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November, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फिजूल खर्ची,अव्यवस्था बन रही लोकतंत्र में अडंग़ा, कौन ले संज्ञान?

समाज को बांटे रखने में भी मास्टरी हासिल कर ली सरकारों ने!

'मृगतृष्णा बन गई मंहगाई-हम पागलों की तरह भाग रहे हैं उसके पीछे...

आंतकवाद, जातिवाद की बराबरी में आ खडा हुआ भ्रष्टाचार!

राष्ट्र का पौने दो लाख करोड़ रूपये डकार लिया, फिर भी तना है सीना!

हावडा-मुम्बई मेल को समय पर चलाने सोर्स स्टेशन नहीं बदलने की जिद क्यों?

खूब चिल्लाओं बाबाजी... भ्रष्टाचारियों पर नहीं पडऩे वाला कोई असर...!

खाकी के वेश में यह दूसरे गृह के प्राणी धरती पर क्या कर रहे हैं?

ऑपरेशन क्लीन शुरू करों फिर देखों, लाखों रोजगार पा जायेगें

मंशा नहीं ,फिर भी अपराध,ऐसी भी है कानून में कुछ खामियां!

चिथड़े कपड़ों में लिपटे नन्हें हाथों की बुझे बारूद के ढेर में खुशियों की खोज

बीते रे दिन!