गुरुवार, 10 सितंबर 2015

प्रेम, सेक्स-संपत्ति की भूख ...और अब तो रक्त संबंधों की भी बलि चढऩे लगी!





कुछ लोग तो ऐसे हैं जो मच्छर, मक्खी, खटमल और काकरोच भी नहीं मार सकते लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो हैवानियत की सारी हदें पार कर मनुष्य यहां तक कि अपने रक्त संबंधों का भी खून करने से नहीं हिचकते. इंसान खून का कितना प्यासा है वह आज की दुनिया में हर कोई जानता है क्योंकि आतंकवाद और नक्सलवाद के चलते रोज ऐसी खबरें पढऩे-सुनने को मिल जाती है जो क्रूरता की सारी हदें पार कर जाती हैं. मनुष्य का राक्षसी रूप इस युग में ही देखने को मिलेगा शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. आतंकवाद और नक्सलवाद हिंसा के दो रूप के अतिरिक्त अब रिश्तों के खून का वाद भी चल पड़ा है जो सामाजिक व पारिवारिक मान्यताओं, संस्कृति- परंपराओं का भी खून कर रहा है. नारी जिसे अनादिकाल से अबला, सहनशक्ति और मासूमियत, ममता और प्रेम का प्रतीक माना जाता रहा है उसका भी अलग रूप देखने को मिल रहा है. रक्त संबंध, रिश्ते, सहानुभूति, आदर, प्रेम, बंधन सबको तिलांजलि देकर जिस प्रकार कतिपय मामलों में अबलाओं ने जो रूप दिखाना शुरू किया है वह वास्तव में ङ्क्षचंतनीय, गंभीर और खतरनाक बन गया है. नारी के कई रूप हमें इन वर्षों के दौरान देखने को मिले हैं लेकिन जो रूप अभी हाल के दिनों में देखने को  मिला है उसने तो समाज को एक तरह से हिलाकर ही रख दिया है. जिस नारी को समाज ने शिखर तक देखा उसने दौलत और शोहरत, सेक्स के लिये अपने ही खून का खून कर दिया. बात मुंबई के इन्द्राणी मुखर्जी का है जिसने अपनी ही बेटी को दौलत के खातिर रास्ते से हटा दिया और अब वह जेल में अन्य कैदियों के साथ चार रोटी और बाद में अन्य अपने नित्य कर्मों के लियेतार में हैं. दूसरा किस्सा देश व विश्व में रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत राज्य गुजरात के अमरेली का है जहां एक बहन ने अपने प्रेमी के साथ अफेयर में आड़े आने के कारण इस क्रूरता से अपने सगे भाई का वध किया कि सुनने वालों केे रोंगटे खड़े हो गये और देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह गई. बताते हैं उसका इरादा अपने माता और पिता का भी खून करने का था लेकिन इससे पूर्व ही वह पकड़ ली गई. इस लड़की ने बड़े तरीके से अपने भाई के साथ आंखमिचौली खेली, आंख में पट्टी बांधी, कुर्सी पर बिठाया और दुपट्टे से हाथ को बंाधा, किचन में गई चाकू लेकर आई- भाई से कहा कि अब में तुझे मार डालूंगी और चाकू उसके शरीर में दो बार घुसाकर मार डाला, बाथरूम जाकर खून साफ किया व नये कपड़े पहन बाहर जाकर लोगों को बताया कि भाई को कुछ हो गया. यह बयान उसने पुलिस को भी दिया. तीसरी घटना बंगलोर के गोकुल की है जिसने पूर्व पे्रमिका को पाने के लिये अपनी पत्नी का खून कर दिया तथा इसे छिपाने व अपने प्रेमिका के पति जोस को फंसाने के लिये विमानों को उड़ाने की धमकी उसके सिम को मोबाइल में डालकर दी. लोगों की तकनीक देखिये कितनी हाईटेक हो गई हैं. रोज हो रही ऐसी घटनाओं ने उन सामाजिक मान्यताओं पर ही प्रश्र चिन्ह लगा दिया है जो वर्षों से चली आ रही है. मां-बाप, भाई-बहन, पति-पत्नी, चाचा-चाची, दादा-दादी, पोता-पोती, नाना-नानी और ऐसे कई रक्त संबंधों से भरे समाज में जब खूनी खेल होता है तो समाज का चौकना स्वाभाविक है, लेकिन यह सब बंद कमरों और बंद दीवारों के भीतर होता है जिसपर निगाह तभी पड़ती है जब सब हो जाता है. इसलिये इससे निपटने के लिये भी समाज में ऐसा माहौल तैयार करना वर्तमान परिथिति में कठिन है. अब सिर्फ हम यही कह सकते हैं कि आगे चलकर सब ठीक हो जायेगा या स्थिति और खराब हो जायेगी. इसमें दूसरे स्थिति के ही ज्यादा चांसेस हैं.