रविवार, 12 जून 2016

इस हड़ताल ने तो पचास लोगों की जान ले ली! कौन जिम्मेदार?




किसी हड़़ताल को लेकर पचास से ज्यादा लोगों को प्राण गंवाना पड़ा हो यह छत्तीसगढ़ में पहला मामला है.प्रदेश में संजीवनी एक्सप्रेस और महतारी एक्सप्रेस के पायलट (ड्राइवर) टेक्नीशियन अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से हड़ताल पर हैं, इसके चलते जनहित में चलरही एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह से ध्वस्त है. पिछले कुछ वर्षो से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने का एक अच्छा और सुगम माध्यम बनी इस सेवा पर मानो ग्रहण लग गया है. अचानक कर्मचारियों ने अपनी  मांगें जोड़कर सेवा जहां अपने व सरकार  के बीच संबन्धों की खाई बना दी है वहीं सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए उनकी किसी मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया. दोनों के बीच चले द्वंद का असर अब दिखाई देने लगा है. मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचा न पाने के कारण  लोगों ने रास्ते में ही दम तोडऩा शुरू कर दिया हैं.  रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर सिमगा के पास एक टीवी कैमरामैन राकेश चौहान (24) और उनकी मां की सड़क हादसे में मौत भी इसी वजह से हुई. अगर समय पर उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया जाता और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी जाती तो संभव है उन्हें जीवन दान मिल जाता. छत्तीसगढ़ में इससे पूर्व बहुत सी हड़तालें हुई और कई दिनों तक चली लेकिन किसी की मौत नहीं हुई. वास्तव में यह  हडताल मौत का खेल  के रूप में बदल चुका है, जिसने अव्यवस्था और जिद के चलते  50 लोगों की जिंदगी छीन ली है.हड़ताल अभी भी शासन और कर्मचारियों की जिद के आगे जारी है हड़ताल तोडऩे के  लिये लगाया गया एस्मा, गिरफतारी का  खेल भी कोई असर करता नहीं दिख रहा. ऐसे में अभी और कई लोगों की जिंदगी दाव पर है.संजीवनी सेवा 25 जनवरी 2014 को शुरू हुई थी जो 108 नम्बर पर चालू की गई थी.240 गाडिय़ां एम्बुलेंस के रूप में चलती है. जबकि महतारी  योजना अगस्त 2013 में 102 नम्बर पर 300 गाडिय़ों के  साथ उपलब्ध रहती है. योजना के तहत कर्मचारियों को कान्ट्रेक्ट बेसिस पर एक साल के लिये रखा गया था जो बाद में बढ़ता रहा और अब कर्मचारियों ने सरकारीक रण की मांग को  लेकर हड़ताल कर दी. कर्मचारियों द्वारा रखी गई किसी मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया. जबकि इससे होने वाली जनता की तकलीफो के निदान का भी कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया. हड़ताल खिच रही है..कर्मचारी और सरकार दोनों ही अड़े हुए हैं.नतीजतन, सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण प्रदेश भर में अब तक करीब 50 जानें जा चुकी हैं.हडताल  से पहले तक कोई हादसा हो जाय या कोई अचानक गंभीर रूप से बीमार पड जाए तो 108 नंबर पर फोन लगाकर कहीं भी एंबुलेंस (संजीवनी एक्सप्रेस) बुलाई जा सकती थी, लोग इसके आदी भी हो गये हैं. गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिये 102 नंबर डायल कर महतारी एक्सप्रेस की मदद ली जाती रही. इस सेवा के कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं.पांच और तीन साल से चल रही संजीवनी एक्सप्रेस वास्तव में संजीवनी साबित हुई है लेकिन हड़ताल ने सब किरकिरा कर रखा है. हड़ताल के बीच ऐसे कई हादसे हुए जिसमें एंबुलेंस सर्विस मिली होती तो जिंदगियां बचाई जा सकती थीं.जिन घटनाओं का विवरण इस हड़ताल के दौरान मिला है वह इतना वीभत्स है कि व्यवस्था पर ही गुस्सा छलक पड़ता है कि उसने ऐसी स्थिति से निपटने पूर्ण तैयारी क्यों नहीं  की.? हम पूर्व के हडतालों के दौरान भी आवश्यक सेवाओं की हड़ताल पर यह बात कह चुके हैं कि इन सेवाओं में कर्मचारियों को लेने से पूर्व लिखित अनुबंध कर लिया जाना चाहिये कि वे किसी भी हड़ताल में शामिल नहीं होगें. आवश्यक सेवाओं में हड़ताल के चलते किसी की मौत हो जाती है तो ऐसे मामलों में एफआईआर उस क्षेत्र के जिम्मेदार कर्मचारी पर लगाया जा सकता है लेकिन ऐसा सरकार करती नहीं.हड़ताल  से रोजाना 800 लोग प्रभावित हो रहे हैं-कभी भी बीमार पडऩे पर लोगों को संजीवनी व गर्भवती महिलाओं को 102 सेवा लेने की आदत सी पड़ गई है. हड़ताल ऐसे ही चलते रहा तो लोगों की आदत कहीं छूट न जाये?