रविवार, 6 मार्च 2016

नक्सलियों की बौखलाहट या मुठभेड़ का बदला?


डेढ़ दर्जन  ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या की घटना के बाद बस्तर का वह अंदरूनी इलाका अबूझमाड़ फिर  चर्चा में हैं जहां बताया जाता है कि नक्सलियों ने इसी  क्षेत्र को अपना गढ़ बना रखा है. अभी  कुछ दिनों से पुलिस ने सर्चिंग अभियान को कुछ तेज कर रखा है. सी5मान्ध्र में बड़े नक्सलियों के दिख्रने के बाद पुलिस और नक्सलियों के बीच  मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दावा किया कि नक्सलियों के बड़े लीडर जिनपर काफी बड़ा इनाम  रखा गया था इस मुठभेड़ में मारे गये. इस मुठभेड़ के कुछ ही  घंटों बाद अबूझमाड़ के ग्रामीण क्षेत्र से  करीब सोलह लोगों को उठाकर उनकी हत्या कर दी गई. पुलिस इसे नक्सलियोंं की बौखलाहट बता रही है लेकिन  शायद हकीकत यही  है कि नक्सलियों ने यह कृत्य बदले की कार्रवाही के रूप में की है. अबूझमाड़ के गांवों नेतानार,आलबेड़ा,परपा,कुंदला, मठभेड़ा, यह कुछ गांव है जहां से नक्सलियों ने ग्रामीणों को पुलिस की जासूसी  करने का आरोप लगाकर ले गये तथा उनकी हत्या कर दी. पुलिस के लिये यह शायद एक संदेश भी है कि उसने  जो अभियान  अबूझमाड़  में घुसने  का चलाया है वह नक्सलियों को  पसंद नहीं हैं. आईजी नक्सल की राय इसके ठीक विपरीत है वे कहते हैं कि नक्सली पुलिस की लगातार कार्रवाई से नक्सली झल्ला गये हैं. क्या वास्तव में पुलिस की निरंतर कार्रवाही से अबूझमाड़ क्षेत्र में छिपे नक्सली घबरा गये हैं और दूसरे ठिकानों की तलाश कर रहे हैं. क्या पुलिस की लगातार दबिश का ही यह परिणाम है कि ग्रामीणों को उठाकर उनकी  हत्या कर दी गई? नक्सली प्राय: पुलिस को अपना दुश्मन मानते हैं और उनकी ताक में रहते हैं इस बीच हुए एनकाउन्टर का बदला ही  यह हो सकता है वरना ग्रामीणों को नाराज करके अबूझमाड़ को मांद बनाकर रहना शायद नक्सलियों के लिये आसान नहीं है. नक्सलियों ने की 16 लोगों की हत्या, पुलिस ने एनकाउंटर का बदला बताया सारी हत्याएं एक साथ न होकर पिछले सात दिनों में हुई है अबूझमाड़ के 6 गांवों में नक्सलियों ने 16 आदिवासियों को मौत दी  है.  बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे कन्फर्म किया जबकि इस क्षेत्र से मिलने वाली खबरों में कहा गय है कि हत्याओं को लेकर आदिवासी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। पुलिस ने  जो खौफनाक चित्रण  इस हत्याकांड का दिया वह यही बता रहा है कि उन्हें गोद-गोदकर भयानक मौत दी गई है. नक्सलियों ने आदिवासी गांव वालों को चाकू गोद-गोदकर मारा। पुलिस को शक है कि सोलह से ज्यादा लोगों का कत्ल  किया जा सका है. इधर  पुलिस के व्यवहार को लेकर भी पिछले कुछ समय से बस्तर क्षेत्र में उंगलियां उठ रही है. आंकड़े और बढ़ सकते हैं। पुलिस पर जहां फर्जी  मुठभेड़ के आरोप लग रहे हैं वहीं  पुलिस पर आदिवासी  महिलाओं से दुव्र्यवहार का भी आरोप लगाया गया है. दूसरी ओर कुछ दिन पूर्व बाहर से आये मीडिया भी  बस्तर प्रशासन के रवैये से नाराज दिखाई दे रही है.कुछ ने तो यहां प्रशासन पर सहयोग न करने का भी आरोप लगाया है.एक तरह से नक्सल समस्या का हल  कहीं निकलता नजर नहीं आ रहा है बल्कि यहां मुठभेड़, अपहरण,हत्या आत्मसमर्पण,बरामदगी और आरोप प्रत्यारोप का खेल  चल रहा है- एक तरफ से फायरिगं के बाद सर्चिंग फिर मुठभेड़ और  खून खराबा इसी तक सीमित होकर रह गया है.




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