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सीबीएस सी कोर्स या बोझ का पिटारा!

सीबीएस सी कोर्स या बोझ का पिटारा! 19 जुलाई 2017 |एंटोनी जोसफ
इस समय सबसे ज्यादा मुसीबत में कोई है तो वह है माता-पिता और किसी भी घर का नन्हा मुन्ना वारिस जो स्कूल प्रबंधन, शिक्षक-शिक्षिकाओं और सरकार के बीच में बुरी तरह फंसा हुआ हैं. सीबीएससी कोर्स एक तरह से शिक्षा न होकर पहाड़ बन गया है, जिसके नीचे दबकर माता-पिता चीख रहे हैं -चिल्ला रहे हैं और बच्चे तड़प रहे हैं. सीबीएससी कोर्स की हकीकत यह है कि उसे न तो बच्चे समझ पा रहे हैं न शिक्षक और न ही कोई ओर! जिनने भी इस पद्धति को बनाया है वे बच्चों के बस्ते में पत्थर की तरह पुस्तकों का ढेर एक तरह से लाद रहे हंै जिसे उठाकर चलने की क्षमता भी उनमे नहीं है, स्कूलों में इतना होमवर्क दे दिया जाता है कि बच्चे घर में न खाना खा पाते हैं न पढ़ पाते हैं न ही खेल कूद की गतिविधियों में भाग ले पाते हैं. वास्तव में देखा जाए तो बच्चों के ऊपर शिक्षा विभाग का या कहे मंत्रालय का या जिसने भी यह कोर्स बनाया है उसका अत्याचार है बल्कि बच्चों के साथ क्रूरता है. एक तरह से सिलेबस इस तरह का तैयार हुआ है कि बच्चे प्रतिदिन कम से कम 10 से 20 किलो तक बोझ स्…

कब तक हम प्रदूषित ध्वनि और जाम की चपेट में फंसे रहेंगे?

कब तक हम प्रदूषित ध्वनि और जाम की चपेट में फंसे रहेंगे?14 दिसम्बर 2016 |एंटोनी जोसफ ·
रोज सुबह तीन से पांच बजे का समय! जब शहरो में लोग गहरी नींद में होते हैं तब आसपास किसी क्षेत्र से या तो फिल्मी गाने की तेज आवाज आती है या फिर कोई माइक लेकर चीखता चिल्लाता हुआ सुनाई देता है. समझ में नहीं आता कि यह आयोजन किसलिये और किसको सुनाने के लिये?. ध्वनि फेकने वाले स्थल से सवेरे मार्निगं वाक पर निकले लोग बताते हैं कि ऐसे लोग टेप लगाकर सो जाते हंै. यह रोज का सिलसिला है.इसके थोड़ी ही देर बाद किसी आस्था केन्द्र से लाउड स्पीकर की तेज आवाज सुबह चिडिय़ों के चहकने की सुरीली आवाज तक को दबा देती है.कानफोडू आवाज के बाद झल्लाकर उठने वाले शहर के लोग काम पर निकलते हैं तो फिर उन्हें हर पग पर ऐसी ही मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ऐसे लोग चाहे पैदल जा रहे हो या सायकिल पर अथवा दो पहिया या चार पहिया वाहन पर. शहर में मौजूद ऐसी किस्म की परेशानियां जिसे प्रशासन अनदेखा करता है पीछा ही नहीं छोड़ता. सड़क या गली पर पहुंचते ही दूसरे किस्म की परेशानी उसे घेर लेती है.सार्वजनिक सड़क पर यह बाधा किसी के बर्थड…

महिलाओं की सुरक्षा पर अब कठोर होगा कानून?

महिलाओं की सुरक्षा पर अब कठोर होगा कानून? 21 मार्च 2017 |

भारत भी विश्व की उस सूची में शामिल हैं जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है. हम चौथे स्थान पर हैं जबकि हमारी परंपरा संस्कृति सब महिलाओं को इज्जत और आदर देती रही है.भला जिस देश में जहां,नर में राम और नारी में सीता देखने की संस्कृति रही हो, नदियों को भी माता कहकर पुकारा जाता हो, भगवान के विभिन्न अवतारों, ऋषि-मुनियों, योगियों-तपस्वियों आदि की क्रीड़ा व कर्म-स्थली रही हो, महिला सशक्तिकरण के लिए दिन-रात एक कर दिया गया हो, संसद में भी तेतीस प्रतिशत महिलाओं को बैठाने की तैयारियां चल रही हों, शीर्ष पदों पर महिलाएं विराजमान हों और हर प्रमुख परीक्षा व क्षेत्र में लड़कियों का वस्र्चव स्थापित हो रहा हो,वहां देशभर में एक के बाद एक नाबालिग लडकियों व बेबस महिलाओं के साथ दिल दहलाने वाली शर्मनाक व दरिन्दगी भरे दुष्कर्म की घटनाओं ने यहां तक सोचने के लिए विवश कर दिया कि आखिर इसका अंत क्या है?देश में हर 29वें मिनट में एक महिला की अस्मत को लूटा जा रहा है। हर 77 मिनट में एक लड़की दहेज की आग में झोंकी जा रही है. हर 9वें मिनट में एक महिला अपन…

नाव पलटी दर्जनों मरें....कौन है ऐसे हादसों के लिये जिम्मेदार?

नाव पलटी दर्जनों मरें....कौन है ऐसे हादसों के लिये जिम्मेदार? 16 जनवरी 2017 |एंटोनी जोसफ
यह एक मानवीय प्रवृति बन गई है कि देर से पहुंचे...बस में चढऩा है तो दौड़ के चढ़े, ट्रेन में चढऩा हो तो यहां भी दौड़ लगाये.-प्लेन मिस हो जाये तो सर पर हाथ पकड़कर बैठ जाओं...कभी लाइन में खड़े रहकर सब्र करने की जगह एक दूसरे को धक्का देकर आगे बढऩे की कोशिश में तो कभी कभी बहुत कुछ हो जाता है. यह सब कई सालों से होता आ रहा है इस चक्कर में कइयों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है. शनिवार को बिहार की राजधानी पटना में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर आयोजित पतंग उत्सव में भाग लेकर लौट रही एक नाव गंगा नदी में डूब गई. रविवार की सुबह और दोपहर तक शवों को नदी से निकालने का सिलसिला चलता रहा. कम से कम दो दर्जन से ज्यादा लोग मारे गये. सिर्फ किसी की जिद और किसी की दादागिरी और किसी की लापरवाही के कारण. नाव में जबरन ज्यादा लोग घुस आये थे. नाविक बार बार गिड़गिड़ाता रहा कि ज्यादा लोग चढ़ जाओंगे तो नाव पलट जायेगी लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी और नाव में इतने लोग चढ़ गये कि वह बजन को झेल नहीं सका और नाव पलट गई.ने…

इतनी धन- संपदा कि..फटी रह गई लोगों की आंखें...!

इतनी धन- संपदा कि..फटी रह गई लोगों की आंखें...!10 जुलाई 2017 |एंटोनी जोसफ
अब यह बात लगभग साफ होने लगी है कि विदेशों में जमा काले धन से कुछ ज्यादा ही माल हमारे देश के कतिपय परिवारों ने जमा कर रखा है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और रेल मंत्री जैसा महत्वपूर्ण विभाग सम्हालने वाला व्यक्ति भले ही यह कहें कि उनपर कार्रवाही राजनीति क बदले की भावना से की गई है तो विश्वास करने वाली बात इसलिये भी नहीं है कि छापेमारी के बाद जिस प्रकार दस्तावेज में संपत्ति का ब्योैरा निकलकर सामने आ रहा है वह देश को चौका रहा है.पूर्व मुख्यमंत्री पर करोड़ों रूपये के चारा घोटाले का दाग पहले से लगा हुआ है और यह मामला अब भी पेन्डिंग है. किसी समय देश का बजट इन महानुभावों की संपत्ति के बराबर हुआ करता था जो अब पता चल रहा है कि किस प्रकार लोग सत्तासीन होने के बाद अपनी संपत्त्ति को दुगना- तिगुना करने में लगे रहते हैं.अपने स्वार्थ के लिये देश के लोगों की खरे पसीने की कमाई को यूं दबा देना तो जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. सरकार को निष्पक्षता से और भी ऐसे कई लोगों को बेनकाब करने की जरूरत है जो देश को खोखला कर…

वे गर्दन काट रहे और ये...इनमें उनमें क्या अंतर? इंसान हैं या दरिन्दे!

वे गर्दन काट रहे और ये...इनमें उनमें क्या अंतर? इंसान हैं या दरिन्दे!27 अप्रैल 2017 |एंटोनी जोसफ
लेखिका तस्लीमा नसरीन ने ठीक ही कहा है-''ये मूर्ख माओवादी जवानों को क्यों मारते हैं? ये बिल्कुल आईएसआईएस जैसे हैं. विचित्र सपने पाले कातिलों का एक झुंड हैं ये आईएसआईएस इंसानों का कत्ल क्रूरता की हद तक जाकर करते हैं जबकि सुकमा के जंगलों में कथित रूप से सत्ता पाने की जंग लड़ रहे लोगों की दुष्टता अमानवीयता यह सिद्व करती है कि यह मानवता को जानतेे ही नहीं.शवों तक को नहीं छोड़ते- हिंसक लड़ाई आखिर किसके लिये है? किसके प्रति है? उस सिद्वान्त के प्रति जो 1967 में नक्सलवादियों के जनक चारू मजूमदार, कनू सान्याल और जंगल संताल ने पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव में शुरू किया था? या उनके खिलाफ जो बेचारे अपने बाल बच्चों का भरण पोषण करने दो जून रोटी कमाने के लिये सरकार के हुक्म का पालन कर रहे हैं? कभी आपस में मिल बैठकर यह क्रूरता करने वाले उन जवानों से मिले और उनकी बाते शांतिपूर्वक सुने तो शायद वे उनको गले लगाये बगैर भी नहीं रहेंगे मगर जिस तरह का क्रूर व्यवहार सुकमा जिले के बुरकाप…

आजादी के अड़सठ साल-कुछ लोग सोने की थाली में पैदा हुए तो कुछ धोखा देकर बन गये कुबेर

आजादी के अड़सठ साल-कुछ लोग सोने की थाली में पैदा हुए तो कुछ धोखा देकर बन गये कुबेर 23 फरवरी 2017 |एंटोनी जोसफ
सोचिये!!अगर देश के कतिपय कर्ताधर्ता ईमानदार होते और देश का पैसा देश के लोगों के हित में लगाते तो आज हमारे देश की खुशहाली कैसी रहती? सन् 1947 को देश आजाद होने के बाद से ही देश के अपने लोग ही देश को लूटकर खाने लगे इसमें जहां कतिपय नेता तो थे ही साथ ही ब्यूरोक्रेटस और निचले स्तर के अधिकारियों यहां तक कि तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों तक ने भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी.

आजादी के अड़सठ साल-कुछ लोग सोने की थाली में पैदा हुए तो कुछ धोखा देकर बन गये कुबेर और कुछ ने सत्ता पाने के बाद देश को ही बेच डाला

कोई रिश्वतखोरी के जरिये देश की गरीब जनता को चूसने लगा तो किसी ने तो उसकी साारी जायदाद और संपत्ति ही हड़प कर उसे कहीं का न छोड़ा. अंग्रेज जब देश को छोड़कर गये तो देश में मुश्किल से कुछ ही करोडपति थे लेकिन आज करोड़पति की बात छोडियें अरबपति भी इतने हो गये कि उंगलियों पर तो गिने ही नहीं जा सकते. हम यह नहीं कहते कि सारे करोडपति या अरबपति बनने वाले देश को लूटकर सफेद नहीं बने …

तो फिर ईव्ही एम को बंद कर बैलेट फिर से लाना चाहिये!

तो फिर ईव्ही एम को बंद कर बैलेट फिर से लाना चाहिये! 15 मार्च 2017 |एंटोनी जोसफ
उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में सभी पार्टी और नेताओं ने एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.सभी ने एक-दूसरे पर पर्याप्त तंज कसे और अपने आप को सर्वश्रेष्ठ दिखाने की पुरजोर कोशिश की.चुनाव परिणाम आये तो इतना अप्रत्याशित की कई के होश उड गये तो कई फूले नहीं समाये. आखिर यूपी में ऐसा क्या था कि पूरे देश की नजर इस चुनाव पर लगी थी.असल में लोग यहां के परिणाम को नोटबंदी का असर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भविष्य देखने लगे थे, शायद यही कारण था कि प्रधानमंत्री स्वंय इस चुनाव में ऐसे उतरे जैसे खुद चुनाव लड़ रहे हो. मोदी की जनसभाओं में भारी भीड़ की मौजूदगी तो यही संदेश दे रही थी कि उत्तरप्रदेश की जनता परिवर्तन चाहती है लेकिन ऐसा कहीं दिखा नहीं कि सारे रिकार्ड तोड़ दे. समाजवादी पार्टी परिवार में दो फाड़ हुई तो पार्टी भी फट गई. मुलायम- शिवापाल की जोड़ी बनी तो अमरसिंह किनारे हुए और राग भी बदल गये. अखिलेश पार्टी के सर्र्वेे सर्वा बन गयें और उनका कांग्र्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से तालमेल बैठा…

अपराध की तपिश से क्यों झुलस रहा छत्तीसगढ़?

अपराध की तपिश से क्यों झुलस रहा छत्तीसगढ़?05 अक्तूबर 2016 |एंटोनी जोसफ
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित बड़े शहर इन दिनों गंभीर किस्म के अपराधों से झुलस रहे हैं वहीं पुलिस की नाकामी ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं. एक के बाद एक अपराध और उसमें पुलिस की विफलता ने यह सोचने के लिये विवश कर दिया है कि आखिर यह शांत राज्य अपराधों से कैसे झुलसने लगा?. एक के बाद एक होने वाले अपराधों से पुलिस से ज्यादा छत्तीसगढ़, विशेषकर राजधानी रायपुर में बाहर से आने वाले नागरिक ज्यादा परेशान हो रहे हैं-घटना के तुरन्त बाद पुलिस की कार्रवाही नाकेबंदी होती है इसमें अपराधी तो पतली गली से निकल जाते हैं लेकिन सड़क पर चलने वाले आम आदमी की फजीहत हो जाती है जैसे उसी ने सारा जुर्म किया हो.हाल ही कई वाहनों को रोककर जबर्दस्त तलाशी ली गई. किसी से कुछ नहीं मिला,उलटे अपराधियों को भागने का मौका मिल गया. बड़ी बड़ी घटनाओं ने शहरों में दहशत की स्थिति पैदा कर रखी है. आम आदमी को अपनी सुरक्षा पर संदेह है.असल में छत्तीसगढ़ बाहरी उन अपराधियों का पनाहस्थल बन गया है जिनकी दूसरे राज्यों की पुलिस को तलाश है. अपराधी कतिपय …

ब्लू वेल का एक दूसरा भाई भी है सुपर बाइक स्टंटबाज!

ब्लू वेल का एक दूसरा भाई भी है सुपर बाइक स्टंटबाज! 18 अगस्त 2017 |एंटोनी जोसफ
पौने छै: लाख रूपये मूल्य की सुपर बाइक से अपने दोस्तों के साथ रेस लगा रहे दिल्ली के एक लड़के की दीवार से टकरा जाने से मौत हो गई.यह तो हुई इंडिया की बात केलिफोर्नियां में एक युवक गहरी खाई में जा गिरा किस्मत अच्छी कि बच गया. विदेशों में यह आम बात है. दिल्ली में मृत चौबीस साल के हिमांशु बंसल के पिता ने दुखी मन से बयान दिया कि देश में सुपर बाइक को बंद कर देना चाहिये. लोगो के मन में विचार उठ रहा होगा कि इतनी मंहगी और इतनी फास्ट बाइक माता पिता अपने बच्चों को खरीदकर क्यों देते हैं? यह सवाल पूछने वालों को यह जवाब मिल सकता है कि बच्चों की जिद के आगे हम बेबस हो गये थे, पैसा क्या चीज है यह तो आता जाता रहता है आदि... किन्तु इस जिद के आगे माता पिता थोड़ी सी बात अपने बैटे से उसी तरह कर देते जैसा गुजरात के हीरा व्यापार ी ने अपने बैटे को पांच सौ रूपये देकर किया था तो तो शायद आज हिमांशु और उसके जैसेउ जिद कर बाइक-कार हासिल करने वाले सैकड़ों बच्चे जो ऐसी दुर्र्घटनाओं में मारे नहीं जाते. हीरा व्यापारी ने अपने…