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October, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुद्दे की बात को किनारे कर फिजूल की बातों पर यह कैसा शोर?

फेसबुक और व्हाट्सअप में दुनिया तो जुड़ेगी लेकिन क्या साधू और शैतान भी रहेंगे?

पैसा कमाने की होड़ में इंसानियत को भी त्यागने लगे कुछ सेवक(?)

रेप पर अदालतें सख्त,ऐसे लोगों को पशुओं की संज्ञा,बधिया करने की सिफारिश,क्या व्यवस्थापिका भी सोचेगी?

'हाथी मेरा साथीÓ नहीं अब छत्तीसगढ़ के जशपुर और कई क्षेत्रों में 'दुश्मनÓ

किसने किया समाज को विभक्त? क्यों चल रहा है आजाद भारत में दोहरी व्यवस्था का मापदण्ड?

राजनीति की बिगड़ी लगाम को थामने एनजेएसी के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट का फैसला!

खामोश शहर पर फिर डकैतों ने अस्तित्व की छाप छोड़ी दस्युओं की पुलिस को चुनौती!

अंधेरे से उजाले तक का लम्बा सफर,'महुआ वर्षों बाद अब जाकर महका!

जूता-चप्पल फेक से कालिख पोत तक का सफर-समय के साथ बदलता रहा,विरोध का तरीका भी!

'तो के बगैर अब कुछ नहीं, यह अब सरकारी मदद और काम का हिस्सा बना!

विकास की छाया में पल गये कई टैक्स और कंकाल में बदल गया आम आदमी!

सरकार की खामोश जांच प्रणालियां दवा का तो काम करती है,देरी भी उतनी ही!

छत्तीसगढ़ में बुनियादी शिक्षा को यूं बिगाडऩे का ठेका किसने दिया?

रक्त ऐसे बह रहा जैसे नदी बह रही हो, किस-किस पर रोयें?

और अब हूँन ने भी लिख डाली पुस्तक

डेढ़ सौ साल पहले बना लाउड़स्पीकर अब इंसान का दुश्मन बना!

करोड़ों का एम्स क्या अंचल की आशाओं,आकाक्षांओं पर खरा उतर रहा! यहां क्या हो रहा है?