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सब कुछ नकली, दवा तो हमें मारने के लिये ही बन रही!


नकली दवाओं के कारोबार में भी हम दुनिया में तीसरा सबसे बड़े देश के रूप में शामिल हो गये हैं-इस संकेत ने मानव जीवन को ही खतरे में डाल दिया है.खाने पीने की हर वस्तु हो या रोजमर्रे के उपयोग में आने वाली वस्तुएं अथवा इंसान का जीवन बचाने के लिये उपयोग में आनी वाली दवाएं सभी का उपयोग अब धीरे धीरे हमारे जीवन के लिये खतरा बनता जा रहा है.हाल ही कुछ ऐसे वीडियों वायरल हुए है जो यह दर्शाते हैं कि देश में भारी संख्या में नकली खाद्य सामग्रियां बनाई जा रही  है तथा उसकी खपत भी हो तेजी से हो रही है. एक वीडियों में नकली चावल तथा नकली फल तक तैयार करने की विधि बताई गई है.प्लास्टिक को गलाकरहू बहु चावल की प्रक्रिया जहां इंसान की जिंदगी से खिलवाड़ है वहीं बंद गोभी तक को  प्लस्टिक से तैयार कर बाजार में उतारना लोगों की कमाई का जरिया हो गया  है.दिल्ली के एक  परिवार ने ऐसे ही एक बंद गोभी से छिलका निकालकर यह साबित कर दिया है कि वह गाोभी जो दिखने में हूबहू असली है लेकिन प्लास्टिक की बनी हुई है.खाने पीने की वस्तुओं को एक तरफ रख अगर दवाओं के बारे में बात करें तो प्राय: जीवनरक्षक दवाओं का नकली मार्केट शुरू हो गया है. आखिर यह मिलावट की तकनीक कहां से आ रही है क्या इसके पीछे किसी विदेशी शक्ति का हाथ है- यह भी विचारणीय प्रश्न है. हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ की राजधानी में फल फ्रूट मार्केट से जो मिलावटी सामग्रियों का जखीरा सामने आया है वह यही इंगित कर रहा है कि व्यक्ति जिन वस्तुओं को अपने स्वास्थ्य वर्धन के लिये कर रहा है वह वास्तव में स्लो पाइजन है. केला सहित अनेक  फल सब्जियों में किसी न किसी केमिकल का उपयोग किया जा रहा है. यहां तक कि अंडा और मीठ तक में भारी मिलावट है.नकली प्लास्टिक का अंडा बाजार में आने लगा ह,ै इसकी पुष्टि भी कई जगह हुई है.देश में बिकने वाली दवाओं में 0.1 प्रतिशत से 0.3 प्रतिशत तक नकली हैं वहीं, चार से पांच प्रतिशत दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरती. नकली दवाओं में सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक बेची जा रही है, क्योंकि इनपर मोटा मुनाफा मिलता है. केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में ये तथ्य सामने आए हैं. दिल्ली में बुधवार से शुरू हुए 'इंटरनेशनल ऑथेंटिकेशन कॉन्फ्रेंसÓ में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन का कहना है कि नकली दवाओं के विश्वसनीय आंकड़ों पर अब तक सर्वेक्षण नहीं हुआ था.अब  सरकार ने देशभर से 47 हजार नमूने एकत्र किए जिसमें पता चला कि  नकली दवाओं में एंटीबायोटिक के बाद एंटीबैक्टीरियल दवाओं का स्थान ह.ै निर्यात से पहले सभी दवाओं के नमूनों की जांच होती है ऐसी दवाओं के लिए ड्रग ऑथेंटिकेशन एंड वेरिफिकेशन एप्लिकेशन ('दवाÓ एप) भी बनाया गया है. चारकोल से बनी दर्द निवारक दवाएं, जहरीले आर्सेनिक वाली भूख मिटाने की दवा के रूप में बेची जाती हैं.ऐसी दवाओं से मौत भी हो सकती है.चीन, जापान, पाक, ब्राजील, मैक्सिको, कनाडा नकली दवाओं के लिए चर्चित हैं.यह भी पता चला हे कि  दवा के नाम का कॉपीराइट नहीं किया जाता. रजिस्ट्रेशन नहीं होता तथा लैब में परीक्षण भी नहीं होता.नकली दवाओं का कारोबार कितनी तेजी से दुनिया को अपने आगोश में ले रहा है यह बताने के लिये यही काफी है कि नकली दवाओं का कारोबार 2017 के अंत तक सात खरब रुपये तक पहुंच सकता है.पूरे देश में 10500 के करीब दवा कंपनियां पंजीकृत हैं भारत में दवा बाजार 1.10 लाख करोड़ रुपये का है देश में मौजूद दवाओं में करीब 12.5-25प्रतिशत  तक दवाएं नकली हैं तथा दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा, एमपी, गुजरात बड़े बाजार नकली दवाओं के कारोबार के गढ़ बने हुए हैं.चिकित्सक लंबे समय तक एक ही दवा के इस्तेमाल से दवा असर न करने पर उसे नकली मानकर दूसरी दवा लिखकर दे देते हैं फिर उससे आदमी ठीक हुआ तो ठीक वरना उसकी किस्मत. देश  में इंसान की समय से पूर्व मौत के पीछे जहरीली नकली दवा बन गया है. यह मनुष्य की हत्या जैसा क्रिमिनल अपराध है इसमें उस व्यक्ति को फांसी जैसी सजा का प्रावधान होना चाहिये जो इसे बनाता है.आम आदमी को जहां नकली खाद्य पदार्थो के बारे में पूर्ण सतर्कता की जरूरत हैं वहीं सरकार को भी चाहिये कि वह इंसान को मारने वाला जहर बेचने वालों के खिलाफ ठीक उसी रतरह का व्यवहार करें जो किसी बड़े क्रिमिनल के साथ होता है.कुछ कंपनियों ने बार कोडिंग और ग्लोसाइन स्टिकर का इस्तेमाल शुरू किया है, लेकिन यह प्रयोग अभी तक जेनेरिक दवाओं में नहीं किया गया है. सभी किस्म की दवाओं में यह व्यवस्था तत्काल कठोरता से लागू करना जरूरी है.





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