रविवार, 16 अगस्त 2015

मोदी का भाषण अच्छा लेकिन ग्रॉफ गिरा, कई लोगों की उम्मीदों पर भी पानी फिरा!




नरेन्द्र मोदी भाषण अच्छा देते हैं, उनकी इसी कला ने आज उन्हें लोकप्रिय बना दिया, लेकिन क्या इस बार उनके भाषण के ग्रॉफ में गिरावट आई है? सिर्फ भाषण से कब तक लोगों की आशााएं पूरी होंगी? स्वतंत्रता दिवस पर 86 मिनट  दस सेकण्ड का भाषण लोगों को अच्छा जरूर लगा लेकिन क्या यह जनता की उम्मीदों को पूरा कर सकेगा? जो वादे उन्होंने चुनाव के दौरान किये, उसमें से कितने पूरे हुए? विश्लेषक इसे विभिन्न ढंग से लेते हैं. प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर से अपने भाषण में वह सब कुछ नहीं कहा जो वास्तव में घट रहा है. उन्होंने अपने भाषण में पूर्व सैनिकों के वन रैंक-वन पेंशन पर दिलासा ही दी. टेररिज्म और पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रहे सीजफायर वॉयलेशन समेत इंटरनेशनल रिलेशन्स पर भी बात नहीं की। गुरदासपुर और घाटी में आतंकवादी हमलों में जवान-अफसर शहीद हो रहे हैं ऐसे में पीएम को लाल किले से देश के दुश्मनों को एक मैसेज देना चाहिए था लेकिन यह भी नहीं हुआ. पीएम ने लोगों की दिक्कतों को ज्यादा तरजीह दी. एक साल में सरकार के किए काम गिनाए. स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसे कुछ नए नारे दिए. मोदी ने टीम इंडिया की बार-बार बात की, लेकिन विश्लेषकों का दावा है कि उनके मंत्रिमंडल में कतिपय सदस्यों पर जो आरोप लगे हैं उसपर जिस ढंग से पर्दा डाला गया वह किसी को रास नहीं आया. इसमें संदेह नहीं कि अब तक किसी भी पीएम ने लाल किले से इतनी लंबी स्पीच नहीं दी थी. अपने भाषण के दौरान शुरुआती कुछ मिनटों को छोड़कर वे कहीं कमजोर नजर नहीं आये, उनकी बॉडी लैंग्वेज में तो दम था, लेकिन बातों में जोर कुछ कम होता दिखा. मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा- राहुल गांधी पर लगभग सीधे कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोगों को नींद नहीं आती, राहुल ने इसपर कहा कि इसका जवाब आज वे यहां इस मौके पर नहीं देंगें लेकिन क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर कोई राजनीतिक मसला उठाना था?- पीएम के बयान से रिटायर्ड फौजी भी भड़क गये. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि हम भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं- पाकिस्तान की हरकतों के बारे में चुप्पी, कालाधन मसले पर चुप्पी, बेरोजगारी, मंहगाई आदि मुद्दों से हाथ खींच लेने से उनके राजनीतिक ग्रॉफ में कमी दर्ज हुई है. पीएम ने ऐलान कम किए और पिछले साल के वादों पर सफाई देते नजर आए।