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कांग्रेस को सोमवार शुभ नहीं रहा...साथी बिखर गये!



एक दिन में चार झटके से कांग्रेस पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में हार के बाद अब पार्टी में नेताओं की बगावत आम हो चली है। साथ ही कई दिग्गज नेता पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं। महाराष्ट्र्र छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और यूपी  से एक ही दिन कांग्रेस के लिए  बुरी खबर आई.पांच राज्यों की विधानसभा में पराजय के बाद अब पार्टी नेताओं ने बगावत का झंडा थाम लिया है.दिग्गज नेताओं के पार्टी  छोडऩे से पार्टी के अंदर मायूसी है लेकिन बाहर इसे दिखाया नहीं जा रहा. पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता गुरुदास कामत ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया लेकिन कल राहुल गांधी ने उन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण देकर उनके मामले को हल्का करने का प्रयास किया है. वास्तविकता यही है कि लोकसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद  संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए मुश्किलें बड़े तूफान की तरह आई हैं. सोमवार को कांग्रेस के लिए चार बुरी खबरें आईं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता गुरुदास कामत ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से सन्यास लेने का एलान भी कर दिया. कामत महाराष्ट्र से आते हैं और अगले साल मुंबई में निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका था. कामत को गांधी परिवार का विश्वस्त माना जाता है, उनका इस्तीफा राजनीतिक गलियारों में हैरानी भरा रहा. पार्टी कार्यकर्ताओं को भेजे संदेश में कामत कहते हैं कि कई महीनों से मैंने महसूस किया कि मुझे नए लोगों को आगे आने के लिए पीछे हट जाना चाहिए.क्या कामथ के कांग्रेस छोडऩे  या सन्यास लेने के  पीछे वास्तव में यही कारण है?हकीकत यह है कि मुंबई इकाई से साइडलाइन किए जाने के चलते वे नाराज थे. पार्टी में सुधार के लिए उनकी ओर से दिए गए सुझावों की अनदेखी की गई. राहुल गांधी की मुंबई कांग्रेस प्रमुख संजय निरूपम से नजदीकियों ने कामत को सबसे ज्यादा दुख पहुंचाया. यह भी कहा जा रहा है कि वे राज्य सभा के लिए महाराष्ट्र से उम्मीदवारों के चयन से भी नाखुश थे. इधर, छत्तीसगढ़ में लगभग 12 साल से सिंहासन से बाहर विपक्ष  में बैठी कांग्रेस सोमवार के ही दिन एक और झटका खा गई. वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अजित जोगी ने अपनी नई पार्टी बना ली अपने पैतृक गांव मरवाही में जोगी ने इस बात का एलान किया. इस दौरान उनके बेटे अमित जोगी, पत्नी रेणु और कई कांग्रेस नेता मौजूद थे हालांकि पार्टी का नाम अभी तय नहीं हुआ है.इस दौरान जोगी ने एक महत्वपूर्ण बात यह कही कि अब राज्य के निर्णय दिल्ली से नहीं होंगे। उत्तर पूर्व में असम में सत्ता गंवाने के बाद अब त्रिपुरा में भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है पश्चिम बंगाल में वाममोर्चे के साथ गठबंधन के मुद्दे पर वरिष्ठ नेता और विधायक जितेन सरकार ने पार्टी छोड दी. उन्होंने स्पीकर को इस्तीफा सौंप दिया बता दें कि बंगाल में लेफ्ट से गठबंधन के चलते त्रिपुरा में कई और कांग्रेस नेता भी नाराज हैं इस कड़ी में लेटेस्ट खबर यही  है कि दस विधायक कांग्रेस छोड तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. कांग्रेस का अब तक राज्य सभा में जोर था लेकन चुनाव के बाद राज्यसभा में भी यह संख्या घट जाएगी.उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव कांग्रेस के लिए करो या मरो जैसी  हैं.  पार्टी ने यहां जीत हासिल करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। लेकिन कार्यकर्ता एकजुट नहीं दिख रहे हैं प्रशांत कुमार को यहां राहुल  गांधी  ने कांग्र्रेस को  जिताने का जिम्मा सौंपा हैं इसको लेकर कांग्रेसियों का एक बड़ा वर्ग नाराज चन रहा है. यहां पर प्रियंका गांधी को पार्टी में लाने की मांग लंबे समय से चल रही है, अब अल्पसंख्यक मोर्चे ने प्रस्ताव पारित किया है कि राहुल गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाए इसमें कहा गया कि यह काम जल्द से जल्द पूरा हो ताकि लोगों के दिमाग में भ्रम ना रहे। इसी बीच पार्टी की राज्य इकाई ने खुद को इस प्रस्ताव से दूर कर लिया है.कांग्रेस को अपना ढांचा फिर से तैयार  करने की जरूरत है. पुरानी सोच  में जहां  बदलाव लाना होग वहीं पार्टी में अनुशासन हीनता और गुटबाजी पर लगाम देनी होगी. नये लोगों को लाना होगा ऐसा व्यक्ति जो कांग्रेस को फिर से खड़ा कर सकें वरना आगे स्थिति और बिगड़ सकती है.

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …