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गरीब-मध्यम के हाथ से फिसल रहा गैस-तैल!

शनै शनै हम कुछ ऐसी वस्तुओ पर आश्रित होते जा रहे हंै जो हमारे लिए जरूरी तो है किन्तु हमारी आर्थिक क्षमता अब उसे स्वीकार करने लायक नही रह पा रही है, इसमे सबसे महत्व की बात तो यह है कि जिन्हें हमारे लिए इसका प्रबंध करना है वे ही इससे या तो मुँह मोड़ रहे हैं या जिद पर अड़े हुए हैं.वर्तमान हालात मे ईंधन जिसमे पेट्रोल, डीजल, गैस सब शामिल है जो हरेक व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता  है सारी मुसीबत की जड़ बन गया है.घर मे चूल्हे से लेकर दफ्तर ओर एक शहर से दूसरे शहर तक की दूरी  को तय करने के लिये पेट्रोल, डीजल, गैस तीनों महत्वपूर्ण कड़ी है.ईधन की भूमिका जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन गई है पेट्रोल, डीजल औऱ गैस के भाव बढ़ते है तो ऐसा  लगता है जैसे हमारी पीठ पर कोई प्रहार कर रहा है दाम बढ़ते हैं तो यह न केवल व्यक्तिगत रूप से लोगो की परेशानी का सबब बन रहा है बल्कि संपूर्ण देश की अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित कर रहा ह.ै पिछले कुछ वर्षों से शुरू के महीने में तो पेट्रोल और डीजल के दाम में एक मामूली सी स्थिरता थी जो आगे चलकर एक आम समस्या के रूप में बदल गई लोगों का दैनिक जीवन इससे प्रभाव…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…