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रेलवे में रिकार्ड अपराध.....और अब स्पर्म के लुटेरे भी!




यह रेलवे में पनप रहे एक नए अपराध की कहानी है जो एक ऐसे गिरोह द्वारा संचालित है जो पैसा कमाने के लिये कुछ भी करने को तैयार हैं गिरोह ट्रेनों में सफर करने वाले युवकों सेजबर्दस्तीकर उनके स्पर्म निकालकर बेचने का धंधा करता हैं हालाकि इस मामले की पूर्ण सत्यता सामने नहीं आई है  लेकिन एक पीडि़त ने देश के एक प्रमुख अंग्रेजी-हिन्दी चैनल में अपनी आप बीती पोस्ट करने के बाद इस गिरोह का रहस्योद्घाटन किया है. वेबसाइट में छपी खबर के अनुसार 2 अगस्त 2016 को विशाखापटनम से पटना के लिये एर्नाकलम एक्सप्रेस से रवाना हुए इस शख्स को रात गिरोह के दो सदस्यों ने उसके बर्थ में ही पिस्तौल की नौक पर स्पर्म निकालकर एक पोलीथीन में डालकर चलते बने.उस व्यक्ति ने पहले तो यह बात किसी को नहीं बताई लेकिन बाद में उसने न केवल पूरे कम्पार्टमेंंट को बताया बल्कि एसएमएस के जरिये भी उसने लोगों को सावधान किया है.युवक ने जो एसएमएस भेजा है उसे ज्यों का त्यों चैनल ने अपने वेबसाइट में डाला है ताकि अगर कोई अन्य ऐसा पीडित है तो उसे भी यह बताना चाहिये. पुलिस को भी चाहिये कि वह इसकी सच्चाई का पता लगाये और इस किस्म के अपराधियों को अपने जाल में फांसना एक चुनौती के रूप मेें स्वीकार करें. इस युवक की बात में कितनी सच्चाई है यह पुलिस के अन्वेषण का विषय है किन्तु ऐसा हो रहा है तो भारत की ट्रेन में इस तरह के अपराध का बिल्कुल नया ट्रेंड है, वैसे जापान में ट्रेन में सेक्स अटैक का मामला सामने आया था, इस मामले में अप्रैल 2015 में तेत्सुआ फुकदा नाम के एक अधेड़ की गिरफ्तारी हुई थी उसने 2011 से करीब सौ बार सेक्स अटैक किया था वह ट्रेनों में मुसाफिरों पर स्पर्म छिड़कता था पकड़े जाने पर उसने बताया कि उसे ऐसा करने में मजा आता था, उसकी गिरफ्तारी एक स्कूली लड़की की स्कर्ट पर गिरे स्पर्म के छीटों की डीएनए सैंपल जांच के आधार पर हुई थी. बहरहाल सुरेश प्रभ़ की ट्रेनें इस समय अपराध से लबालब हैं पिछले दो सालों में टे्रनों और स्टेशनों दोनों जगह अपराधों की संख्या में भारी वृद्वि हुई है. यह उनका मंत्रालय खुद कह रहा है.आंकडे बताते हें कि 2014 में ट्रेनों में 13,813 अपराध हुए थे. यह संख्या 2015 में बढ़कर 17,726 हो गई. 2014 में रेल परिसरों में 8,085 अपराध हुए और 2015 में यह संख्या बढ़कर 9,650 हो गई जबकि रेल मंत्रालय ने अपराध रोकने हेतु भी कोई कमी नहीं की है देश भर के 202 संवेदनशील स्टेशनों पर निगरानी तंत्र सीसीटीवी, अभिगमन नियंत्रण और तोडफ़ोड़ विरोधी जांच से जुड़ी एकीकृत सुरक्षा प्रणाली को मंजूरी दी गई है.विभिन्न स्टेशनों में 5367 सीसीटीवी तथा हर दिन दो हजार तीन सौ ट्रेनों में आरपीएफ ओर 2200ट्रेनों में जीआरपीएफ के जवान तैनात रहते हें फिर  भी अपराध कैसे बढ़ रहे हैं यह यक्ष प्रशन है. इस साल आठ महीने में अकेले छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में चोरी की 298 घटनाएं हो चुकी हैं. पिछले साल की तुलना में सौ से ज्यादा चोरियां अब तक हो चुकी हैं. इसमें भी सबसे ज्यादा घटनाएं रात के समय एसी बोगी में हुई हैं.इसके बाद भी जीआरपी और आरपीएफ के जवानों को रात के समय एसी बोगी के अंदर नहीं जाने दिया जाता चोरों का आसान लक्ष्य एसी बोगी में सफर करने वाली अकेली महिलाएं होती हैं.जीआरपी नियमों की बाध्यता बताकर मजबूरी गिना रही है.13फरवरी को हावड़ा-मुंबई मेल, अमरकंटक एक्सप्रेस और सारनाथ एक्सप्रेस की चार एसी बोगियों में करीब एक करोड़ की चोरी हो गई. इसमें एक ही गैंग के लोगों के शामिल होने की आशंका जताई गई थी. रेलवे में अपराध की ताजा घटना  इस बुधवार की है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया जब कानपुर स्टेशन के पास हथियारबंद लुटेरों ने तड़के दो सुपरफास्ट और एक पैसेंजर ट्रेन में लूटपाट की और विरोध करने पर यात्रियों के साथ मारपीट की जिससे कई लोग घायल हो गये. हथियारों से लैस बदमाशों ने पहले लखनऊ से मुंबई जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस में लूटपाट की. इसके बाद बदमाशों ने वहां से गुजर रही वैशाली एक्सप्रेस के यात्रियों के साथ लूटपाट की बाद में लखनउ कानपुर पैसेंजर ट्रेन में भी लूटपाट की. कुछ  घटनाओ के पीछे पुलिस से मिली भगत से भी इंंकार नहीं  किया जा सकता वरना हथियारबंद पुलिस के होते किसी की इतनी हिम्मत कैसे हो सकती है कि वह यात्रियों के साथ मारपीट व लूटपाट को एक साथ अंजाम दे सके. जो खबरे आ रही है उसके अनुसार  बदमाश लूटपाट करने के बाद भागने में कामयाब रहे चूंकि यह घटना उन्नाव और कानपुर जिलों के बीच हुई तो पहले तो दोनो जिलों की जीआरपी पुलिस सीमा विवाद में ही उलझ पड़ी.













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ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …