सोमवार, 7 सितंबर 2015

हाईवे, फोरलेन सड़कों पर एक्सीडेंट के लिये वाहन चालक कितना दोषी?



हाईवे पर एक्सीडेंट के पीछे असली कारण क्या है? ड्रायवर की लापरवाही? ड्रायवर का शराब पीकर गाड़ी चलाना, तेज रफ्तार, ऊटपटांग मोड़, गाड़ी के सामने अचानक मवेशियों अथवा किसी व्यक्ति  या अन्य किसी वस्तु या चीज  का आ जाना या ओवरटेक?- दुर्घटना के पीछे यह सभी कारण हो सकते हैं. अगर हाईवे, फोरलेन पर तेज रफ्तार से गाड़ी नहीं चले तो एक घंटे का सफर दो और तीन घंटे का हो जाये किन्तु इन सबके बीच आज ज्वलंत प्रश्न है. सड़कों पर मवेशियों का झुंड और उनका टांग पसारे पड़े रहना, आवारा मवेशियों का अचानक वाहन के आगे कूद पडऩा, झुंड के रूप में चराने अथवा किसी तालाब में पानी पिलाने या नहलाने के लिये उस स्थिति में भी निकालना जबकि दूसरा रास्ता मौजूद है आदि. जब हाईवे खाली मिलता है तो हर ड्रायवर चाहे वह शराब पिये हुए हो या न हो उसके  गाड़ी का एक्सीलेटर बढ़ता ही रहता है, वह फिर या तो किसी रेड सिंग्नल पर रूकता है या फिर कोई दूसरी गाड़ी के सामने खड़े होने या आने से कम होती है लेकिन सपाट रोड पर अचानक मवेशी कूद पड़े तो किसकी गलती? राजधानी रायपुर के आसपास रिंग रोड और सड़कों पर रात-दिन आवारा मवेशियों का मेला लगा रहता है. इन सड़कों से राजधानी रायपुर के बड़ेबड़े अफसर, मंंत्री, विधायक, महापौर और अन्य शहरों व गांवों को चलाने वाले अधिकारियों की गाडिय़ां गुजरती है किन्तु उन्हे यह दिखाई नहीं देता कि सड़कों पर आवारा मवेशियों का झुंड पांव पसारे पड़े रहते हैं, उन्हें हटवाने के लिये वे चाहे तो अपनी गाड़ी में बैठे-बैठे ही निर्देश जारी कर सकते हैं किन्तु ऐसा होता नहीं. शायद अपने दफ्तरों से निकलने के बाद ऊपर लिये गये नामों में से किसी को देश दुनिया की चिंता नहीं होती- अगर ऐसा नहीं तो पिछले चौबीस घंटे के दौरान हुए बड़े-बड़े हादसे नहीं होते. राजधानी के आसपास तीन महत्वपूर्ण हाईवे तथा फोरलेन सड़कों पर तेज रफ्तार कारों के सामने आए तीन मवेशियों की मौत हो गई तथा गाडिय़ां भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. फोरलेन जीई रोड पर अग्रसेनधाम मोड़ के पास तथा वीआईपी रोड पर टेमरी गांव के पास हुए हादसों में गायों की तो मौत हुई लक्जरी कारें भी क्षतिग्रस्त हुई. शहर के अंदर-बाहर सब इस तरह की घटनाएं मवेेशियों के कारण होती है लेेकिन सारा दोष अक्सर ड्रायवरों पर मढ़ दिया जाता है. दुर्घटना होने के बाद ड्रायवर को हर स्थिति में अपनी जान बचाकर भागना पड़ता है, चाहे उसकी गलती हो या न हो. मवेशी सड़कों पर आ ही न पाये इसका इंतजाम क्यों नहीं होता? क्यों नगर निगम के लोग प्रतिदिन अभियान चलाकर मवेशियों को कांजी हाउस में नहीं भेजते? प्रमुख और लम्बी सड़कों के दोनों तरफ ऐसे बाड़ क्यों नहीं लगाये जाते कि मवेशियों का प्रवेश सड़कों पर न हो? आप राजधानी के जीई रोड पर डिवाइडर जहां पौधे लगाये गये हैं वहां मवेशियों को ऊपर चढ़कर खड़े रहते और पौधों को नुकसान पहुंचाते कभी भी देख सकते हैं- एक तरफ हम वृक्षारोपण के लिये अभियान चला रहे हैं, दूसरी तरफ पौधों को मवेशी रौंदकर खत्म कर रहे हैं. डिवाइडरों पर खड़े मवेशी अचानक किसी तेज कार के सामने कूद जाये तो हादसा होना स्वाभाविक है. मवेशी दुर्घटनाओं को अंजाम देने वाले सबसे बड़ी वजह बन गये हैं, जिस पर गंभीरता से कोई कदम उठाना जरूरी है.