बुधवार, 14 अक्तूबर 2015

जूता-चप्पल फेक से कालिख पोत तक का सफर-समय के साथ बदलता रहा,विरोध का तरीका भी!



जूता-चप्पल फेक से कालिख पोत
तक का सफर-समय के साथ
बदलता रहा,विरोध का तरीका भी!
सन् दो हजार आठ से दुनिया में बड़े और नामी नेताओं तथा ख्याति प्राप्त लोगों पर जूता- चप्पल फेकने और अपना ध्यान आकर्षित कराने का एक सिलसिला चला हुआ है.विदेश ही नहीं हमारे देश में भी कई बड़े नेता अब तक ऐसे विरोध प्रदर्शन की चपेट मेंं कई देशों के पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और देशों के बड़े नेता इसकी चपेट में आ चुके हैं. सन् 2008 में अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्लू बुश पर बगदाद में मुत्ताधर अल जैदी नामक व्यक्ति ने उस समय जूता फेका जब राष्ट्रपति बुश प्रधानमंत्री पेलेस में एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे. 2009 में चीनी प्रधानमंत्री बेन जरिबाओ पर एक 27 वर्षीय जर्मन मार्टिन झोके ने यह कहते हुए जूता फेका कि कैसे हम इनके झूठ को सुने? विदेशों में तो नेल्सल मण्डेला भी इससे नहीं बचे फिर भारत में तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लालकृष्ण आडवाणी,नवीन जिंदल,पी चिदम्बरम जैसी बड़ी हस्तियों के अलावा कर्ई हस्तियां जूता प्रहार झेल चुके हैं जबकि ऐसे कृत्यों के साथ कालिख पोतने की भी घटानाएं लगातार सुर्खिया बनने लगी. जूते या चप्पल का प्रहार सिर्फ एक व्यक्ति करता था और वह पकड़ा भी जाता और उसकी खूब धुनाई भी होती किन्तु कालिख पोतने का काम जब समूह में होता तो यह और भी सुर्खियां बटोरता जैसे मुम्बई में सुधींद्र कुलकर्णी के साथ हुआ. सुधींद्र कुलकर्णी पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम करा रहे थे जिसके विरोध में शिवसेना उतर आई और उसने उनके चेहरे पर कालिख ऐसे पोती कि उन्हें पहचानना तक कठिन हो गया. इसी हालत में उन्होंने न केवल पत्रकार वार्ता ली बल्कि ऐसे ही घूमते भी रहे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर चुनाव प्रचार के दौरान कालिख पोती गई जबकि योग गुरू बाबा रामदेव का भी मुंह काला किया गया. केजरीवाल के पूर्व साथी योगेन्द्र यादव पर भी दिल्ली के जंतर मंतर की भरी सभा में कालिख पोती गई. सहारा ग्रुप के मालिक सुब्रत राय पर कोर्ट से निकलते ही कुछ लोगों ने कालिख पोत कर विरोध किया.पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर 26 अप्रैल 2009 में उस समय जूता फेंका गया जब वे एक इलेक्शन रैली को संबोधित कर रहे थे. लोगों को हरास करने के लिये पूर्व में जूता फै कने की जगह कई अन्य पद्वतियां अपनाई जाती थी जिसमें चेहरे पर कालिख पोतकर गधे पर बिठाना,जूते की माला पहनाकर घुमाना, मुर्गा बनाकर खड़े कर देना आदि लेकिन अब समय के बदलने के साथ साथ हरासमेंट की पद्वतियां भी बदलने लगी है. जूता फे क या कालिख पोतने के क्रम में वर्ष 2015 में अब तक विश्वभर में पांच से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माझी पर जूता फेकने और सुधीर कुलकर्णी कालिख कांड भी शामिल है.