सोमवार, 9 मई 2016

फांसी की सजा पर फिर सवाल,बस दुनिया के तेरह देशों में फांसी !




विश्व के मात्र तेरह देश इस समय जघन्य अपराध करने वालों को सजाएं मौत देती हैं,इनमें पाकिस्तान तीसरे नम्बर पर है कि न्तु यहां फांसी असल अपराधी की जगह ऐसे लोगों को देने का आरोप मानव अधिकार संगठनों ने लगाया है जो वास्तव में इसके पात्र नहीं है.2014 में फांसी देने वाले दस प्रमुख देशों में भारत का नाम था चूंकि 2014 में भारतीय अदालतों ने 64 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी अब पाकिस्तान मुजरिमों को फांसी पर लटकाने वाले देशों में तीसरे स्थान पर हो गया है. अंतरराष्ट्र्रीय मानवाधिकार संगठन  एमनेस्टी इंटरनेशनल पाकिस्तान में दी जाने वाली फांसियों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहता है कि पिछले साल पाकिस्तान में 324 लोगों को  फांसी दी गई इनमें ज्यादातर ऐसे अपराधी शामिल थे जिनका आतंकवाद से कोई वास्ता नहीं था.पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले के बाद से 351 लोगों को पाकिस्तान में फांसी दी गई उनमें केवल 39 लोग ऐसे थे जो आतंकवाद से जुड़े थे या उनका संबंध आतंकी संगठनों से था,मानवाधिकार संगठन यह दावा कर रहा हैं कि पाकिस्तान में मानसिक रोगी, युवा अपराधी और ऐसे कैदी जिनपर अत्याचार किया गया या उन्हें पूरे रूप में न्याय नहीं मिल पाया वो फांसी पाने वालों में शामिल थे.दूसरी और भारत के बारे में फांसी पर सवाल उठा है-यहां फांसी की सजा पाने वालों में अधिकतर गरीब-कम पढ़े लिखे हैं -सेंटर ऑन द डेथ पेनाल्टी की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है जिसमें यह भी कहा गया है कि चौरासी प्रतिशत फांसी की सजा पानेे वालों का पहला अपराध था उसी के लिये  उन्हें फांसी पर लटकाया गया.भारत में जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा पाने वालों की संख्या सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में है, जबकि बिहार दूसरे स्थान पर है वैसे आबादी के अनुपात में देखें तो देश की राजधानी दिल्ली पहले पायदान पर है. फांसी की सजा पाने वालों में 84 फीसदी ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार अपराध किया. इनमें अधिकतर गरीब और कम पढ़े लिखे हैं तथा उनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं रही है। 20 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की जेलों में बंद फांसी की सजा पाए 373 कैदियों और उनके परिवारवालों से बातचीत के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कई रहस्योद्घाटन हुए हैं जो यह बताते हैं कि फांसी की सजा पाए 74.1 फीसदी कैदी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं, इनमें 76 फीसदी अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति, ओबीसी या धार्मिक अल्पसंख्यक समूह से हैं.फांसी की सजा कितनी उचित है इस बात पर सवाल उठा है.फांसी  की सजा पाने वाला तो इस दुनिया से चले जाते है लेकिन भुगतता उसका परिवार है यह बात साफ हुई है कि इन कैदियों में 73 ऐसे थे जो अपने परिवार के लिये कमाने वाला एकमात्र सदस्य था, जबकि 59 परिवार में कमाने वाले मुख्य सदस्य थे.दुनिया के 13 देश ऐसे हैं जहां धर्म के नाम पर भी लोग फांसी पर लटकाये जाते हैं यहां ईशनिन्दा करने या धर्मपुस्तकों का अपमान पर भी सरेआम गोली मार दी जाती है, ईरान में ईशनिन्दा के अपराध में सरेआम क्रेन से लटका कर मार डाला जाता है, ये आदेश शरिया अदालतें जारी करती हैं ऐसी फांसी जनता की मौजूदगी में होती है ताकि लोगों में कानून के लिए डर बना रहे, इसी प्रकार पाकिस्तान में ईशनिन्दा पर सरेआम जलाकर मार डाला जाता है यहां पवित्र कुरान से साथ छेड़छाड़ पर पत्थरों से कुचल दिया जाता है मलेशिया में ईशनिन्दा और ईश्वर के खिलाफ अपशब्द बोलने वालों की खैर नहीं यहां धर्मपुस्तकों के साथ छेड़छाड़ भी खासा गुनाह है नाईजीनिया में ईश निंदा करने वाले को सरेआम गोलियों से भून दिया जाता है ताकि दूसरे लोग ईशनिन्दा से डरें ,सऊदी अरब में भी शरिया अदालतें चलती हैं यहां ईश निन्दा और कुरान से छेड़छाड पर सरेआम फांसी दी जाती है.मालदीव भी इसी श्रेणी में आता है यहां तो लोग भूलकर भी भगवान के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते,कतर भी उन इस्लामिक देशों में शामिल है जहां ईशनिन्दा पर फांसी पर लटका दिया जाता है. समुद्री लुटेरों के चलते चर्चा में रहने वाले सोमालिया में भी ईशनिन्दा करने वाले को कानूनन सजा ए मौत का प्रावधान है. सूडान में खुदा का अपमान करने वाले या इस्लाम के खिलाफ बोलने वाले को पत्थर मारकर मार दिया जाता है, इसे संगसार कहते हैं. संयुक्त अरब अमीरात में  ईशनिंदा के अलावा ईश प्रतीक जैसे कुरान के साथ छेड़छाड़ पर भी मार डाला जाता हैयमन में यहां मौत की सजा पाने वाले शख्स को सावर्जनिक स्थान पर उल्टा लिटाकर गोली मार दी जाती हैअफगानिस्तान में भी नास्तिक और ईश निन्दा करने वाले को सरेआम मौत की नींद सुला दिया जाता है मौरिशानिया में भी नास्तिकों को मौत की सजा दी जाती है।