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एक बड़ी आबादी वेश्यावृत्ति, भीख मांगने, बंधुआ मजदूरी करने मजबूर!


यह एक दुर्भाग्यजनक स्थिति है कि एक अरब  तीस करोड़ की आबादी वाली हमारी इस धरती में करीब एक करोड़ तिरासी लाख पचास हजार लोग बंधुआ मजदूरी, वेश्यावृत्ति, भीख जैसी आधुनिक गुलामी के शिकंजे में बुरी तरह जकड़े हुए हैं- दुनिया में आधुनिक गुलामी से पीडितों के मामले में हमारा देश सबसे आगे हैं.सरकार का  ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर होने के बावजूद इस समस्या का लगतार उग्र रूप  धारण करना सामाजिक सोच रखने वालों को चिंता में डाल देता है.देश में चुनाव के दौरान कुछ लोगों को यह जरूर याद आ जाते हैं लेकिन चुनाव के बाद इन्हें कोई नहीं पूछता जबकि अगले चुनाव तक यह संख्या और बढ़़ती जाती है.पूरी दुनिया  में ऐसे गुलामों की तादाद तकरीबन चार करोड़ 60 लाख है दूसरी  ओर भारत दुनिया के 10 दौलतमंद देशों की लिस्ट में तो है किन्तु औसत भारतीय काफी गरीब है.धनाढृय व्यक्ति कुल 5,200 अरब डालर की संपत्ति अपने पास समेटे हुए हैं-भारत की गिनती दुनिया के 10 सर्वाधिक धनवान देशों में होती है मगर इसकी एक वजह यहां की बड़ी आबादी का होना भी है.प्रति व्यक्ति आधार पर औसत भारतीय 'काफी गरीबÓ है.  विश्रेषण करने से कई महत्वपूर्ण बाते सामने आती हैं-धनाढ़ृयता के मामले में भारत सातवें पायदान पर है तो अमरीका को पहला दर्जा हासिल है.सर्र्वाधिक चौका देने वाली रिपोर्ट वाक फ्री फाउण्डेशन की है जिसमें कहा गया है कि भारत की एक अरब 30 करोड़ की आबादी में से एक करोड़ 83 लाख 50 हजार लोग गुलामी में जकड़े हैं. उत्तर कोरिया में इसकी व्यापकता सबसे ज्यादा है. आधुनिक गुलामी सभी 167 देशों में पाई गई है, इसमें शीर्ष पांच देश एशिया के हैं। भारत इसमें शीर्ष पर है. देश को आजाद हुए अडसठ साल से ज्यादा का समय हो गया लेकिन इस गंभीर समस्या को  सरकार  व नेताओं ने कभी गंंभीरता से नहीं लिया शायद इसीलिये गरीबी व अपराध का आधुनिक रूप लगातार बढ़ता जा रहा है. एक विस्फोटक स्थिति निर्मित  हो रही  है जिसके निदान के  लिये सभी तरफ से उसी प्रकार प्रयास करने की जरूरत है जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता सम्हालने के बाद देश में शौचालय और स्वच्छता के लिये व्यापक अभियान चलाया. देश को वैश्यावृत्ति और अन्य गरीबी जन्य रोग से मुक्त करने के लिये व्यापक रूप से कदम उठाने की जरूरत है.देश के धनाढ्यों से सरकार इस समस्या के हल में कितनी मदद ले सकता है इसपर भी विचार किया जाना चाहिये-इसमें यह भी संभव है कि अति घनाढय़ों लोगों के जिम्मे प्रति हजारों में कुछ को गोद लेकर उनके जीवन में सुधार हेतु प्रयास कराया जाये. आधुनिक गुलामी में शोषण के उन हालातों को रखा गया है जिसमेें धमकी, हिंसा, जोर-जबरदस्ती, ताकत का दुरूपयोग या छल-कपट के चलते लोग नहीं निकल सकते हैं . देशव्यापी अभियान  इस सिलसिले में चलाने की जरूरत है ताकि ऐसे लोगों को गुलामी कराने वालों के चंगुल से निकाला जा सके इसमें स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन मानवाधिकार में लगे लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.पूरे मामले को मानवीयता के नजरिये से देखने की जरूरत है.हालाकि फौरी तौर पर देखने से समस्या का कोई समाधान नहीं निकला है शायद यही कारण है कि आंकड़े में हम विश्व में सबसे ज्यादा गुलाम है किन्तु अगर सरकारी तौर पर इस समस्या को हल करने सरकार द्वारा कदम उठाये जाने की बात करें तो उसने इस समस्या से निबटने के लिए उपाय करने की दिशा में खासी तरक्की की है।  '' मानव तस्करी, गुलामी, बंधुआ मजदूरी, बाल वेश्यावृत्ति और जबरन शादी को अपराध घोषित किया जा  चुका  है. भारत सरकार बार बार अपराध करने वालों को ज्यादा कठोर सजा के प्रावधान के साथ अभी मानव तस्करी के खिलाफ कानून कड़ा कर रही है. यह पीडितों को सुरक्षा और बहाली समर्थन की पेशकश करेगी इसमें कहा गया है कि आर्थिक तरक्की के साथ भारत में श्रम संबंधों से लेकर ज्यादा जोखिम वाले लोगों के लिए सामाजिक बीमा की प्रणाली तक कानूनी और सामाजिक सुधार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम किए जा रहे हैं.असल में  गुलामी पर प्रतिबंध लगाने के लिए कठोर कानून बनाने की जरूरत  है. गुलामी खत्म करना नैतिक, राजनीतिक, तार्किक और आर्थिक रूप से मायने रखता है।


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