मंगलवार, 15 मार्च 2016

इंसान- इंसान का दुश्मन, हाथी भालू भी दुश्मन बनें!




जंगली जानवरों की क्रू रता का इलाज क्या है? छत्तीसगढ़ के लोग इस समय दोहरे या कहे तिहरे आतंक का सामना कर रहे हैं- एक तरफ बस्तर  के आदिवासी क्षेत्र में नक्सलवाद के रूप में इंसानी आतंक है तो दूसरी तरफ रायगढ़, जशपुर, महासमुन्द में जंगली जानवरों ने आंतक मचा रखा है. शहरी क्षेत्रों में चोर उचक्के और लुटेरों व असामाजिक तत्वों के आंतक से लोग परेशान है. इंसानी आंतक के लिये तो हम पुलिस को कोस सकते हैं लेकिन जानवरों की तरफ से होने वाली हिंसा के लिये कौन जिम्मेदार है? शायद इसके लिये भी इंसान ही जिम्मेदार है, जिसने इन जानवरों के घरों को उजाड़ दिया. भारी तादात में जंगल कटने से नाराज जानवरों की बुद्वि में यही आ रहा है कि इसके लिये इंसान ही दोषी है.जशपुर में जहां हाथियों का आंतक है तो पत्थलगाव और अन्य कई इलाको में सर्पो का और अब शेर  तेन्दुए के बाद  एक नये आंतक का फैलाव महासमुन्द में हुआ है. यहां भालू ने इंसानों पर हमला करना शुरू कर दिया है. महासमुंद जिले के नवागांव पहाड़ी में शनिवार को एक ही दिन भालू ने डिप्टी रेंजर समेत तीन लोगों को नोच-नोचकर मार डाला. हालाकि घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की ज्वॉइंट टीम ने भालू को मार गिराया किन्तु इस घटना ने कई प्रशन उजागर कर दिये कि आखिर ऐसा क्यों  हो रहा है? हाथी-भालू यहां तक कि तेन्दुआ सभी अब इंसान के कट्टर दुश्मन होते  जा रहे हैं.नवागांव का रहने वाला शत्रुघ्न दीवान (35) सुबह चार बजे महुआ बीनने जंगल की ओर गया था,वहीं का रहने वाला धनसिंह दीवान (65) सुबह 8 बजे लकडी बीनने निकला था ,दोपहर तक दोनों के शव जंगल में दो-ढाई सौ फुट के फासले पर अलग-अलग पडे मिले.चश्मदीदों के मुताबिक भालू ने गुरिल्लों की तरह घात लगाकर हमला किया और दोनों को मार डाला.घटना की सूचना के बाद वन विभाग व पुलिस का अमला भालू की खोज में जंगल की ओर रवाना हुआ. इसी दौरान भालू ने फिर हमला किया और वन विभाग के डिप्टी रेंजर केडी साहिल (60) को भी मार डाला,तब तक वहां मौजूद टीम ने फायरिंग कर भालू को भी मौत के घाट उतार दिया लेकिन करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद शवों को रिकवर किया जा सका यह बताया जा रहा  है कि जंगली जानवर भी संगठित होकर इंसानों से दुश्मनी पर उतर आये चूंकि वन विभाग की टीम और गांववाले जब भी शवों की तरफ बढ़े भालू हमला कर देते,कुछ ही महीनों पहले एक खबर महासमुन्द से आई थी कि वहां एक मदिर में भालू हमेशा पहुंचते हैं और  इंसानों से प्रसाद आदि ग्रहण कर चले जाते हैं वे किसी  को कुछ नहीं करते, अचानक अब यह नया कैसे हो गया? बहरहाल भालू की बात को किनारे लगाकर देखे तो हाथी की भूमिका भी छत्तीसगढ़ व उडीसा में दुश्मनों की तरह है. पिछले साल के अक्टूबर से लगातार हाथियों के हमले हो रहे हैं. एक पचास वर्षीय व्यक्ति की कुचलकर हत्या के बाद भी प्रशासन हाथ पर धरे बैठे रहा,  हां लोग रात में ड्रम बजाकर व शोर मचाकर यह कोशिश जरूर करते हैं कि हाथी उनके पास तक न पहुंचे. हाथियों के उत्पात ने कई गांवों की नींद खराब कर दी है. जशपुर इलाके के दो सौ गांवों के करीब पांच सौ घरों के लोग हाथियों से परेशान हैं. वे उनकी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं घरों को तबाह कर देते हैं तथा सामने इंसान दिखे तो पहले सूण्ड से उठाते हैं, फेंकते हैं और फिर पैरों से कुचलकर मार डालते हैं.  सालभर निर्दोषों की हत्या,फसल व संपत्ति को नुकसान का सिलसिला चलता रहा है विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल कटने और उनके भोजन के लाले पडऩे का जिम्मेदार वे इंसानों को मानते हैं तथा उनपर अपनी खीज निकालते हैं. जशपुर जिले का बगीचा,कुनकुरी और फरसबहार इस समय हाथियो से सर्वाधक प्रताडि़त इलाके हैं.करीब डेढ़ सौ हाथियों का झुण्ड पूरे इलाके में तबाही व दहशत फैलाये हुए हैं. देश के दूसरे कई राज्यों में भी हाथियों के समूह है जिनमे से कइयों को इंसानों ने अपने काम में लगा रखा है. कहते हैं दंतेल हाथी अकेले रहता है तभी वह लोगों पर हमला करता है लेकिन यहां तो पूरा का पूरा कुनबा साथ में रहता है और लोगों के घर व संपत्ति को बरबाद कर रहा है.कोदराम की मृत्यु से सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार संरिक्षत जनजाति की रक्षा भी इसी प्रकार कर रही है? वन अमला हेल्प लाइन की बात करता है लेकिन यह हेल्प लाइन कैसे काम करते हैं किसी को बताने की जरूरत नहीं.हाथियों के उत्पात की यह समस्या अकेले छत्तीसगढ़ के जशपुर में ही नहंी है बल्कि कई क्षेत्रों में है इससे निपटने सरकार का प्रयाय शून्य है जब कोरीडोर बनेगा तब की बात अलग है किन्तु ऐसा कोई कोरीडोर अब तक अस्तित्व में नहीं आया है साथ ही सरकार इस गंभीर मामले पर हर तरह से खामोश है.हाथी, भालू, शेर चीता या अन्य कोई भी जंगली जानवरों से होने वाली मौत के लिये सरकार बहुत हद तक जिम्मेदार है चूंकि वन  विभाग के लोगों की लापरवाही से यह जानवर आवासीय क्षेत्रों में घुसते और इंसान को अपना शिकार बनाते हैं.