मंगलवार, 16 अगस्त 2016

जनता के बीच के लोग...लेकिन जनता से कई आगे!




राजा महाराजाओं के दिन लद गये लेकिन हमारी व्यवस्था ने कई ऐसे महाराजा तैयार कर दिये जिनकी लाइफ स्टाइल किसी भी आम आदमी से कही ऊंची है-येह लोग अब भी प्राप्त सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं उन्हेें जनता की सेवा के लिये और पैसे चाहिये. यह चाहे वेतन में बढौत्तरी के रूप में हो, चाहे भत्ते के रूप में जबकि भारत की गरीब जनता जिनकी बदौलत यह सेवक बनकर ऊंची कुर्सियों पर विराजमान हैं उनमें से कइयों को तो कपड़े लत्ते और मकान की बात छोडिय़ें एक समय का खाना भी मुश्किल से नसीब होता है.उनके बच्चों की शिक्षा  के लिये कैसे कैसे पापड़ बेलने पड़ते हैं? और उनके बीमार पडऩे पर उन्हें क्या  क्या बेचना पड़ता है यह किसी  से छिपा नहीं है- आप  मौजूदा उच्च सदन की बात को ही ले लीजिये -442 माननीय करोड़पति बताए जाते हैं. एक माननीय की संपत्ति 683 करोड़ भी है. वहीं एक माननीय ऐसे भी है जिसकी संपत्ति मात्र 34 हजार रुपये है. ठीक हैं यह कम वेतन पाने वाले माननीय अपने वेतन और सुविधाओं में और वृद्वि की मांग कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है- सभी मांग कर रहे हैं कि वेतन बढ़ाया जाये. निचले सदन में इसी जून में 57 नए माननीय और जुड गये, जिनमें से 55 करोड़पति हैं. जो सबसे अमीर माननीय हैं उनकी संपत्ति 252 करोड बताई जाती है.देश का हर आदमी शायद यह सुनकर हैरान हो जाये जब उसे यह पता चले कि माननीयों  के ऊपर हमारी जेब से निकलने वाला पैसा हर साल खजाने से उनके लिये कितना निकलता है,माननीयों को इस समय सैलरी 50,000 रुपए प्रतिमाह तो मिलती ही है जो पूरी तरह से टैक्स फ्री है.माननीयों को 3 टेलीफोन लाइन फ्री मिलती है जिनसे वह 1 लाख 70 हजार फोन कॉल हर महीने फ्री कर सकते है, इन्हें हर महीने अपने स्टाफ खर्चे के 45,000 रुपए और 15,000 रुपए स्टेशनरी व अन्य डाक व्यय आदि के मिलते है, इनके घर के अन्य खर्चे जैसे फर्नीचर, धोबी आदि के खर्चे भी सरकार या कहे जनता द्वारा ही फ्री दिए जाते है .हर माननीय अपने घर के लिए 50,000 यूनिट बिजली फ्री इस्तेमाल कर सकता है और जाहिर सी बात है की पानी तो पूरी तरह से ही फ्री मिलता है.हर  माननीय को यह विशिष्ट सुविधा हासिल है कि वह पूरे देश की किसी भी टे्रेन में कही भी फर्स्ट क्लास में फ्री यात्रा कर सकता है और इसके अलावा इन्हें साल में 34 फ्री एयर टिकट भी मिलते है.ऐसी सुविधा भारत  के किसी आम नागरिक  को नहीं मिलती-बताइयें ऐसी सुविधाओं के लिये उन्होंने ऐसा कोैन  सा तीर  मार लिया? माननीयों को सरकार या कहें कि हमारी तरफ से जो बंगला मिलता है वह पूरी तरह से सज्जित होता है अर्थात उसमे एसी, फ्रिज, टीवी पहले से ही लगे हुए होते हं और पूरे बंगले की मेंटेनेंस भी जैसे रंग रोगन, फर्नीचर आदि की देखभाल आदि का व्यय भी सरकार की तरफ से किया जाता है अधिकतर माननीय जब बीमार हो जाते हें तो उन्हें चिकित्सा व्यय केंद्र सरकार की तरफ से 'चिकित्सा सेवा योजनाÓ के अंतर्गत दी जाती है. हां जब भी कोई माननीय अधिकारिक रूप से विदेश यात्रा पर जाता है तो इन्हें फ्री बिजनेस क्लास टिकट दी जाती है तथा इन्हें दैनिक यात्रा भत्ता भी अलग से दिया जाता है जो यात्रा के लिए जाने वाले देश के ऊपर आधारित होता है.हम उन्हें  निर्वाचित करते हैं हमारे क्षेत्र में खर्च करने के लिए इन्हें हरमाह 45,000 रुपए अलग से दिए जाते है .सदन के अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए 2,000 रुपए प्रतिदिन अलग से, हर साल 3 अधिवेशन होते है जो कुल 150 दिनों के होते है और अगर आप इन सबका हिसाब जोडोगे तो कुल बनता है 3 लाख रुपए, जो सिर्फ सदन  की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए ही बनता है.अधिवेशन के दौरान माननीयों की मेम को देश के किसी भी हिस्से से दिल्ली आने के लिए 8 बार फ्री एयर टिकट मिलता है और ट्रेन से आना-जाना पूरी तरह से फ्री.  यदि कोई भी व्यक्ति इस देश में एक बार माननीय बन जाता है तो वह पूरी जिंदगी 20,000 रुपए की पेंशन पाने का हकदार बन जाता है याने नौकरी मत करों  माननीय बन  जाओं आपकी निकल पड़ेगी.अगर कोई व्यक्ति पूरे 5 साल के लिए माननीय बना रहता है तो उसकी पेंशन में प्रति वर्ष 15,00 रुपए की अतिरिक्त वृद्धि का भी विधान है.भारत  के हर माननीय को सीधे- सीधे तीन लाख रूपये तो मिलते ही हैं. इसके अलावा उन्हें किसी भी सरकारी और निजी नौकरी के अलावा किसी भी प्रकार का व्यापार करने की भी छूट है सबसे बड़ी बात यह है की अगर कोई माननीय अधिवेशन में भी शामिल नहीं होता तो भी उसे उपरोक्त सारी सुविधाएं मिलती रहेगी.अब यह माननीय मांग कर रहे हैं कि उन्हें कैबिनेट सचिव  से ज्यादा सेलरी दी जाये!