शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

इतनी पुलिस! फिर भी आम आदमी सुरक्षित क्यों नहीं?


इतनी पुलिस! फिर भी आम आदमी सुरक्षित क्यों नहीं?
वेलेंटाइन डे पर महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से राजधानी में छै सौ जवानों की तैनाती का क्या औचित्य था जबकि उसकी नाक के नीचे सिर्फ दो लुटेरों ने सरे राह एक महिला के गले से सोने की चैन खींच ली और हमारी प्रदेश की पुलिस बस मोटर सायकिले रोकती रही...! छत्तीसगंढ़ के शहरों का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसमें राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर, दुर्ग, शामिल है इन दिनों खास किस्म की परेशानी से जूझ रहा है। महिलाएं सोना पहनकर सडक पर निकलने में डर रही है. इस साल जनवरी से लेकर अब तक महिलाओं के गले से सोने की चैन  खीचकर भागने की करीब एक दर्जन घटनाएं हो चुकी है.पच्चीस जनवरी की दोपहर सवा बारह बजे समता कालोनी में पहली लूट की घटना दर्ज की इसमे एक महिला कल्पना तिवारी को लूट लिया गया. इसके बाद लगातार घटनाओं का सिलसिला जारी रहा और शनिवार तथा रविवार के बीच  मात्र सोलह घंटे  से भीे कम समय में लुटेरों ने सर्वोदय नगर हीरापुर कालोनी की निर्मला राजू को एम्स के पास सडक पर अपना शिकार बनाया जिसमें कीमती सोने का हार उन्हें घायल कर खीचकर ले गये.दूसरी और राजधानी तथा आसपास के शहरों में  घरों के बाहर खड़ी वाहनों को आग लगाने का सिलसिला पिछले कम से कम दो साल से चल रहा है लेकिन हाल ही इसने फिर जोर पकड़ लिया. फायर गेंग की  सक्रियता  ने लोगों की नींद खराब कर रखी है.पुलिस के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं .रायपुर और भिलाई नगर में तो एक सप्ताह के भीतर वाहनों में आगजनी की दो वारदतों में एक दर्जन से ज्यादा कीमती वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. इस मामले में भी अब तक किसी अपराधी को पुलिस शिकंजे में नहीं ले सकी है. दोनों ही तरह के मामले  अपने आप में गंभीर है जो लोगों में भय पैदा कर रहा है और  पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है. अब तक हुई चेन स्नेचिंग की दर्जनों घटनाओं की  तरह पुलिस को रविवार सवेरे हुई वारदात में भी  बस इतना ही क्लू मिला है कि काली बाइक में सवार दो युवकों ने घटना को अंजाम दिया। दोनों युवक हेलमेट लगाये हुए थे.प्राय: हर घटना के बाद घंटों सड़कों पर पुलिस सड़क पर खड़ी रहती है ओर आने वालों की  जांच करती है फिर सबकुछ खत्म कर अगली  वारदात का इंतजार करती है। राजधानी रायपुर में 25,जनवरी  को जहां चेन  पुलिंग की तीन वारदात हुई वहीं 27 जनवरी को तीन  वारदात हुई। 28 जनवरी को दुर्ग में एक महिला का चेन पार किया गया.26 जनवरी को जब भिलाई में वारदात हुई उसी दिन पडौसी राज्य महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में भी ऐसी ही वारदात हुई। पुलिस का अंदाज है कि नागपुर का कोई गेंग सक्रिय है लेकिन किसी  की भी  गिरफतारी न होना तो यही दर्शाता है कि अपराधी पुलिस   व जनता दोनों से तेज तर्रार है जो वारदात पे वारदात करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसमें दो मत नहीं कि घटना के तुरन्त बाद पुलिस की सक्रियता काबिले तारीफ हैं लेकिन इस सक्रियता पर ग्रहण उस समय लग जाता है जब खोजबीन में कुछ हाथ नहीं लगता. रायपुर के पुलिस अधीक्षक ने शनिवार को एक पत्र में दावा किया था कि लूट की सभी घटनाओं की जांच के लिये क्राइम ब्रांच  की टीम बनाई गई  है-उनका यह भी कहना है कि सभी शहरों के सीसीटीवी  फुटेज के आधार पर अपराधियों की गिरेबान पर शीघ्र हाथ डाला  जायेगा लेकिन उनकी इस घोषणा के बाद ही दूसरे दिन रविवार को राजधानी में सुबह दिनदहाड़े निर्मला राजू के गले से चैन  खीचने की घटना को अपराधियों की तरफ से पुलिस को चुनौती  नहीं तो और क्या समझे?