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अच्छे पकवान से भरी थाली हर आदमी के सामने है लेकिन बेबसी कि उसे खा नहीं पाता!



अच्छे पकवान से भरी थाली हर
आदमी के सामने है लेकिन
बेबसी कि उसे खा नहीं पाता
एक व्यक्ति ने दस सालों में सौ करोड़ रुपये की संपत्ति बना डाली, नब्बे कंटेनरों से भरी एक ट्रेन करीब अठारह दिनों से लापता है. नान घोटाला, व्यापम घोटाला में अरबों रुपये का घोटाला हुआ, ललित मोदी घोटाला, कोलगेट घोटाला, राधे मां की संपत्ति अरबों में, आशाराम बापू, राम रहीम और ऐसे ही कई बाबाओं की प्रापर्टी अरबों में, मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे और अन्य आस्था केन्द्रों की आय व प्रापर्टी खरबों मेंं, रिश्वतखोरी से कमाने वालों की बेहिसाब संपत्ति का अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन समय-समय पर जो छापे पड़ते हैं उससेे यह जरूर संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में भी पैसों की कोई कमी नहीं. फिर क्यों गरीब है हमारा देश? हाल ही एक अखबार ने जो सर्वेक्षण कुछ आस्था केन्द्रों का किया उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं, जिसमें कहा गया है कि देश के सिर्फ चार आस्था केन्द्रों, जिसमें केरल का प्रसिद्ध आस्था के न्द्र शामिल नहीं है उसकी एक दिन की औसत आय प्रतिदिन आठ करोड़ रुपये है. अकेले एक आस्था केन्द्र की कुल संपत्ति 1.30 लाख करोड़ है. जबकि देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की कुल दौलत 1.29 करोड़ रुपये ही है. हम विदेश में काला धन की खोज करते-करते बूढ़े हो जाएंगे जबकि धन तो देश में ही छिपा है. आज देश के लोगों की स्थिति ठीक वैसी है जिसके सामने अच्छे-अच्छे पकवानों से भरी थाली रखी है लेकिन वह खा नहीं सकता, मसलन आस्था केन्द्रों में 22 हजार टन सोना जो करीब 20 लाख टन होता है, भरा पड़ा है. इसमें केरल के पद्मनाभ मंदिर का सोना शामिल नहीं है. जमा सोना अमरीकी गोल्ड रिजर्व- 8133.5 टन से ढाई गुना और भारतीय गोल्ड रिजर्व का 557.7 टन का चार हजार गुना है. जमा स्वर्ण भंडार की कीमत पचास लाख करोड़ रुपये है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को पूरा करने के लिये क्या यह पर्याप्त नहीं है? देश में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से नजर आ रहा धन और काला धन जो विभिन्न स्त्रोतों से लोगों ने एकत्रित किया है वह बाहर आ जाये तो देश में कोई गरीब न रहे और देश में लोगों का जीवन स्तर किसी भी विकसित राष्ट्र के मुकाबले शिखर पर पहुंच सकता है. देश का प्रत्येक व्यक्ति पांच सौ साल तक फ्री पेट्रोल भरवा सकता है, एक वर्ष तक फ्री ट्रेन में सफर कर सकता हैं, दो साल तक मुफत में खाना खा सकता है. हम विकास के ऐसे मोड़ पर पहुंच सकते हैं जो दुनिया में कहीं नहीं? फिर यह पहल क्यों नहीं हो रही कि इस पूरी संपत्ति का जो कुछ लोगों तक सीमित है उसे निकालकर देश के खजाने में डाला जाये और हम अपनी उन आवश्यकताओं का पहले निपटारा करें जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है. आखिर इन सभी आस्था केन्द्रों व लोगों द्वारा छिपकर कमाई गई सारी संपत्ति हमारे जेब से निकला हुआ पैसा ही तो है. देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आज एक वर्ष बाद भी बहुत उम्मीद है कि वह काले धन को विदेश से वापस लाने के अलावा देश में मौजूद धन को भी सरकारी खजाने में एकत्रित कर देश को एक नये युग में प्रवेश करायेंगे.


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ऊँची दुकान फीके पक वान!
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