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भूमि पर विवाद का खात्मा?अब राजनीति में नये-नये पैतरे और इन्द्राणी का क्राइम रहस्य!



प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी भूमि संबन्धी विधेयक अब नहीं लायेंगे.बिहार में शीघ्र ही विधानसभा के लिये चुनाव है, इससे पूर्व लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और सोनिया गांधी की कांग्र्रेस के महागठबंधन ने अपने पासे फेकना शुरू कर दिया है.गुजरात से पटेल आरक्षण को लेकर उठी राजनीतिक आग यद्यपि अपने जन्म स्थल गुजरात में थम गई है लेकिन लगता है कि आगे चलकर इसकी आंच देश  के कई राज्यों में फैलाने की तैयारी शुरू हो गई है .यह आंदोलन अब सरकार के लिये मुसीबते खड़ी कर सकता है. आंदोलन के जनक हार्दिक पटेल का कहना है कि वह अब देश के सत्ताईस करोड़ लोगों को एकत्रित कर एक संगठित आंदोलन देशभर में शुरू करेंगे. इधर देश की हाई प्रोफाइल शीना मर्डर केस रोज नये-नये रहस्य उगल रहा है इससे मुम्बई पुलिस खुद आश्चर्य चकित है. इस मामले में रहस्योद्घाटन हुआ है कि इस पूरे कांड की विलन इन्द्राणी मुकर्जी शीना से जहंा नफरत करती थी वहीं उसे व उसके भाई मिखाइल को मारने का प्लान बहुत पहले बना लिया था इसके लिये वह उन्हे समय समय पर स्लो पाइजन भी देती थी. इन्द्राणी मुकर्जीे हत्या के आरोपो से इंकार करती है जबकि उसके पूर्व पति संजय खन्ना ने हत्या के आरोपों को स्वीकार कर लिया है.पुलिस ने इंद्राणी और पीटर मुकर्जी के घर से एक सूटकेस भी जब्त कर और कई रहस्यों पर से पर्दा हटाने का दावा किया है जबकि इस मामले का हश्र भी आरूषी हत्याकांड जैसा होता लग रहा है यद्यपि पुलिस ने सीआरपी की धारा 165 के तहत सारे बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराकर अपने सबूतों को पुख्ता किया है बहरहाल यह मामला अभी कई रहस्यों को खोलेगा इधर छत्तीसगढ़ सरकार ने इस अंचल के गरीबों की सुध ली है, उसने घोषणा की है कि अब
छत्तीसगढ़ के छत्तीस शहरों में कोई गरीब बिना घर के नहीं रहेगा सबके पास अपना घर होगा.पिछला लोकसभा सत्र भूमि अधिगहण संबन्धी बिल और ललित गेट और अन्य कई मुद्दो को लेकर बाधित रहा, सरकार और विपक्ष दोनों हटधर्मी पर अड़े हुए थे और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी हठधर्मिता छोड़ दी है,उन्होनें अब यह विधेयक पेश नहीं करने का ऐलान कर दिया है.राजनीतिक विश£ेषकों का कहना है कि ऐसा ही करना था तो सत्र को इतना बाधित क्यों होने दिया? बहरहाल अब आगे आने वाला समय बिहार विधानसभा चुनाव राजनीति की एक नई राह तय करेगा.राजद, राजग और कांग्रेस के महागठबंधन और सत्तारूढ पार्टी में कौन देश की राजनीति में हावी होगा यह भी तय करेगा. वाक युद्व चरम पर है दूसरी ओर आरक्षण की राजनीति एक नई जमीन तलाश  रही है.हार्दिक पटेल ने सत्ताईस करोड़ लोगों की फौज को इस अभियान में उतारने का ऐलान कर सनसनी पैदा कर दी है जबकि इस अभियान के विरोधी यह भी कहने को नहीं चूक रहे हैं कि यह देश से आरक्षण को ही खत्म करने का एक अभियान है.

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उम्र कैद की सजा पर से संदेह खत्म! क्या फांसी की सजा पर भी सुको सज्ञान लेगी?

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