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इच्छा शक्ति, छप्पन इंच का सीना ही जनता का विश्वास जीतेगी


इच्छा शक्ति, छप्पन इंच का सीना ही जनता का विश्वास जीतेगी!
नरेन्द्र मोदी के लिये काम आसान लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं
बेेरोजगारी, काला धन, आर्थिक विकास/निवेश, आंतरिक सुरक्षा, चौबीस घंटे बिजली, सड़क, फास्ट ट्रेन, नि:शुल्क शिक्षा जैसी बातें जो आम आदमी से जुड़ी हैं जिसे सत्ता में बैठे व्यक्ति के लिये हल करना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन इसके लिये भी इच्छा शक्ति के साथ छप्पन इंच का सीना भी होना चाहिये. अब तक शासन करने वालों में इसका अभाव था या उनके साथ काम करने वालों ने अपनी जेब भरने के साथ जनता से दूरी बनाई और समस्या को ज्यों का त्यों बनाये रखा लेकिन अब मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही लोगों की वे आशाएं जाग गई हैं जिनका वर्षों से वे सपना देखते रहे हैं?
नरेन्द्र मोदी 26 मई को शाम छह बजे भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे और इसी के साथ देश की जनता की वे आशाएं और अपेक्षाएं भी मोदी का पीछा करने लगेंगी जो उन्होंने चुनाव के दौरान लोगों से वादे किए थे. सबसे पहला मुद्दा है महंगाई- कम से कम एक महीने के भीतर नरेन्द्र मोदी को आम लोगों को यह महसूस कराना होगा कि उनके सिंहासन पर बैठते ही मंहगाई कम होने लगी है.
 पिछली सरकार ने कार्यग्रहण करने के बाद से लेकर अपने दस वर्षों के दौरान पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में अनाप-शनाप वृद्धि या तो ग्लोबल मंदी का बहाना या कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का बहाना बनाकर की या किसी  अन्य कारणों से. यह बढ़ोतरी मंहगाई का सबसे बड़ा कारण रहा है. जो पेट्रोल 35 रूपये लीटर मिल रहा था वह आज 75-80 रुपए के आसपास हो गया है. विपक्ष हमेशा कहता रहा है कि राज्य सरकारें टैक्स कम कर दें तो पेट्रोल-डीजल के भावों में कमी आ सकती है. मंहगाई की जड़ में कालाबाजारी और जमाखोरी  दोनों है. देखना है नई सरकार कीमतों को कैसे नीचे लायेगी. बेरोजगारी की समस्या देश में मुंह बाये खड़ी है. लाखों नौजवानों ने नरेन्द्र मोदी और उनके सहयोगियों को जिताया, वह यह सोचकर कि मोदी जीतेंगे तो बेरोजगारी दूर होगी, युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान होंगे. इसके उपाय भी मोदी अपने भाषणों में सुझाते रहे हैं, अत: अब यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि देश में बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिये नई सरकार कौन से प्रभावशाली कदम उठाती है. हमारे युवाओं में सब्र का अभाव है, वे हर समस्या का त्वरित हल चाहते हैं. देश आंतरिक सुरक्षा के मामले में एक लम्बे समय से जूझ रहा है, विशेषकर पिछले दस सालों से समस्या और भी जटिल हो गई है. आंतकियों को फांसी पर लटका देने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. स्वयं प्रधानमंत्री के जीवन को खतरा है, ऐसे में आम आदमी की सुरक्षा के साथ-साथ देश की सुरक्षा भी सवालों के कटघरे में है. प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने से पूर्व ही घुसपैठियों ने एक पहल भारतीय सीमा में घुसने की की है. इसके अलावा देश आंतरिक आतंकवाद जैसे सिमी, नक्सली और बोडोलैंड जैसी समस्याओं से ग्रसित है, इन सबका हल जल्द होते देखना भी लोग चाहते हैं. आतंकवाद के लिये जिम्मेदार कई कुख्यात आंतकवादी पाकिस्तान में शरण लेकर बैठे हैं. उनको भारत लाने और उन्हें अदालत के कटघरे में खड़ा करने की दिशा में नरेन्द्र मोदी की स्टे्रटजी क्या होगी इस पर भी विश्लेषक नजर जमाये बैठे हैं. महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सरकार के कदम क्या होंगे इस पर भी नजर होगी. ऐसे कठोर कानून की आशा है जिससे देश में महिलाओं और बच्चियों का जीवन सुरक्षित रहे.
देश के कई गांवों में सड़क नहीं है, शौचालय नहीं है. पीने के पानी के लिये कई दूर तक जाना पड़ता है. निस्तारी के पानी की समस्या है. चौबीस घंटे बिजली नहीं मिलती. अगर बिजली है तो भी लोग उसके बढ़े हुए बिल से परेशान हैं. लाखों वोटर यही चाहते हंै कि नई सरकार इन समस्याओं से निजात दिलाये. आम आदमी देश में बहुआयामी टैक्स से परेशान हंै वह चाहता है कि बहुआयामी टैक्स की जगह सिंगल टैक्स प्रणाली लागू हो. सिंगल टैक्स के अलावा बंैक लोन में कमी की भी वह आशा करते हैं. जिन बातों का जिक्र मोदी ने अपने भाषणों में किया है उस संबंध में तो जनता को विश्वास है कि आने वाले दिनों में वह इनमें से बहुत सी अपेक्षाओं को पूरी करेंगे.
भारत में ट्रेनों का जाल बिछा होने के  बाद भी देश की जनता ट्रेन की छतों पर और टायलेट के अंदर-बाहर बैठकर सफर करने मजबूर हैं. 120 किलोमीटर की रफ्तार से ज्यादा ट्रेनों को दौड़ाने में रेलवे को डर लगा रहता है कि कहीं दुर्घटना न हो जाये. दूर-दराज इलाकों तक आज तक ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं है. ज्यादा किराया देने के बावजूद द्वितीय व तृतीय दर्जे की एसी बोगियों में लोग ठूस-ठूस कर सामान्य दर्जे से बदतर हालत में सफर करते हैं. मंहगी यात्रा, गंदा खाना, गदंगी, देश की ट्रेन सेवा का दूसरा नाम है. क्या देश विश्व का श्रेष्ठ रेलवे मोदी के कार्यकाल में बनेगा?
 भ्रष्टाचार और कालाधन देश  की सबसे  बड़ी समस्या के रूप में मोदी सरकार के समक्ष चुनौती है. यूपीए सरकार द्वारा काले धन को विदेश से भारत लाने और देश में छिपे कालेधन को बाहर निकालने में असफलता तथा भ्रष्टाचार से निपटने में नाकामयाबी उसके हार के कारणों की गिनती में है. विदेश से कालेधन को भारत लाने की बात तो बाद की है, पहले देश में छिपे कालेधन को निकालने के मामले में क्या त्वरित कार्रवाही होती है यह देखना दिलचस्प होगा. उद्योग, निवेश और अन्य आर्थिक समस्याओं तथा देश में सड़क, पुल-पुलियों का विकास, नदियों को जोड़ने, नदियों की सफाई पर तो मोदी को महारत हासिल है लेकिन विदेश नीति क्या होगी? कैसे वह अपने पड़ोसियों से संबंध बनाये रखेगा. आज की परिस्थिति में कोई हमारा अच्छा मित्र नहीं है. प्राय: सभी पड़ोसी राष्ट्रों से सतही हाय-हलो है. दुख का कोई साथी नहीं तो सुख में भी यही स्थिति है. चीन का भय आज भी बना हुआ है. पाक पर किसी भी कार्रवाई की स्थिति में उससे पाक को सहायता का भय बना रहता है. अमरीका कई मामलों में भारत से नाराज है. नरेन्द्र मोदी से अंदरूनी नाराजी क्या भविष्य में दोस्ती का रूप ले पायेगी यह देखना भी दिलचस्प होगा. वैसे मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया जाना एक अच्छी पहल मानी जा सकती है. पाक से बिगड़े संबन्धो को यह न्यौता किस हद तक सुधार पायेगा यह भविष्य ही बता पायेगा.

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