शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

भिलाई के नेवई में यह कैसा विश्वास?





हममे एक बहुत बुरी आदत है या कहे हमारा स्वभाव ही कुछ ऐसा हो गया है कि हम किसी पर भी बहुत जल्द विश्वास कर लेते हैं और उसके झांसे में आकर अपना बहुत कुछ खो देते हैं. छत्तीसगढ़ में तो यह एक आम बात हो गई है कि हम कभी चिंट फंड वालों के चक्कर में पड़ जाते हैं तो कभी किसी  तांत्रिक  के तो बेगा के! कोई हमें लालच देकर सोना-चांदी दुगना कर रफा हो जाता है तो कभी आंखों के सामने ही सारा माल लूट लेता है। आखिर कब तक हम ऐसे स्वार्थ सिद्व करने वाले झूठे फरेबियों के चक्कर में फंसते रहेंगे? छत्तीसगढ़ में यह सिलसिला अन्य राज्यों के मुकाबले पिछले कई वर्षो से चल रहा है लेकिन इसका कोई समाधान निकलने की जगह यह मसला ओैर ज्वलंत होता जा रहा हैं.टोनही टोटका को रोकने के लिये हाल के वर्षो में सरकार की तरफ से प्रयास जरूर हुए हैं किन्तु इसपर पूर्ण रूप से काबू नहीं पाया जा सका है. इसका प्रमुख  कारण जो हम देखते हैं वह है अशिक्षा,अज्ञानता और ऐसे लोगों के खिलाफ प्रचार प्रसार की कमी। किसी की बातों पर  तत्काल विश्वास करने की हमारी मानसिकता के चलते यह समस्या एक विकराल रूप में मौजूद है-अब राजधानी रायपुर के निकट भिलाई के ग्राम नेवई का उदाहरण ले- यहां  तंत्र मंत्र के नाम पर दो बहने रेप का शिकार हो गई। दोनों बहनों का कहना है कि उन्हें घटना का पता तब चला जब आधे घंटे बाद होश आया। बताया यह जा रहा है कि तांत्रिक ने दोनों बहनों को खुले मैदान में नशीला पदार्थ खिलाकर रेप किया और फरार हो गया। पुलिस को अभी आरोपी नहीं मिले हैं। ऐसे कितने ही मामले हैं जो अचानक एक बड़े हादसे के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं और हम असावधानी ओैैर लापरवाही के कारण जिंदगीभर हाथ मलते रह जाते हैंं।कुछ दिन पूर्व छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े चिकित्सालय डा.अम्बेडकर अस्पताल से एक नवजात शिशु को कोई महिला आसानी से सबके सामने उठाकर ले गई ओर मां बाप हाथ मलते रह गये. यहां लालच काम कर गया. ऐसे ही कई मामले हैं जो समाज को सिर्फ इसलिये भटका रहा हैं चूंकि एक बड़ा वर्ग अज्ञानता अंधविश्वास और तुरंत किसी पर भरोसा कर लेने के भंवरजाल में फंसा है। भिलाई के नेवई थाने के तहत जो घटना हुई उसमें दुुर्भाग्यजनक बात तो यह है कि इस तरह के हादसे होने  में परिवार के लोगों का किसी के प्रति अकूट भरोसा काफी हद तक है. ऐसे  लोगों को जाने बगैर उन्हें परिवार में  बेरोकटोक आने-जाने की  छूट देना व परिवार के साथ  समय बिताते समय लापरवाही बरतना भी इन घटनाओं को घटित होने देने का एक प्रमुख कारण माना जा सकता है. भिलाई की कथित घटना  मे आरोपी  तांत्रिक को इतनी छूट देकर रखा गया था कि वह दिनभर उन्हीं के घर रहता था। उसने पहले दोनों बहनों पिता का विश्वास अर्जित किया, परिवार से घुलमिल गया तथा  समय-समय पर उनका  काम भी करके दिया । घटना के दिन भी उसने घटना को तरीके से अपने मकसद को अंजाम  दिया-युवतियों के पिता  की अनुमति से ही तांत्रिक दोनों बहनों को यह कहकर अपने साथ ले गया कि कुछ तांत्रिक क्रिया करनी है, वह लड़कियों को अपने साथ ले जा रहा है.जबकि ऐसी घटनाएं कुछ समय पूर्व इस गांव के आसपास हो चुकी है यह सब जानते हुए भी लोगों को ऐसे लोगों के चंगुल में फंस जाना नसमझी नहीं तो और क्या कहा जा सकता है?  नेवई गांव से जुड़ी यह दूसरी बड़ी घटना है। पहली घटना पांच साल पहले हुई थी  जिसमें तांत्रिक ईश्वरी यादव ने दो बच्चे की बलि दी थी। उसने जब दूसरे बच्चे की बलि दी तो इसका खुलासा हुआ कि तीन माह पहले उसने सात साल की बच्ची की भी बलि दी थी।  इस मामले में ईश्वरी, उसकी पत्नी किरण यादव सहित पांच अन्य लोगों को फांसी की सजा मिली लेकिन यह संदेश अब तक आम लोगों तक पहुंच जाना चाहिये था कि ऐसे लोगों से  दूर रहो।  कानून, अदालत सब अपना काम बखूबी  निभा रहे हैं लेकिन इसका परिणाम जो निकलना चाहिये वह नहीं निकल पा रहा है शायद यही कारण है कि ऐसी घटनाएं  कठोर कानून के चलते भी रूकने का नाम नहीं ले  रही है.