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रायपुर में डकैती तब भी होती थी अब भी,तब पारधी गिरोह का नाम आया अब भी! क्यो सक्रिय है यह गिरोह?


जहां तक मेरी जानकारी है रायपुर में डकै ती का इतिहास बहुत ज्यादा पुराना नहीं है. उस समय रायपुर मेें एक एसपी,एक सीएसपी, एक टीआई और गिने चुने थाने जिसमें कोतवाली, गंज, आजाद चौक शामिल हुआ करते थे, तभी एक दिन खबर आई कि महुआ बाजार में डकैतों का एक गिरोह पकड़ा गया है जो अपने शिकार की तैयारी में था. उस समय के एसपी पूरन बतरिया, सीएसपी बीएल तारन और टीआई नायडू सहित कई अफसर कर्मचारी तुरन्त एक गैरेज में पहुंचे जहां सभी डकैतों को पकड़कर रखा गया था.वहां उनसे पूछताछ में पता चला कि गिरोह में से अधिकांश बाहरी व्यक्ति है जिसमें एक स्थानीय महिला भी थी.गिरोह कोई बड़ी वारदात नहीं कर सका इससे पहले पुलिस ने उन्हे दबोच लिया और पुलिस ने राहत की सांस ली किन्तु डकैतों की इस सक्रियता ने पुलिस को बैचेन करना शुरू किया उसके बाद सर्वोदय नगर हीरापुर कालोनी मेें प्रोफेसर वर्मा के घर डकैतों ने धावा बोला इस डकैती में भी काफी लोग शामिल थे इसके बाद इतनी दहशत इस कालोनी में फैल गई थी कि अधिकांश लोगों ने रायपुर पश्चिम स्थित स्थित इस सुनसान स्थल पर बसी उक्त कालोनी से घर खाली कर दिया कई तो बेचकर चले गये.इसके बाद तो जैसे रायपुर में डकैतों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया. फाफाडीह स्टेट बैंक कालोनी,सुन्दर नगर,श्यामनगर ऐसे कई इलकों को डकैतों ने अपना शिकार बनाया.अधिकांश डकैतियां ऐसे स्थलों में होती थी जहां से रेल पटरियां निकलती है या स्टेशन नजदीक हो. रायपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों को भी ऐसे गिरोह ने निशाना बनाया.पुलिस का हमेशा शक चड्डी बनियान गिरोह अथवा पारधी गिरोह पर रहा.यह सच भी निकला. बंजारों की तरह रहने वाली इस प्रजाती के लोगों का एक तरह से यही धंधा है- डकैती के साथ यह विचित्र किस्म की हरकत भी करते हैं अर्थात दहशत पैदा करने के लिये पत्थर फैकते हैं आस-पास शौच करते हैं और निडर होकर वारदात को अंजाम देते हैं.  रेलेवे स्टेशन के आसपास के घरों को चुनते हैं ताकि वारदात के बाद उस गाड़ी से निकल भाग सके. बरसात ठण्ड के दिनों में सुबह के पहर में वारदात को अंजाम देते हैं और भाग निकलते हैं.आज और कल की बात में बहुत अंतर आ गया अब लोगों के घरों के आस-पास सीसीटीवी, गार्ड और अन्य अनेक सुरक्षा उपाय के बावजूद डकैतों को मौका मिल रहा है यह या तो हमारी लापरवाही के कारण हो रहा है या पुलिस की कमजोरी के कारण कि वह रेलवे स्टेशनों, बस स्टैण्डों पर व शहरों के बाहरी क्षेत्र में जहां दवा बेचने या अन्य किस्म की गतिविधियों पर लिप्त लोगों के ऊपर निगाह नहीं रखती.स्टेशन में हर आने-जाने वाली गाडिय़ों के समय पुलिस की सघन निगाह रखे तो डकैती और डकैतों पर नियंत्रण पाया जा सकता है. कालोनियों में रहने वालों की भी गलती है कि बैंक और अन्य सुविधाएं होने के बावजूद घरों में भारी मात्रा में नगदी और गहने रखना तो एक तरह से अपराधियों को आमंत्रित करना ही है. राजधानी रायपुर अब महानगर के रूप में तब्दील हो चुका है पुलिस की पर्याप्त गश्त नहीं है.रात घूमने फिरने वालों और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कोई निगरानी नहीं है. स्थानीय के मुकाबले बाहरी लोग विदेशी लुटेरों की तरह आते हैं और लूटकर चले जाते हैं. पिछली वारदातों का विश्लेषण किया जाये तो यह अपने आप साबित हो जाता है कि अधिकांश वारदातों में बाहरी गिरोह का हाथ होता है.

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