सोमवार, 18 जुलाई 2016

भूतो की खोज ओर विश्व में फैलता स्पर्म का व्यापार!




दिल्ली में एक पढ़ा लिखा इंसान भूतों की खोज करते-करते रहस्यमय ढंग से मौत की गोद में समा गया. उसकी खोज अधूरी  रह गई कि इंसान का मरने के बाद क्या होता है?दूसरी ओर दुनिया अंतरिक्ष से आ रहेअजूबों (एलियंस) की खोज में वर्षो से लगी है कि आखिर यह हैं क्या! इन  अजूबों को खोज निकालने के  लिये ब्रिटेन के मशहूर कॉस्मोलॉजिस्ट स्टीफन हॉकिंग ने रूस के अरबपति यूरी मिलनर के साथ मिलकर अभी तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है जिसमें वे 10 साल के दौरान 10 करोड़ डॉलर खर्च करेंगें.यह दुनिया अजीब है जो रहस्यों से भरी पड़ी है अभी बहुत सी खोज होना बाकी है लेकिन मनुष्य ने बहुत सी  बातो का पता लगा लिया है. रोबोट का निर्माण कर लिया है जो मनुष्य की तरह काम करता है तो दूसरी ओर भेड़ व अन्य पशुओं के क्लोन से नये जानवर भी पैदा किये जा रहे हैं वहीं इसंान को भी मरने के कगार पर पहुंचकर नया जीवन दिया जा रहा है जिसमें किसी की खोपड़ी ही बदलकर सीमेंट की खोपड़ी लगा दी तो किसी के गले का ऊपरी हिस्सा ही पूरा बदलकर नया कर दिया गया. विश्व के इस बदलते रूप में इंसान तरह तरह की जिज्ञासाओं को जहां जानने का प्रयास कर रहा है तो दूसरी ओर मृत व्यक्ति की याद को सदा अपने सीने में संजोये रखने का प्रयास भी लोग यदा कदा करते हैं ऐसा ही एक किस्सा हाल ही भारत में भी सुनने को मिला जिसमेें एक महिला ने अस्पताल से अपने मृत पति के स्पर्म की ही मांग कर डाली ताकि वह गर्भधारण कर उसके मूत पति के बच्चे की मां बन सके. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में हैरान कर देने वाला यह मामला उस समय सामने आया जब एक विधवा ने डॉक्टर्स के सामने अपने मृतक पति के स्पर्म की मांग रख दी. युवक की अस्पताल लाते समय मौत हो गई थी. महिला की शादी कुछ सालों पहले ही हुई थी, लेकिन उसके कोई बच्चा नहीं है. महिला के सास-ससुर ने भी उसकी मांग का समर्थन किया लेकिन उसकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी क्योंकि हमारे देश में मरने के बाद शरीर से स्पर्म निकालने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं जबकि मरने के बाद भी लोगों की किडऩी और अन्य अवयव निकाल लिये जाते हैं.मनुष्य की मौत के 24 घंटे तक शुक्राणु जीवित रहते हैं.अब इसपर भी बहस छिड़ गई है कि क्यों न मृतक परिवार  की इस मांग को भी पूरा कर दिया जाये? डॉक्टरों का कहना है कि इसे देश में लागू किये जाने में कोई हर्ज नहीं है. इंसान की याद तो जीवित रहती है फॉरेंसिक एक्सपर्टस ने  भी  यह स्पष्ट किया है कि 'स्पर्म को निकालना बहुत साधारण प्रक्रिया है. यह पांच मिनट में हो सकती है, लेकिन इसको लेकर कुछ नैतिक और कानूनी अड़चनें हैं. मौत के बाद 24 घंटे तक शुक्राणु जीवित रहते हैं.विश्व में कई जगह ऐसा होता है.इसरायल में पति के मर जाने के बाद पत्नी अपने पति के स्पर्म का इस्तेमाल कर सकती है. लेकिन एक साल के भीतर ही पत्नी के लिए उसका इस्तेमाल करना लाजमी है.अगर एक साल के भीतर पत्नी की मौत हो जाती है तो उसके पति के स्पर्म को इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है. चीन सरकार ने अपने देश के लोगों से स्पर्म डोनेट करने की अपील की है. सरकार ने यह अपील स्पर्म बैंक में स्पर्म की भारी कमी आने के बाद की है. सरकार की ओर से जारी संदेश में 20 से 45 साल के लोगों से स्पर्म डोनेट करने को कहा गया है. राजनीतिक और सांस्कृतिक कारणों से देश के स्पर्म बैंक में कमी देखने को मिली है. सरकार की नई पॉलिसी के मुताबिक, चीन में हर दंपति को दूसरा बच्चा पैदा करने की भी अनुमति मिल गई है, जिसके बाद से स्पर्म डोनेशन में खासी कमी आई है. अब सरकार इसके लिए नए रिक्रूट तलाश रही है. डोनर्स को अट्रैक्ट करने के लिए स्पर्म बैंक कई तरह के ऑफर भी लेकर आ रहे हैं. कुछ ने 1000 डॉलर देने का विज्ञापन दिया तो कुछ ने गोल्ड आईफोन का भी लालच दिया है. कुछ बैंकों ने तो इसे देशभक्ति से जोड़ दिया है. वैसे वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे पुराने स्पर्म का जीवाश्म खोज निकाला है. रॉयल सोसायटी बायॉलजी लेटर्स में छपी स्टडी के मुताबिक अंटार्कटिका के सुदूर इलाके में मिला यह जीवाश्म 5 करोड़ साल पुराने क्लाईटेलाटा (केंचुए की तरह का जीव) के ककून यानि कृमि के अंदर पाया गया.यह संभवत: सबसे पुराना जीव स्पर्म है, जो कृमियों की उत्पत्ति और जीवन के विकास के कई राज खोल सकता है. वैज्ञानिकों को यह ककून एक दीवार के अंदर गड़ा मिला.भारत सहित दुनियाभर  में  स्पर्म देने  ओर बेचने का खेल चल पड़ा है वहीं इसके चक्कर में लोगों की जान भी जा रही है. चीन के एक स्पर्म डोनर ने दस दिन  में चार बार स्पर्म बैंक को शुक्राणु दान किया और उसकी मौत हो गई.झेंग के परिवार ने बैंक से 648,545 डॉलर का हर्जाना मांगा.कोर्ट ने परिवार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि झेंग इतने परिपक्व थे कि वो अपना निर्णय खुद कर सकें.