शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

विद्युत उपभोक्ता- दर बढऩे से पहले सकते में!




छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग की बैठक  के बाद अब लोगों में भय है कि आगे आने वाले समय में बिजली वाले उनकी जेब से फिर पैसा निकालेंगे.ऐसी संभावना है कि विद्युत दरों में दस प्रतिशत तक बढौत्तरी हो सकती है वैसे  मांग तो उनतीस प्रतिशत की की गई थी लेकिन बात शायद दस प्रतिशत पर अटक गई है. सवाल उठता है कि क्या आम उपभोक्ता यह बढौत्तरी बर्दाश्त करने की स्थिति में हैं? शायद विद्युत कंपनी को इससे कोई लेना देना नहीं कि कौन क्या  कह रहा हैं,और कहां से लाकर उनकी जेब भरेगा. कंपनी ने ठान लिया है कि वह एक झटका तो उपभोक्ताओं को शीघ्र देगा ही.बात पिछले पांच साल  की जरूरत को देखते हुए की गई थी.बिजली कंपनी के खर्चो और राज्य सरकार की तरफ से मिलने वाले अनुदान  के आधार पर बिजली की दर तय होना है. यह पन्द्रह प्रतिशत से ऊपर का नहीं होगा मगर अभी से भारी अनाप शनाप विद्युत बिल अदा कर रहे बिजली उपभोक्ताओं पर आने वाले दिन जो गाज गिरेगी वह शासद आम उपभोक्ता सहन करने की स्थिति में नहीं होगा.। यूं तो राज्य पावर कंपनी ने उनतीस प्रतिशत बढौत्तरी का प्रस्ताव किया था  लेकिन दावा-आपत्तियों की सुनवाई के बाद प्रस्ताव का अधिकतम आधा ही स्वीकार किया जायेगा. विद्युत मंडल हमेशा यही तर्क देता रहा है कि हम अपने उपभोक्ताओं को दूसरे राज्यों के मुकाबले कम पैसे में बिजली देते हैं लेकिन वे यह नहीं मानते कि जिन राज्यों की वे बात करतें हैं उनमें से अधिकांश को दूसरे राज्यों से बिजली खरीदनी भी पड़ती है जबकि हमारे राज्य में ऐसा नहीं हैं हम खुद अपने संयत्रों से अपने संसाधनों से बिजली का उत्पादन करते हैं ओर अपने उपभोक्ताओं को बिजली की पूूर्ति करते हैं. यह इस अंचल के लोगों का हक है कि वह अपने संसाधनों से उत्पन्न बिजली को एक वाजिब मूल्य पर प्राप्त करें. बार बार विद्युत दर में वृद्वि करने वाली विद्युत कंपनियां सुविधाओं के नाम पर क्या देती है? बहुत से क्षेत्रों में आज भी चौबीस घंटे बिजली नहीं रहती. आंधी-तूफान में और थोड़ी देर बारिश हुई तो बिजली गुल तब कई समय तक लोग अंधेरे में रहते हैं और उसे सुधारने में भी कई समय लगता है.मेेंटेनेंस के नाम पर गर्मी के सीजन में कई घंटों तक बिजली नहीं रहती. छत्तीसगढ़ का विद्युत मंडल शुरू से ही समृद्व और पैसे वाला रहा है तथा हमेशा लाभ में ही रहा है दूसरा सरकार  की तरफ से भी उसे इतना पैसा मिलता है कि वह अपने उपभोक्ताओं को कम दाम पर बिजली सुलभ कर सके लेकिन एकदम से अगले पांच वर्षो की योजना बनाकर उपभोक्त ाओं पर जबर्दस्त हमले की बात समझ में नहीं आती. यह बात पिछले चुनावों के दौरान साफ हो चुकी है कि राज्य के बहुत से गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है फिर आखिर पैदा होने वाली बिजली की खपत कहां हो रही है?क्यों नहीं बड़े चोरी करने वाले लोगों के कनेक्शन पर प्रहार किया जाता?क्यों नहीं देनदारों से सख्ती से वसूल किया जाता?बिजली उत्पादन का एक  बहुत बड़ा हिस्सा यूं ही चला जाता है उसकी भरपाई करने के लिये कोई ठोस पहल करने की जगह आम उपभोक्ताओं पर बिल का बोझ डालना कितना वाजिब हैं? मंडल अपने उपभोक्त ाओं को  जो बिल देता है वह कोई  समझ नहीं पाता-बिल सीधें- सीधे यह नहीं बताता कि आपने  इतनी बिजली खर्च की आप इतना पैसा दीजियें।  करीब दो फिट लम्बे बिल में इतने सारे टैक्स सुरक्षा निधि और न जाने क्या क्या मिलाकर ऐसा भ्रम पैदा कर दिया जाता है कि उपभोक्ता गुस्से से लालपीला होने के कुछ कर नहीं पाता.मंडल पहले अपने उपभोक्त ाओं की समस्याओं का  निदान करें फिर बिल में बढौत्तरी पर फैसला ले।