सोमवार, 18 अप्रैल 2016

रेस्क्यू आपरेशन... और वीवीआईपी की घटनास्थल पर दस्तक!





यह पहला विवाद नहीं है जब कोई वीवीआईपी या वीआईपी के तत्काल दुर्घटना स्थल पहुंचने से रेस्क्यू आपरेशन के प्रभावित होने की बात कही गई हो. केरल के मंदिर में आगजनी के बाद अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व राहुल गांधी के पहुंचने पर वहां बवाल खड़ा हो गया कि उनके पहुंचने से राहत कर्मियों का ध्यान बंट गया तथा राहत कार्य प्रभावित हुआ. इससे पूर्व हरियाणा के खुले बोर में एक बच्चे के गिरने के बाद चले रेस्कयू आपरेशन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा के पहुंचने के बाद भी इसी प्रकार की  बात हुई थी-और भी कई हादसे देशभर में ऐसे हुए हैं जहां वीवीआईपी या वीआईपी के पहुंचने से रेस्कयू कार्य प्रभावित होने की बात कही गई. इसमें दो मत नहीं कि किसी भी रेस्कूय कार्य के दौरान बड़े नेताओं के पहुंचने से आप्रेशन में कुछ बाधा तो उत्पन्न होती ही है लेकिन इस मामले में जहां तक नरेन्द्र मोदी का सवाल है,यहां मोदी डाक्टरों की एक पूरी टीम भी साथ लेकर गये थे-ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ. मोदी अकेले पहुंचते तो यह संभव था कि आप्रेशन में बाधा पहुंचती लेकिन अचानक बना उनका यह दौरा एक खास मकसद को लेकर था जिसमें पीडि़तों को तत्काल मदद पहुंचानी थी. हादसों में पहली प्राथमिकता पीडि़त को बचाने को लेकर ही रहती है ऐसे में अगर कोई वीवीआईपी आ जाता है तो रेसक्यू कार्य में लगे सारे अफसरों व कर्मचारियो का ध्यान पीडि़तों को छोड़कर वीवीआईपी की तरफ बंट जाता है.केरल के कोल्लम मंदिर मेंं अग्रिकांड के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी  दोनों का कार्यक्रम बना और वे वहां पहुंच भी गये. सारे रेस्क्यू  स्टाफ का डायरेक्शन पीडि़तों की और से मुडकर इन वीवीआईपी लोंगों की तरफ चला गया. केरल के हेल्थ चीफ ने सीधे सीधे कह दिया कि मोदी के आने से राहत कार्य प्रभावित हुआ और उन्हें धक्का तक दिया. केरल के अधिकारी साफ तौैर पर कह रहे हैं कि कोल्लम हादसे के बाद तिरुअनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती घायलों से मिलने पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी समेत कई वीवीआईपीज का दौरा अनुचित था. यहां मंदिर में आग लगने की वजह से 113 लोगों की मौत हो गई, जबकि बहुत सारे लोग झुलस गए थे. इन लोगों को मेडिकल कॉलेज के बर्न आईसीयू वॉर्ड में भर्ती किया गया था. हेल्थ चीफ के अलावा केरल के डीजीपी ने भी  इस मुद्दे पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा था कि सुरक्षा कारणों की वजह से वे नहीं चाहते थे कि मोदी दौरा करें, लेकिन पीएम की ओर से जोर देने की वजह से उन्हें सारे इंतजाम करने पड़े.अफसरों की  इन  सब बातों के बावजूद मोदी और राहुल गांधी  अस्पताल पहुंचे थे, यहां भर्ती आठ में से सात पेशंट बेहद नाजुक हालत में थे. डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज का तो यहां तक कहना था  कि जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे इन लोगों के शरीर 60 से 90 फीसदी तक जल गए थे जब मोदी पहुंचे तो उनके साथ धक्का मुक्की हुई. सिक्युरिटी वालों से बहस करने के बाद डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन और डन्हें अपने कमरों में लौटना पड़ा.यह चिकित्सक अब यह भी कह रहे हैं कि एक ऐसे अस्पताल, जहां जले हुए शरीरों और झुलसे मरीजों का जमावड़ा लगा हो, वीवीआईपीज का आना अनुचित था। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यहां के चिकित्सकों को नरेन्द्र मोदी का आना खटका या उनके साथ डाक्टरों की टीम का दिल्ली से पहुंचना खटका?शायद इन चिकित्सकों को ऐसा लगा कि उनकी क्षमता का आंकलन कम कर दूसरे चिकि त्सको को साथ लेकर पहुंचा गया. इस  बीच वे यह भी कह रहे हैं कि अगर मोदी हादसे के कुछ घंटों के भीतर आने की बजाए दो या तीन दिन बाद आते तो हमें कोई समस्या नहीं थी, वे एक ऐसे वक्त में पहुंचे जिसे हम पीडि़तों को बचाने के लिए 'सुनहरा वक्तÓ मानते हैं.बहरहाल यह मामला यहां राजनीतिक रंग ले गया लेकिन अक्सर होने वाले ऐसे हादसों के बारे में  जिसमें वीवीआई पी पहुंचते हैं उसमें कुछ तो कार्य प्रभावित होता ही है. अगर ऐसे हादसों में स्पाट निरीक्षण कर पीडि़तों को मदद पहुंचाना है तो यह काम देर से भी किया जा सकता है.