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सुधारों वाला बजट!-क्या दूरगामी परिणाम निकलेंगे?




रेल यात्रियों को इस बात से संतोष कर लेना चाहिये कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2016 के बजट में यात्री व माल भाड़े में किसी प्रकार की कोई बढौत्तरी नहीं की लेकिन यात्री यह कैसे भूल पायेंगे कि पिछले बजट के बाद से अब तक पीछे के दरवाजे से यात्रियों पर सुविधाओं के नाम पर पैसा निकलवाने का सिलसिला जारी रहा है साथ ही कुछ सुविधाओं में कटौती की गई तो कुछ सुविधाएं बढ़ाई भी गई. हां यात्रियों को लुभावने वादों को पूरा होते देखने के लिये सन् 2020 का इंतजार करना पड़ेगा. जहां तक छत्तीसगढ़ या देश के दूसरे राज्यों का सवाल है इस बार रेलमंत्री ने चालाकी से ऐसा बजट पेश किया है कि किसी को सुविधाओं को लेकर हंगामा करने का मौका नहीं दिया. चार नई ट्रेनों को देशव्यापी चलाने की घोषणा के अतिरिक्त नई कोई ट्रेन का ऐलान न होना लोगों को विशेषकर पार्टी के अंदर ही गुपचुप गुस्सा दिलाने जैसा हो गया.बहराल सुरेश प्रभु ने जो बजट पेश किया वह अब तक के रेल मंत्रियों से एकदम भिन्न ही दिखाई देता है. अब तक जो बजट पेश होते रहे हैं उसे हम एक आम आदमी की तरह देखें तो उसमें से बहुत कुछ तो राजनीति, कूटनीति और राज्यवाद को ध्यान में रखकर किया जाता रहा है. केन्द्र में अगर बिहार का रेल मंत्री तो बिहार को ज्यादा ट्रेने. तामिलनाडू, बंगाल या कर्नाटक का रेल मंत्री तो उनके राज्य को सर्वाधिक ट्रेने और अन्य सुविधाएं. हम छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के लोग सदैव यही आस लगाये बैठे रह जाते कि कब हमारे क्षेत्र का कोई सांसद मंत्री बनेगा और हमारे प्रांत को रेल सुविधाएं प्राप्त होगीं. इस बार भी छत्तीसगढ़ को आशानुरूप कोई सफलता रेल सेवाओं के विस्तार के मामले में नहीं मिली किन्तु बस हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि 2020 तक बहुत कुछ अच्छी सेवा मिलने लगेगी लेकिन इसमें भी लोग यह सवाल कर सकते हैं कि समय का कौन इंतजार कर सकता है?बजट का विश्लेषण करने वाले दूसरे मायने से इसे समझाते हैं- वे कहते हैं कि बजट की खास बात यही रही कि रेल किराया नहीं बढ़ाया गया है और  इस बजट में कोई छत्तीसगढ़ को अलग से कुछ नहीं मिला लेकिन कुछ घोषणाएं ऐसी हुई हैं जिनका फायदा छत्तीसगढ़ केे यात्रियों को भी अन्य लोगों की तरह मिलेगा जैसे 2020 तक हर पैसेंजर को कंफर्म टिकिट अर्थात इसके लिये फिर इंतजार! पिछले बजट की घोषणाओं में से बहुत सी अब तक पूरी नहीं हुई हैं.रेल यात्रियों के मामले में इस बजट की स्थिति यही  है कि मुम्बई  को छोड़कर सभी में एक समान बंट जायेगा-वह भी एक लम्बे समय के इंतजार के बाद जब अच्छे दिन आयेंंगे तब. मुम्बई लोकल प्लेटफार्म ऊंचा करने के लिये काफी राशि रखी गई है.यह जरूरी भी था. कुछ लुभावनी बात यह है कि वेटिंग में भी कन्फर्म ट्रेन टिकट,139 डायल करके भी टिकट कैंसल करवा सकेंगे। एसएमएस के जरिए कोच और बाथरूम क्लीन करवाए जा सकेंगे. ट्रेनों में जरूरी दवाएं और बच्चों के लिए दूध मिलेगा.हर तत्काल काउंटर पर सीसीटीवी लगे होंगे। शिकायत के लिए नई फोन लाइन (182) शुरू होगी. ट्रेनों में 120 बर्थ सीनियर सिटीजंस के लिए आरक्षित होंगे. महिला यात्रियों के लिए स्टेशनों पर पोर्टेबल शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे। महिलाओं को तीस प्रतिशत आरक्षण. बहुत से मामलों में लोगों को चार साल का इंतजार करना पड़ेगा जैसे  देश की सभी ट्रेनों में 2020 तक बायोटॉयलेट लगेंगे। इनमें राज्य से गुजरने वाली ट्रेनें भी शामिल होंगी। स्टेशनों के सुंदरीकरण पर फोकस। इसके तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और रायपुर स्टेशन को शामिल किया जा सकता है। दो साल पहले यहां एअरपोर्ट की तर्ज पर वीआईपी लाउंज बनाने की घोषणा हुई थी।  2 हजार स्टेशनों पर रेल डिस्प्ले नेटवर्क होगा। मनोरंजन के लिए गाडियों में एफएम रेडियो स्टेशन। इसमें साउथ ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और नागपुर स्टेशन को शामिल किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की प्रतिक्रिया में कुछ इसी बात का एहसास होता है जिसमें उन्होने बजट को लोक हितैषी बताते हुए सुधारों वाला बजट कहा है जिसके परिणाम दूरगामी होंगे।

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