खामोश शहर पर फिर डकैतों ने अस्तित्व की छाप छोड़ी दस्युओं की पुलिस को चुनौती!

एक बार फिर राजधानी रायपुर में कठोर अपराधियों ने अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाया है. सेल टैक्स कालोनी के भावना नगर मेें डकैतों ने चंद दिनों के भीतर एक और परिवार को शिकार बनाया, इससे पूर्व समता कालोनी में भी डकैत अपना जलवा दिखा चुके हैं जबकि क्रीस्ट सहायता केन्द्र की नन से बलात्कार के आरोपी भी अब तक छुट्टा घूम रहे हैं लेकिन उस समय तो सारा पुलिस महकमा खुशी से झूम रहा था जब एक उद्योगपति को अपहरण के कुछ घंटो बाद ही रिहा करा लिया गया. उस समय बड़े बडे लोगों ने इस पर संज्ञान लिया और पुलिस को ढेर सारी बधाइयां दी, अब क्या हो गया? क्यों पुलिस खामोश है? आज जब भावना नगर की घटना हुई तो शाबाशी देने वालों को सांप क्यों सूंघ गया? दो डकैती कांड और नन बलात्कार कांड की भीषण और रहस्यमय घटना से जहां सारा शहर दुर्घन्धित है जबकि ऐसी अनेक -अनेक अनसुलझी घटनाओं से शहर के थानों के पन्ने भरे पड़े हैं लेकिन पुलिस हैं कि कयास लगाती बैठी है. भावना नगर में डकैती की घटना में सबकुछ ठीक वैसे ही हुआ जैसे समता कालोनी के इन्कम टैक्स वकील अग्रवाल के घर हुआ. कोई फरक नहीं, वहां ग्रिल तोड़कर घुसे और सेल्सटैक्स  कालोनी के भावनगर में दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तथा परिवार को बंधक बनाकर खंजर गले पर टिका दिया.- वाह अपराधी! इस शहर को किस तरह निशाना बना रहे हो? और बेबस बेचारी पुलिस को तुम एक सुराग भी नहीं छोड़ रहे. वास्तव में हमारी पुलिस को ऐसा ही जवाब मिलना चाहिये क्योंकि वह जब किसी अपराधिक मामले को जैसे तैसे सुलझा लेती है तो फूल के कुप्पा हो जाती है और इसकी खुमारी उनके सर से कई दिनों तक नहीं उतरती. ऐसे कितने ही मामले हैं जो आज राजधानी रायपुर में पुलिस के बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे पड़े पड़े धूल खा रहे हैं. आखिर क्या कारण है कि पुलिस अपराध के कई दिनों बाद भी अपराधियों की गिरेबान तक नहीं पहुंच पाती? हमारा पुलिस तंत्र क्या सड़क पर चलने वाले किसी स्कूटी सवार या सीधे-साधे नियम कानून का पालन करने वाले व्यक्ति से सख्ती करने तक ही सीमित होकर रह गया? कितने ही पैसे वालों के छोकरे आज सड़कों पर स्टंट करते घूम रहे हैं जो आम लोगों के लिये सरदर्द बने हुए हंै- क्या उनसे कभी पुलिस ने पूछताछ की कि उन्हें उनके मां बाप ने कितना जेब खर्च दिया हैं?या वे कहां से यह पैसा लाते हैं? प्लेन की आवाज करने वाले मोटर सायकिलों में यह लड़के कालोनियों में लोगों की नींद हराम कर रहे हैं और पुलिस या प्रशासन के किसी को इसकी ङ्क्षचता नहीं- इन्हीं सब बातों का फायदा उठाकर अंदर और बाहर के अपराधी अपना काम कर जाते हैं और हमारी बहादुर पुलिस देखती रह जाती हैै. समता कालोनी उसके बाद पूर्व प्रोफेसर दंपत्ति के परिवार के साथ घटित घटना रोंगटे खड़े कर देने और दहशत फैला देने वाली है, इस प्रकार की घटनाएं घटित होने वाले परिवार को तो दहशत में डालता ही है साथ ही आसपास रहने वालों की भी नींद हराम कर देता है. डर के मारे लोग सो नहीं पा रहे हैं और जिनको इन घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी है वे या तो अपने घरों में चैन की नींद सुरक्षित सो रहे हैं या फिर यही आंकलन करते बैठे रह जाते हैं कि कौन हो सकता है इस डकैती में -कंजर,पारधी या लोकल? बस अनुमान लगाते रहते हैं फिर सब भूल जाते हैं तब तक दूसरी घटना हो जाती है.

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