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जूता-चप्पल फेक से कालिख पोत तक का सफर-समय के साथ बदलता रहा,विरोध का तरीका भी!



जूता-चप्पल फेक से कालिख पोत
तक का सफर-समय के साथ
बदलता रहा,विरोध का तरीका भी!
सन् दो हजार आठ से दुनिया में बड़े और नामी नेताओं तथा ख्याति प्राप्त लोगों पर जूता- चप्पल फेकने और अपना ध्यान आकर्षित कराने का एक सिलसिला चला हुआ है.विदेश ही नहीं हमारे देश में भी कई बड़े नेता अब तक ऐसे विरोध प्रदर्शन की चपेट मेंं कई देशों के पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और देशों के बड़े नेता इसकी चपेट में आ चुके हैं. सन् 2008 में अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्लू बुश पर बगदाद में मुत्ताधर अल जैदी नामक व्यक्ति ने उस समय जूता फेका जब राष्ट्रपति बुश प्रधानमंत्री पेलेस में एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे. 2009 में चीनी प्रधानमंत्री बेन जरिबाओ पर एक 27 वर्षीय जर्मन मार्टिन झोके ने यह कहते हुए जूता फेका कि कैसे हम इनके झूठ को सुने? विदेशों में तो नेल्सल मण्डेला भी इससे नहीं बचे फिर भारत में तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लालकृष्ण आडवाणी,नवीन जिंदल,पी चिदम्बरम जैसी बड़ी हस्तियों के अलावा कर्ई हस्तियां जूता प्रहार झेल चुके हैं जबकि ऐसे कृत्यों के साथ कालिख पोतने की भी घटानाएं लगातार सुर्खिया बनने लगी. जूते या चप्पल का प्रहार सिर्फ एक व्यक्ति करता था और वह पकड़ा भी जाता और उसकी खूब धुनाई भी होती किन्तु कालिख पोतने का काम जब समूह में होता तो यह और भी सुर्खियां बटोरता जैसे मुम्बई में सुधींद्र कुलकर्णी के साथ हुआ. सुधींद्र कुलकर्णी पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम करा रहे थे जिसके विरोध में शिवसेना उतर आई और उसने उनके चेहरे पर कालिख ऐसे पोती कि उन्हें पहचानना तक कठिन हो गया. इसी हालत में उन्होंने न केवल पत्रकार वार्ता ली बल्कि ऐसे ही घूमते भी रहे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर चुनाव प्रचार के दौरान कालिख पोती गई जबकि योग गुरू बाबा रामदेव का भी मुंह काला किया गया. केजरीवाल के पूर्व साथी योगेन्द्र यादव पर भी दिल्ली के जंतर मंतर की भरी सभा में कालिख पोती गई. सहारा ग्रुप के मालिक सुब्रत राय पर कोर्ट से निकलते ही कुछ लोगों ने कालिख पोत कर विरोध किया.पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर 26 अप्रैल 2009 में उस समय जूता फेंका गया जब वे एक इलेक्शन रैली को संबोधित कर रहे थे. लोगों को हरास करने के लिये पूर्व में जूता फै कने की जगह कई अन्य पद्वतियां अपनाई जाती थी जिसमें चेहरे पर कालिख पोतकर गधे पर बिठाना,जूते की माला पहनाकर घुमाना, मुर्गा बनाकर खड़े कर देना आदि लेकिन अब समय के बदलने के साथ साथ हरासमेंट की पद्वतियां भी बदलने लगी है. जूता फे क या कालिख पोतने के क्रम में वर्ष 2015 में अब तक विश्वभर में पांच से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माझी पर जूता फेकने और सुधीर कुलकर्णी कालिख कांड भी शामिल है.

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

याकूब मेनन को फांसी  से पहले व बाद से यह बहस का विषय है कि फांसी दी जानी चाहिये या नहीं अभी भी इसपर बहस जारी है लेकिन इस बीच उम्र कैद का मामला भी सुर्खियों में है कि आखिर उम्र कैद होती है, तो कितने साल की? यह माना जाता रहा है कि उम्र कैद का मतलब है- चौदह साल जेल लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उम्र कैद चौदह साल नहीं बल्कि ताउम्र है याने अपराधी की जब तक जिंदगी है तब तक उसे जेल में ही काटनी होगी. छत्तीसगढ के धीरज कुमार, शैलेन्द्र और तीन दोषियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और वी गोपाला गोवड़ा की बेंच ने समाज के एक वर्ग द्वारा फांसी की सजा के विरूद्व अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह वर्ग चाहता है कि फांसी को खत्म कर उसकी जगह आजीवन कारावास की सजा दी जाये तथा स्पष्ट किया कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद होता है न कि चौदह साल. अपराधी जिसे उम्र कैद हुई है उसे अपनी पूरी उम्र सलाखों के पीछे बितानी होगी. इससे यह तो संकेत मिलता है कि भविष्य में फांसी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने अब तक उम्र कैद के संबन्ध में चली…

काले धूल के राक्षसों का उत्पात...क्यों खामोश है प्रशासन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों-उरला, सिलतरा, सोनढोंगरी,भनपुरी से निकलने वाली काली रासायनिक धूल ने पूरे शहर को अपनी जकड़  में ले लिया है .यह धूल आस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली धूल से 18 हजार गुना ज्यादा है.
यहां करीब तीन दर्जन उद्योग ऐसे हैं जो चौबीसों घंटे धूल भरी आंधी उगल रहे हैंं ,जिसपर किसी का कोई नियंत्रण नहीं ह्रै. नियंत्रण है तो भी वह कुछ दिनों में छूटकर आसमान और धरती दोनों पर कब्जा कर लेते हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. यह संख्या चीन से ज्यादा है.प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से जहां 1640 लोगों की मौत के मुकाबले चीन में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या (1620 ) ज्यादा है. यह आंकड़े हम यहां इसलिये पेश कर रहे हैं ताकि रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये इसपर नियंत्रण पाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये. वायूु प्रदूषण के बगैर स्मार्ट सिटी,डिजिटल सिटी बनाने का सपना पूरा हो पाना कठिन है. आज स्थिति यह है कि एक स्थान पर कालेधूल को हटाया जाता है तो शहर का दूसरा भाग कालिख पुतवा लेत…

ऊची दुकान फीके पकवान!

रायपुर दिनांक 4 अक्टूबर 2010

ऊँची दुकान फीके पक वान!
कभी बच्चो को परोसे जाने वाला मध्यान्ह भोजन तो कभी होटल, रेस्टोरेंट से खरीदी गई खाने की सामग्री तो कभी किसी समारोह में वितरित होने वाले भोजन के जहरीले होने और उसको खाने से लोगों के बीमार पडऩे की बात आम हो गई हैं। अभी बीते सप्ताह शनिवार को नई राजधानी में सड़क निर्माण कंपनी के मेस का खाना खाकर कई मजदूर बीमार हो गये। कइयों की हालत गंभीर थी। मेस को हैदराबाद की बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी चला रही थी। सबसे पहला सवाल यह उठता है कि जब कोई कंपनी या समारोह में इतने व्यक्तियों का खाना एक साथ पकता है उसे लोगों में बांटने के पहले जांच क्यों नहीं होती? खाना बनाने से पहले यह क्यों नहीं देखा जाता कि जहां खाना बनाया जा रहा है वहां का वातावरण पूर्ण साफ सुथरा है या नहीं। स्कूलों में बच्चों को वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन में भी कुछ इसी तरह का होता आ रहा है। बच्चो को जो खाना बनाने के लिये कच्चा माल पहुँचता है उसका उपयोग करने से पहले उसकी सही जांच पड़ताल नहीं होती फलत: उसमें कीड़े मकोड़े व अन्य जीव जन्तु भी मिल जाते हैं। अक्सर समारोह व शादी …