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खर्चीले सत्र में हंगामे का साया और सरकार की रणनीति!




पार्लियामेंट का पिछला सेशन हंगामें की भेंट चढ़ गया. कई महत्वपूर्ण बिल अटक गये कोई सरकारी काम नहीं हुआ.हंगामे से देश के खजाने को करोड़ों रूपये की चोट लगी चूंकि संसद की कार्यवाही का हर लम्हा खर्चीला और कीमती होता है. इस बार सरकार की तरफ से एहतियात बरती जा रही है कि संसद में कोई हंगामा न हो.सरकार चाहती है कि बजट सेशन शांतिपूर्ण निपट जाये और अटके बिलों को पास कर दिया जाये. मंगलवार को बजट सेशन का पहला दिन था. राष्ट्रपति के अभिभाषण मेंं भी इस बात की चिंता स्पष्ट झलकी कि सत्र हंगामेदार हो सकता है उन्होने अपने अभिभाषण में भी यह बात कही है कि संसद चर्चा के लिये है हंगामे के लिये नहीं. प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी भी चाहते हैं कि संसद में हंगामा न हो  और कामकाज ठीक से चले. उनका यह कहना ही इसके लिये  काफी है कि देश को बजट सेशन से बड़ी उम्मीद है। दो पार्ट में होने वाले इस सेशन में हंगामा होने के आसार इसलिये भी हैं चूंकि विन्टर सेशन के बाद से अब तक देश में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी है जो विपक्ष को शांत रहने नहीं देगी इसलिये प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों की ंिचंता में दम हैॅ.  विपक्ष जाट आंदोलन और रोहित वेमुला सुसाइड केस पर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश करेगा यह मामला किसी न किसी रूप में उठेगा जो संसद में हंगामें की वजह बनेगी. प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  की अचानक पाकि स्तान यात्रा, पाक से वार्ता का रूक जाना जैसे मुद्दे भी संसद में हंगामें व बहस का विषय बन सकते हैें. सरकार की कोशिश अहम बिलों को पास कराने की है लेकिन सरकार ज्वलंत मुद्दों को कैसे रोकेगी?सरकार यह कहकर अपनी सफलता का दावा कर सकती है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी सेना ने शानदार कामयाबी हासिल की है। ऑपरेशन राहत के तहत  चार हजार भारतीयों और डेढ़ हजार विदेशियों को यमन से निकाला। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला जरूर सफलतापूर्वक निष्फल किया गया लेकि न हमारी कतिपय चूक के कारण इस गंभीर आतंकी हमले में हमारे योग्य और  काबिल जवानों तथा अफसरों को हमें खोना पड़ा है. पठानकोट हमले में इंटेलीजेंस की विफलता भी इस सत्र में सरकार के लिये मुसीबत खड़ी कर सकती है.सरकार को घेरने के लिये इस बार भी विपक्ष के पास कई ठोस मुद्दे हैं परन्तु यह सब तभी होगा जब हम फलेश बैक में जाकर यह देख पायेंगे कि विपक्ष को शांत रखने के लिये सरकार की तरफ से क्या रणनीति अपनाई गई हैं यह सब इसी सप्ताह के बाकी दिनों में स्पष्ट होने लगेगा। पार्लियामेंट का सेशन शुरू होने से पहले  सरकार ने विपक्ष को साथ लेकर एक माहौल बनाने की पूरी कोशिश की है किन्तु यह कहना जल्दबाजी होगी कि सेशन में सब कुछ अच्छा ही होगा. सरकार के पास अपनी सफलता गिनाने के बहुत से बहाने हैंजबकि विपक्ष मंहगाई, रेल भाड़े में वृद्वि जैसे मुद्दों पर भी मुखर हो जाये तो आश्चर्य नहीं.इस सत्र के अंतराल मेंं सोनिया राहुल को जेल भिजवाने का पूरा प्रबंध भी  हो चुका है-क्या विपक्ष इसे भी भूल जायेगा?  सरकार यह कह सकती है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उसने सख्ती बरती है किन्तु देश के अनेक भागों में क्राइम भी तो एक समस्या है जिसपर विपक्ष का रूख क्या होगा कहा नहीं जा सकता. सरकार को उपलब्धियां गिनाने का मौका मिला तो सरकार कहेगी बिजली+घर+सड़क सब ओर काम चल रहा है-बहरहाल  हर कोई यही चाहता है कि सबकुछ ठीक ठाक चले सरकार आम जनता के हित मेें अच्छा बजट पेश करें और लम्बित बिलों पर सरकारी मुहर लगे मगर यह सेशन भी पूर्व की तरह यूं ही चला गया तो बहुत कुछ नुकसान देश को होगा वैसे पहले दिन की शंति से  फिलहाल तो ऐसा  ही लग रहा है कि सब कुछ ठीक ठाक ही रेहेगा.

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