पैसा कमाने की होड़ में इंसानियत को भी त्यागने लगे कुछ सेवक(?)



पैसा -पैसा और पैसा !इसने इंसान में इतना लालच पैदा कर दिया है कि इसके आगे उसे न दया दिखाई देती है न इंसानियत, जिसके पास है वह कुछ भी कर सकता है कि स्थिति में है और जिसके पास नहीं वह हर ऐसे लोगों के पास बेबस और बेसहारा है, उसके सामने इस मुसीबत से निपटने का सिर्फ एक ही रास्ता दिखाई देता है स्वंय को खत्म कर देना- राजधानी रायपुर से कुछ ही दूर भिलाई और न्यायधानी बिलासपुर से कुछ ही दूर बिल्हा में हुई दो घटनाएं समाज की आंखे खोल देने के लिये काफी है. बिल्हा में एक युवक राजेन्द्र तिवारी को प्राण से इसलिये हाथ धोना पड़ा चूंकि उसके पास एसडीएम द्वारा प्रतिबंधात्मक धारा में जमानत के लिये मांगे गये चालीस हजार रूपये की रिश्वत में देने के लिये पैसा नहीं था. इसका विकल्प उसने उनके दफतर के सामने ही अपने आपको आग के हवाले करने का चुना. दो रोज रायपुर के अस्पताल में इलाज होता रहा और अंतत: उसकी मौत हो गई. इस घटना से जनता का आक्रोश फूटना स्वाभाविक है. एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार रोकने के दावे करती है वहीं भ्रष्ट अफसर इतना मांगते हैं कि लोगों के सामने आत्महत्या करने तक की नौबत आ जाती है. सरकार की नौकरी में बैठे बहुत कम ही लोग है जो आम आदमी से दया या पे्रम का व्यवहार करते हैं.सरकारी सेवकों का एक वर्ग  पद, पैसा अहम और घमंड में इतना चूर हो गया है कि सामने वाला चाहे कोई भी हो उसके सामने वह बौना हो जाता है.इधर खाखी और सफे द वर्दी पहनने वालों ने तो कहर ही ढा दिया हैं. उनमें एक बात यह घर कर गई है कि सारी व्यवस्था उन्हीं के बल पर चल रही है-भिलाई में कल जो कुछ हुआ वह खाखी व सफेद वर्दीधारियों के अहम और पैसा कमाने की लालसा को प्रदर्शित करता

है. सड़क पर पुलिस- याने हर चलने वाले के लिये ठीक ऐसा हो गया जैसे कोई चंदा मांगने खड़ा हो. या कोई उधारी या हफता वसूल कर रहा हो. काननू का पालन करने वाला प्राय: हर व्यक्ति जब सड़क पर गाड़ी लेकर निकलता है तो वह अपने सारे कागजात साथ लेकर चलता है बहुत से ऐसे भी हैं जो कागजात मुडऩे या रेखे रखे खराब होने के कारण उसे घर में रखते हैं इसका मतलब यह नहीं कि वह कानून का पालन नहीं कर रहा. पुलिस हजार में एक दो ऐसे लोगों को पकडऩे के नाम पर हर आने जाने वाले व्यक्ति के कागजातों की जांच करें यह कौन सी प्रक्रिया है?कोई कितने भी जरूरी काम से जा रहा हो उन्हें उससे कोई मतलब नहीं. भिलाई में पुलिस की चालानी कार्रवाई के चलते सदमें में आए एक बीमार व्यक्ति भागीरथी कुशवाहा (55) ने बीच सड़क पर ही दम तोड़ दिया. आरोप है कि गाड़ी में कागजात नहीं होने पर उसके बेटे से पांच सौ रूपये मांगे थे, इस सदमें में उस व्यक्ति ने सड़क पर ही दम तोड़ दिया. बेटा उसे एम्स में हार्ट का चेकअप कराकर वापस आ रहा था.खाखी और सरकार के कुछ सेवक (?) कब सुधरेंगे यह एक यक्षप्रश्न है.

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