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इतनी पुलिस! फिर भी आम आदमी सुरक्षित क्यों नहीं?


इतनी पुलिस! फिर भी आम आदमी सुरक्षित क्यों नहीं?
वेलेंटाइन डे पर महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से राजधानी में छै सौ जवानों की तैनाती का क्या औचित्य था जबकि उसकी नाक के नीचे सिर्फ दो लुटेरों ने सरे राह एक महिला के गले से सोने की चैन खींच ली और हमारी प्रदेश की पुलिस बस मोटर सायकिले रोकती रही...! छत्तीसगंढ़ के शहरों का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसमें राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर, दुर्ग, शामिल है इन दिनों खास किस्म की परेशानी से जूझ रहा है। महिलाएं सोना पहनकर सडक पर निकलने में डर रही है. इस साल जनवरी से लेकर अब तक महिलाओं के गले से सोने की चैन  खीचकर भागने की करीब एक दर्जन घटनाएं हो चुकी है.पच्चीस जनवरी की दोपहर सवा बारह बजे समता कालोनी में पहली लूट की घटना दर्ज की इसमे एक महिला कल्पना तिवारी को लूट लिया गया. इसके बाद लगातार घटनाओं का सिलसिला जारी रहा और शनिवार तथा रविवार के बीच  मात्र सोलह घंटे  से भीे कम समय में लुटेरों ने सर्वोदय नगर हीरापुर कालोनी की निर्मला राजू को एम्स के पास सडक पर अपना शिकार बनाया जिसमें कीमती सोने का हार उन्हें घायल कर खीचकर ले गये.दूसरी और राजधानी तथा आसपास के शहरों में  घरों के बाहर खड़ी वाहनों को आग लगाने का सिलसिला पिछले कम से कम दो साल से चल रहा है लेकिन हाल ही इसने फिर जोर पकड़ लिया. फायर गेंग की  सक्रियता  ने लोगों की नींद खराब कर रखी है.पुलिस के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं .रायपुर और भिलाई नगर में तो एक सप्ताह के भीतर वाहनों में आगजनी की दो वारदतों में एक दर्जन से ज्यादा कीमती वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. इस मामले में भी अब तक किसी अपराधी को पुलिस शिकंजे में नहीं ले सकी है. दोनों ही तरह के मामले  अपने आप में गंभीर है जो लोगों में भय पैदा कर रहा है और  पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है. अब तक हुई चेन स्नेचिंग की दर्जनों घटनाओं की  तरह पुलिस को रविवार सवेरे हुई वारदात में भी  बस इतना ही क्लू मिला है कि काली बाइक में सवार दो युवकों ने घटना को अंजाम दिया। दोनों युवक हेलमेट लगाये हुए थे.प्राय: हर घटना के बाद घंटों सड़कों पर पुलिस सड़क पर खड़ी रहती है ओर आने वालों की  जांच करती है फिर सबकुछ खत्म कर अगली  वारदात का इंतजार करती है। राजधानी रायपुर में 25,जनवरी  को जहां चेन  पुलिंग की तीन वारदात हुई वहीं 27 जनवरी को तीन  वारदात हुई। 28 जनवरी को दुर्ग में एक महिला का चेन पार किया गया.26 जनवरी को जब भिलाई में वारदात हुई उसी दिन पडौसी राज्य महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में भी ऐसी ही वारदात हुई। पुलिस का अंदाज है कि नागपुर का कोई गेंग सक्रिय है लेकिन किसी  की भी  गिरफतारी न होना तो यही दर्शाता है कि अपराधी पुलिस   व जनता दोनों से तेज तर्रार है जो वारदात पे वारदात करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसमें दो मत नहीं कि घटना के तुरन्त बाद पुलिस की सक्रियता काबिले तारीफ हैं लेकिन इस सक्रियता पर ग्रहण उस समय लग जाता है जब खोजबीन में कुछ हाथ नहीं लगता. रायपुर के पुलिस अधीक्षक ने शनिवार को एक पत्र में दावा किया था कि लूट की सभी घटनाओं की जांच के लिये क्राइम ब्रांच  की टीम बनाई गई  है-उनका यह भी कहना है कि सभी शहरों के सीसीटीवी  फुटेज के आधार पर अपराधियों की गिरेबान पर शीघ्र हाथ डाला  जायेगा लेकिन उनकी इस घोषणा के बाद ही दूसरे दिन रविवार को राजधानी में सुबह दिनदहाड़े निर्मला राजू के गले से चैन  खीचने की घटना को अपराधियों की तरफ से पुलिस को चुनौती  नहीं तो और क्या समझे? 

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …