सोमवार, 2 नवंबर 2015

असहिष्णुता क्यों सर चढ़कर बोल रही है! क्यों अचानक ऐसे हालात पैदा हुए?



अंग्रेजी के शब्द इनटोलेरेन्ट को हिन्दी में कहते हैं असहिष्णु अर्थात असहनशीनता या न बर्दाश्त करने वाला.यह नेताओं के साथ साथ उन सैकड़ों लोगों की जुबान पर भी है जो देश में असहिष्णुता के कारण गुस्से में हैं इनमे कलाकार भी हैं,इतिहासवेत्ता भी है समाजसेवी भी, वैज्ञानिक भी और फिल्मकार भी और आगे आने वाले समय में और भी कई लोग जुड जाये तो आश्चर्य नहीं. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?अगर साफ तौर पर आम आदमी की भाषा में कहेे तो यह सब कुछ पैदा हो रहा है कुछ लोगों की असहिष्णुता के कारण- वैसे इसके कई उदाहरण है कि न्तु जब जनप्रतिनिधियों व ब्यूरोक्रेटस में सहिष्णुता नहीं रह जाती तो इसका व्यापक असर समाज पर होता है एक उदाहरण से स्पष्ट है-मध्यप्रदेश की एक मंत्री है कुसुम मेहदले, वे प्रदेश में समाज कल्याण व बाल विकास विभाग सम्भालती है-स्वाभाविक है विभाग के अनुरूप उन्हें संवेधनशील व पोलाइट होना चाहिये लेकिन वे क्या संवैधनशील अथवा पोलाइट हैं? नहीं, चूंकि उन्होनें सड़क पर भीख मांगते बच्चे को अपने समीप पाकर उसे लात मारकर दूर कर दिया.उसका कसूर बस इतना था कि उसने कहा दीदी मुझे एक रूपया दे दो. वह तो भड़की उनके सुरक्षा जवानों ने भी उसे धक्के मारकर अलग कर दिया. दूसरा एक ब्यूरोक्रेट का है जिसे एक महिला से उसकी बात न सुनने व अभद्र व्यवहार के कारण स्थानान्तर कर दिया. ऐसे लोगो को तो एक मिनिट भी पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है बहरहाल देशभर में इनटोलेरेंट की घटनाओं की बाढ़ ने सभी को सोचने के लिये विवश कर दिया है कि इसका क्या सोल्यूशन निकाला जाये? बिहार चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की जुबान पर भी असहिष्णुता की बात आ गई लेकिन इसके निदान पर कोई टिप्पणी नहीं हुई.बिहार चुनाव के दौरान तो नेताओं ने सारी हदे पार कर दी. असहिष्णुता अब देश में सर चढ़कर बहने लगी है.लोग समझने भी लगे हैं कि यह सब राजनीतिक स्वार्थ सिद्वी का प्रयास हैं.कर्नाटक के कलबुर्गी ओर दो तीन ऐसे लोगों की हत्या हुई तथा उत्तर प्रदेश में गाय का मांस खाने के अफवाह पर  एक व्यक्ति की पीटपीटकर हत्या करदी गई. एक दलित परिवार को जिदंा जलाकर मारने की कोशिश की गई -इस मामले में परिवार के दोनों बच्चे जिंदा जल मरें.महिलाओं से पशुता से भी बदतर व्यवहार असहिष्णुता की ऐसी मिसाले पूरे देश में है इसके चलते देश के लेखक साहित्यकार, इतिहासकार, वैज्ञानिक पहले सामने आये उन्होंने विरोधस्वरूप जहां अपने एवार्ड वापस किये वहीं कतिपय लोग इसकी तैयारी में है यह सब सरकार को सही रास्ते पर लाने का है ताकि वह लोगों के प्रति सहिष्णु बने- इस कड़ी में अब प्रसिद्व फिल्म अभिनेता शाहरूख खान भी सामने आ गये हैं उन्होंने भी अपने पुरस्कार वापस देने की बात कह दी है.देश की एकता, संप्रभुता बनाये रखने के लिये यह जरूरी है कि सहिष्णुता बनाये रखा जाये. इसे खत्म करने की कोई भी कौशिश देश को नुकसान ही पहुंचायेगी जो किसी भी राष्ट्रवादी को पसंद नहीं.