू के दौरान की गई कि लोग सामान लेने में डरने लगे चूंकि उनकी कमाई का आधा हिस्सा तो इसी में निकल जाता है. लोग यात्रा करने में भी डरने लगे कि इससे उनके रहन सहन का मासिक बजट बिगड़ जायेगा. सरकार ने सुविधाएं बढ़ाने के नाम पर रेल किरायें में बढौत्तरी पीछे के दरवाजे से कर दी. सुविधाएं...जिसके नाम पर मंहगाई बढ़ाई जा रही है,का कोई अता पता नहीं लोग वैसे ही लटककर सफर कर रहे हैं छतो पर यात्रा हो रही है.महिलाएं पूर्णत: असुरक्षित है, लोग अपनी रक्षा स्वंय करों के आधार पर ट्रेन में घक्के खाते हुए चढ़ रहे हैं. ट्रेन का खाना जहां घटिया है वहीं ट्रेनों में आज भी चूहे दौड़ रहे है. यह तो ट्रेन और बसों का हाल है जिसमें कोई प्रचारी सुधार के अलावा कोई जमीनी सुधार नहीं दिख रहा वहीं बाजार  का हाल सबसे बुरा है जहां रसोई की हर वस्तु मंहगी है रोटी से लेकर दाल, सब्जी और अन्य सभी वस्तुए भारी मंहगाई के दौर से लोगों को सुलभ हो रही है. बचपन से एक कहावत सुनते आए हैं- दो जून की रोटी मिल जाए, यही बहुत है. दो जून अर्थात सुबह-शाम की रोटी लेकिन आज एक जून से हमारी यही 2 जून की रोटी महंगी हो गई है. आज से सभी सेवाओं पर आधा फीसदी कृषि कल्याण सेस लागू हो गया,इससे सर्विस टैक्स अर्थात सेवा कर 14.5प्रतिशत से बढ़कर 15प्रतिशत हो गया. आम उपभोक्ता वस्तुओं- मोबाइल, डीटीएच, बिजली, पानी आदि का यूटिलिटी बिल, रेस्टॉरेंट में खाना, रेल-हवाई टिकट, बैंकिंग, बीमा आदि सेवाएं फिर महंगी हो जाएगी.ऐसा लगता है कि मंहगाई हमारा छाया की तरह पीछा कर रही है.नई सरकार से मंहगाई पर लगाम कसने की जितनी उम्मीद की गई थी वह अब लोगो को कचोटने लगा है.मोदी सरकार ने बजट के दौरान 0.50प्रतिशत कृषि कल्याण सेस लाने का ऐलान किया था,इसके जरिए वो कृषि और किसानों की स्कीम्स के लिए 5 हजार करोड़ रुपए जुटाना चाहती है कई लोगों की  जेब हल्की कर निकलने से किसानों का कितना भला होगा?और आम आदमी इसके बीच कितना पिसेगा यह भी एक  प्रश्न बन गया है.सरकार के इस कदम से शादी-ब्याह महंगे होंगे. बैंक ड्राफ्ट, फंड ट्रांसफर, एसएमएस अलर्ट, फिल्म देखना, पॉर्लर सर्विस, स्पा, सैलून जैसी सेवाएं महंगी हो जाएंगी। सर्विस टैक्स के 18 प्रतिशत  तक बढने की संभावना व्यक्त की गई है.- सर्विस टैक्स किस तेजी से बढा है इसका अदंाज इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 1 साल के दौरान इसमें 2.64प्रतिशत तक का इजाफा हुआ. 1 साल में तमाम सेस से 1.16 लाख करोड़ रुपए कमाइ जहां सरकार कर रही है वहीं सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल में घट बढ़ का फायदा भी अपने खाते में कर जनता को कोईफायदा नहीं दिया. पिछले साल जनता को देने वाले  पेट्रोल-डीजल का पेसा जो करीब 21,054 करोड़ रूपये होता है उसमेें से एक पैसा भी जनता को राहत के तौर पर नहीं दिया उसे सरकार ने अपने खजाने में डाल दिया जबकि सरकार के लोगों ने अपने रहन सहन और अपव्यय के तरीके में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया. अब पेट्रोल-डीजल में बढौत्तरी का भी सिलसिला शुरू हो गया.एक दो महीने के भीतर ही दो बढौत्तरी हो चुकी है. आगे आने वाले समय में इसमें और बढौत्तरी हो जाये तो आश्च्रर्य नहीं करना चाहिये. वास्तविकता यह है कि आम आदमी पर सालाना 25प्रतिशत  की दर से सर्विस टैक्स में बढौत्तरी हो रही है. एक जून से 10 लाख से ज्यादा की कार पर एक प्रतिशत लग्जरी टैक्स लग जायेगा. कैश खरीदी पर एक प्रतिशत  टीसीएस एक जून से दो लाख से अधिक कीमत का माल या सेवा की नकद खरीद पर संबंधित व्यापारी आपसे बिल अमाउंट पर एक प्रतिशत टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) जमा करवाएगा।




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