पैसा कमाने वाली बैकों की लचर सेवा-लचर एटीएम, लचर सुरक्षा!



देश की विशेषकर छत्तीसगढ़ में मौजूद राष्ट्रीयकृत बैंकें जनता का कितना भला करती हैं यह तो वे ही बता सकते हैं लेकिन हम जो आंखों से देखते हैं और महसूस करते हैं वह यही है कि यह बैंक अपने उपभोक्ताओं के प्रति खरा नहीं उतर रहे हैं- बैेंक ों को अपने हित व अपनी कमाई की ज्यादा चिंता है. उपभोक्ता जाये भाड़ में -हम तो अपनी चाल चलेंगे- के सिद्वान्त पर चल रहे हैंं जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. यह तो किसी अच्छे इंसान  की उपज थी जिसने पैसा निकालने और भरने की मशीन बना दी वरना आज बैंक और  तानाशाह बैंकों के रूप में जाने जाते.आप में से कई लोगों छत्तीसगढ़ के एटीएमों से पाला पड़ा होगा और आपने उसकी कार्यप्रणाली पर कोसा भी होगा, ऐसे में से ही एक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एनआईटी के सामने लगा है एक एटीएम है और दूसरा डिपोजिट मशीन जो इतनी पुरानी व घटिया हो गई है कि इसे क बाड़ी भी न खरीदे-अक्सर इसको खराब है के कार्डबोर्ड से बंद कर दिया जाता है.यही हाल कचहरी ब्रांच में स्थापित पैसा जमा भरने की मशीन का है. एटीएम व सेविंग  मशीन दोनों अक्सर खराब रहती है.कचहरी  चौक जहां संपूर्ण छत्तीसगढ़ पैसा निकालने भरने उमड़ पडता है उसमें गार्ड सोते रहते हैं और मशीन  पर अक्सर बोर्ड लगा रहता है कि आप पडंरी कपड़ा मार्केट के मशीन की सेवा ले. यह उदाहरण है स्टेट बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवा के बारे में जबकि इसी सप्ताह मंगलावार-बुधवार की दरम्यानी रात  सरगुजा जिले के बतौली स्थित एसबीआई की ब्रांच में चोरों ने धावा बोलकर करीब एक करोड़ की चोरी को अंजाम दिया. बैंक के पिछले हिस्से में चैनल गेट का ताला तोड़कर चोर भीतर घुसे और गैस कटर की मदद से तिजोरी को काटकर करीब 17 लाख रुपए नकद और गोल्ड लोन के एवज में रखे सवा तीन किलो सोने के जेवर चुरा ले गए.स्टेट बैॅंक में इतना रूपया होने के बाद भी सशस्त्र सुरक्षा व्यवस्था न होना बैंक प्रबंधन की लापरवाही को ही प्रदर्शित करता है. स्थानीय प्रशासन के बार बार कहने के बावजूद स्टेट बैंक सहित अन्य सभी बड़े बैंको का प्रबंधन ग्राहकों से अनाप शनाप राशि वसूलने  के बाद भी न सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करता है और न ही ग्राहक को संतुष्ट कर देने वाली सेवा प्रदान करता है. बहुत से एटीएम ऐसे हैं जिसके दरवाजे तक लोग निकाल ले गये. जब कोई देखने वाला नहीं तो चोरों की चांदी होना स्वाभाविक है.प्राय: सभी बैंकों के एटीएम में एकसाथ कई लोग पहुंच जाते हैं और पूरा ट्रांसेक्शन देखते रहते हैं फिर ऐसे में साइबर क्राइम न हो तो क्या होगा? सुरक्षा की पोल खुलने के बाद अब बैंकों में यह आदेश भी पहुंचने वाला है कि  एटीएम पर वारदात हुई तो बैंक मैनेजर पर भी कार्रवाई होगी मगर इसकी  संभावना भी कम ही नजर आती है. एटीएम पर सुरक्षा के लिए बैंक भी उतना ही जिम्मेदार है जितनी पुलिस. अधिकांश एटीएम पर शाम होते ही एटीएम के शटर गिर जाते हैं यही वजह है कि एटीएम अपराधियों के निशाने पर है. एटीएम पर 24 घंटे गार्ड की तैनाती होनी चाहिए जोकि नहीं है। एटीएम मशीन स्थापित करते समय बैंक मशीन के केबिन में तमाम संसाधन स्थापित करता है.मशीन के केबिन में सीसीटीवी कैमरा भी लगाया जाता है, यूं कहें कि दिन में एटीएम पर गार्डों की तैनाती होती है, मगर रात्रि को कोई गार्ड नहीं होता है. मशीन में लाखों रुपये कैश रहता है. वारदात होने की स्थिति में बैंक सुरक्षा का ठीकरा पुलिस के सिर फोड़ देते हैं। छत्तीसगढ़ में बहुत सालों से थानों के एसएचओ को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे अपने अपने क्षेत्र में देखें किस बैंक के एटीएम पर गार्ड हैं या नहीं,यदि नहीं तो संबंधित बैंक मैनेजर को स्पष्ट बता दे हैं कि वह सुरक्षा के मद्देनजर गार्ड की तैनाती करें.इस आदेश का कितना पालन हुआ है यह भी  देखने  की बात है.असल बात तो यह है कि बैंक के अधिकारी और कर्मचारी दोनों अपने  आपको किसी सुपर पावर से कम नहीं समझते यही वजह है कि चाहे बैंक लुट जाये या तिजोरी को कोई उठा ले जाये उन्हें कोई फरक नहीं पड़ता और न ही उनपर कोई सख्त कार्रवाई होती है.







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