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बिहार चुनाव भविष्य में देश की राजनीति को नये मोड़ पर ले जायेगा?




अब कोई लाख कितना भी कहे मगर यह तो मानना ही पड़ेगा कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी का ग्राफ तेजी से गिरा है.बिहार के चुनाव में इतनी बड़ी पराजय होगी इसकी कल्पना नहीं की थी-चुनाव से पूर्व जो सर्वेक्षण महागठबंधन के पक्ष में आये उसकी संभावना मतगणना के शुरूआती रूझान में जरूर धूमिल होते नजर आई लेकिन जल्द ही यह साफ हो गया कि मोदी लहर बिहार में खत्म हो चुकी है.इन नतीजों के पूर्व शनिवार को त्रिवेन्द्रम के स्थानीय चुनाव में भाजपा को मिली सफलता ने उन्हे जरूर इस बात की उम्मीद दिलाई थी कि बिहार भी उनके हाथ में होगा. दिल्ली में हार का बदला लेने पूरी तरह कमर कसकर भाजपा ने बिहार में अपना दाव खेला था किन्तु उसे सफलता नहीं मिली.असल में भाजपा की सबसे बड़ी गलती तो यह रही कि बिहार में उसने लालू प्रसाद और नीतिश कुमार की ताकत को कम आंका और पूरे विश्वास के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतीष्ठा को ही दांव पर लगा दिया. प्रधानमंत्री देश का प्रधानमंत्री न होकर उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री बना दिया गया. अकेले अमित शाह को प्रचार अभियान की बागडौर सौंप दी जाती और कुछ अन्य स्टार प्रचारकों के हाथ मेंं यह काम सौंपा जाता तो शायद पार्टी को इतनी छिछलालदर का सामना करना नहीं पड़ता. चुनाव के दौरान पार्टी के कतिपय नेताओं के बड़बोलेपन ने भी पार्टी की साख को जनता के सामने एकदम  गिराकर रख दिया. ऊलजलूल मुद्दे उछालने से यह कहा जा सकता है कि इससे पार्टी को पूरी तरह नुकसान का ही सामना करना पड़ा. दूसरी प्रमुख बात यह कि  दिल्ली और बिहार दो राज्य हाथ से निकल जाने के बाद अब आगे होने वाले कुछ और अन्य विधान सभा चुनाव के लिये भाजपा को अपनी रणनीति में भारी बदलाव करना पड़ेगा. दूसरी साख में आई गिरावट का असर देश की राजनीति में पडऩा स्वाभाविक है. एक बात इस चुनाव में साफ हो गई कि अब जनता को भरमाने, उसे ठगने के दिन लद गए. दोनों खेमों अर्थात एनडीए और महागठबंधन ने खूब मेहनत की लेकिन चुनाव के आखिरी दौर में जो चुनावी विश£ेषण आया वह साफ यह बता रही थी कि महागठबंधन अर्थात लालू नीतिश कुमार की जोड़ी को अच्छी सफलता मिलने वाली है. यह हुआ भी साथ ही गठबंधन में शािमल पार्टियों ने भी बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया. कांग्रेस गदगद है तो दूसरी तरफ एनडीए में रामविलास पासवान और जितन राम मांझाी को लगे झटके इतने तेज हैं कि उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य ही खतरे में आने लगा  है.यद्यपि अभी जब हम इन पंक्तियों को लिख रहे हैं तबतक चुनाव परिणाम पूरे नहीं आ पाये थे फिर भी यह तय हो चुका है कि महागठबंधन सरकार बना रही है और भाजपा ने हार स्वीकार कर ली है ऐसे हालात में लालू की पार्टी बड़ी पार्टी के रूप में उबर रही है और मुख्यमंत्री पद के लिये भी कोई विवाद नहीं है नीतिश ही मुख्यमंत्री होगें यह शरद यादव ने स्पष्ट कर दिया है. आगे आने वाले समय में महागठबंधन देशभर में क्या रणनीति बनायेगा यह तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन भाजपा में अंदर ही अंदर बहुत कुछ हो सकता है.


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